MP News: सिवनी में कैसे हुआ हवाला कांड, 1.45 करोड़ की बंदरबांट, CSP पूजा पांडे समेत 10 पुलिसकर्मी निलंबित
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में पुलिस व्यवस्था पर एक ऐसा दाग लग गया है, जो पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। हवाला की कथित 2.96 करोड़ रुपये की राशि में से 1.45 करोड़ रुपये की 'बंदरबांट' के आरोप में सिवनी की सीनियर सिवनी पुलिस अधिकारी (CSP) पूजा पांडे समेत कुल 10 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
यह मामला 8-9 अक्टूबर की दरमियानी रात का है, जब एनएच-44 पर शीलादेही बायपास के पास चेकिंग के दौरान कटनी से महाराष्ट्र के जालना जा रही एक कार से अवैध नकदी बरामद की गई। लेकिन जब्ती के नाम पर केवल आधी राशि दिखाई गई, बाकी का क्या हुआ - यह सवाल अब पुलिस महकमे को हिला रहा है।

घटना की जानकारी मिलते ही जबलपुर जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IG) प्रमोद वर्मा ने प्रारंभिक जांच के बाद 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया, जबकि अगले ही दिन प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना ने CSP पूजा पांडे को भी तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। निलंबितों में बंडोल थाना प्रभारी (TI) अर्पित भैरम, प्रधान आरक्षक, आरक्षक, गनमैन और ड्राइवर शामिल हैं। जबलपुर के एएसपी आयुष गुप्ता को मामले की गहन जांच सौंपी गई है, और उन्हें तीन दिनों में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। सिवनी के पुलिस अधीक्षक (SP) सुनील मेहता ने स्वीकार किया है कि राशि जब्ती और रिपोर्टिंग में देरी हुई, जो इस प्रकरण को और संदिग्ध बना रही है।
यह कांड न केवल पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है, बल्कि हवाला कारोबार के बड़े नेटवर्क को भी उजागर कर रहा है। पीड़ित व्यापारी सोहनलाल परमार और उनके साथियों ने शिकायत दर्ज कराई है कि कार में कुल 2.96 करोड़ रुपये थे, लेकिन पुलिस ने केवल 1.45 करोड़ ही जब्त दिखाया। बाकी 1.51 करोड़ रुपये की 'गायब' राशि पर 'बंदरबांट' का आरोप लगाया गया है।
रात की चेकिंग से सुबह की शिकायत तक
मामला 8 अक्टूबर 2025 की देर रात करीब 2 बजे का है। सूचना के आधार पर CSP पूजा पांडे के निर्देश पर बंडोल थाना प्रभारी TI अर्पित भैरम की अगुवाई में एक पुलिस टीम ने एनएच-44 पर शीलादेही बायपास के पास कटनी से नागपुर (फिर जालना) जा रही एक महाराष्ट्र रजिस्ट्रेशन वाली कार को रोका। कार में जालना के व्यापारी सोहनलाल परमार, उनके ड्राइवर और दो अन्य साथी सवार थे। पूछताछ के दौरान यात्रियों ने दस्तावेज पेश करने में असमर्थता जताई, जिसके बाद पुलिस ने वाहन की तलाशी ली।
तलाशी में कार के डिक्की और अन्य स्थानों से नकदी के बंडल बरामद हुए। पीड़ितों के अनुसार, कुल राशि 2.96 करोड़ 50 हजार रुपये थी, जो हवाला कारोबार से जुड़ी थी। लेकिन पुलिस ने केवल 1.45 करोड़ रुपये ही जब्त करने की कार्रवाई दर्ज की और बाकी राशि को 'गायब' बता दिया। आरोप है कि जब्ती के बाद पुलिसकर्मियों ने यात्रियों के साथ मारपीट की, उन्हें धमकाया और कार को बंडोल थाने में एक रात रोक लिया। अगले दिन सुबह, यानी 9 अक्टूबर को, व्यापारी और उनके साथी थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराने लगे। शुरू में CSP पूजा पांडे ने लूट की घटना से इनकार किया, लेकिन जब मामला डीआईजी स्तर तक पहुंचा, तो हड़कंप मच गया।
शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि पुलिस ने राशि की गिनती की ही नहीं और सीसीटीवी फुटेज भी मिटाने की कोशिश की। इसके अलावा, घटना की सूचना उच्च अधिकारियों को समय पर नहीं दी गई, जो विभागीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। SP सुनील मेहता ने शाम को प्रेस रिलीज जारी कर कहा, "चेकिंग के दौरान 1.45 करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं, और इसकी वैधता की जांच जारी है। देरी हुई, लेकिन अब पारदर्शी जांच हो रही है।" हालांकि, यह बयान पीड़ितों को संतुष्ट नहीं कर सका, जिन्होंने कहा कि बाकी राशि की जब्ती क्यों नहीं दिखाई गई।
निलंबन की कार्रवाई: पहले 9, फिर 10 - CSP पर गिरी गाज
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए IG प्रमोद वर्मा ने 9 अक्टूबर को ही 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। निलंबन के आधार थे - अनुशासनहीनता, संदिग्ध आचरण, रिपोर्टिंग में देरी और कथित गबन। निलंबित कर्मियों को पुलिस लाइन सिवनी अटैच कर दिया गया है, जहां उन्हें नियमित उपस्थिति देनी होगी। जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, लेकिन पद से हटाए जाने का कलंक लग चुका है।
अगले दिन, 10 अक्टूबर को, DGP कैलाश मकवाना ने CSP पूजा पांडे को निलंबित कर दिया। आदेश में कहा गया है कि "प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर तत्काल निलंबन किया जा रहा है। उनका मुख्यालय अब पुलिस मुख्यालय भोपाल रहेगा।" पूजा पांडे, जो सिवनी एसडीओपी के रूप में कार्यरत थीं, पर आरोप है कि उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने कार्रवाई नहीं की। उनके रीडर, दो गनमैन और ड्राइवर भी निलंबन की जद में हैं। कुल मिलाकर, यह कार्रवाई 10 पुलिसकर्मियों पर हुई है।
निलंबित पुलिसकर्मियों की पूरी सूची
नीचे निलंबित कर्मियों की विस्तृत सूची दी गई है, जो विभागीय आदेश के अनुसार है:
क्रमांक,पदनाम एवं नाम,पदस्थापना
- 1,उप निरीक्षक अर्पित भैरम,"थाना प्रभारी, बंडोल"
- 2,प्रधान आरक्षक 203 माखन,"एसडीओपी कार्यालय, सिवनी"
- 3,प्रधान आरक्षक 447 रविंद्र उईके,"रीडर, एसडीओपी कार्यालय, सिवनी"
- 4,आरक्षक 803 जगदीश यादव,"एसडीओपी कार्यालय, सिवनी"
- 5,आरक्षक 306 योगेंद्र चौरसिया,"एसडीओपी कार्यालय, सिवनी"
- 6,आरक्षक चालक 582 रितेश,"ड्राइवर, एसडीओपी कार्यालय, सिवनी"
- 7,आरक्षक 750 नीरज राजपूत,"थाना बंडोल, सिवनी"
- 8,आरक्षक 610 केदार,"गनमैन, एसडीओपी सिवनी / 8वीं वाहिनी विसबल, छिंदवाड़ा"
- 9,आरक्षक 85 सदाफल,"गनमैन, एसडीओपी सिवनी / 8वीं वाहिनी विसबल, छिंदवाड़ा"
- 10,सीनियर सिवनी पुलिस अधिकारी (CSP) पूजा पांडे,"एसडीओपी, सिवनी"
जांच का दायरा: क्या सामने आएंगे और राज?
जांच के लिए जबलपुर एएसपी आयुष गुप्ता की टीम सक्रिय हो गई है। वे सीसीटीवी फुटेज, जब्त राशि की वीडियोग्राफी, गवाहों के बयान और फोन रिकॉर्ड्स की पड़ताल कर रहे हैं। IG वर्मा ने कहा, "तीन दिनों में पूरी रिपोर्ट सौंपी जाएगी। अगर गबन सिद्ध हुआ, तो सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।" DGP मकवाना ने प्रदेश स्तर पर हवाला कारोबार पर नकेल कसने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला सिवनी पुलिस के लिए शर्मनाक है, लेकिन व्यापक परिप्रेक्ष्य में मध्य प्रदेश में हवाला नेटवर्क की मौजूदगी को उजागर करता है। कटनी-नागपुर हाईवे पर ऐसी घटनाएं पहले भी सुर्खियां बटोर चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल सतह का मामला है; असली नेटवर्क महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश बॉर्डर पर फैला हुआ है।
विपक्ष का हमला, सरकार की सफाई
कांग्रेस ने इस कांड को 'पुलिस की लूट' बताते हुए विधानसभा में विशेष सत्र की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट किया, "खाकी अब लुटेरी बन गई है। सिवनी का यह कांड साबित करता है कि कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज बची ही नहीं।" वहीं, भाजपा ने कहा कि कार्रवाई हो चुकी है, और जांच पूरी होने पर दोषियों को सजा मिलेगी। SP सुनील मेहता ने सफाई दी, "यह एकाकी घटना है, पूरे विभाग को बदनाम न करें।"
पुलिस की छवि पर बट्टा, हवाला पर नजर
यह कांड न केवल सिवनी पुलिस की छवि को धूमिल कर रहा है, बल्कि आम नागरिकों में डर पैदा कर रहा है। हवाला कारोबारियों को भी झटका लगा है, जो अब नए रूट तलाश रहे हैं। अगर जांच में गंभीर भ्रष्टाचार सिद्ध होता है, तो यह मामला सीबीआई के दायरे में जा सकता है। फिलहाल, सिवनी में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है, लेकिन सवाल वही है - क्या यह कार्रवाई पर्याप्त है, या सिस्टम में जड़ से सुधार की जरूरत है?
एनएसयूआई और अन्य छात्र संगठनों ने सिवनी में प्रदर्शन की चेतावनी दी है। यह कांड मध्य प्रदेश की राजनीति को गर्माने वाला साबित हो सकता है, खासकर आगामी चुनावों के मद्देनजर। अब सभी की नजरें एएसपी गुप्ता की रिपोर्ट पर हैं - क्या यह हवाला कांड का अंतिम अध्याय होगा, या नई परतें खुलेंगी?
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