Vidisha MP News: मां काली प्रतिमा टूटी, मुस्लिम बस्ती से फेंके पत्थरों का आरोप, जांच में बच्चों की गलती

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन ही मध्य प्रदेश के विदिशा शहर में एक दुखद घटना ने भक्ति का माहौल खराब कर दिया। जय स्तंभ चौक बजरिया इलाके में मां काली की प्रतिमा ले जाते समय अज्ञात लोगों ने पथराव कर दिया, जिससे मूर्ति टूट गई।

झांकी में शामिल एक युवक ने थाने में शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि पत्थर मुस्लिम बस्ती से फेंके गए। लेकिन पुलिस जांच में सामने आया कि छत पर खेल रहे बच्चों ने गलती से पत्थर फेंका था। बच्चों के पिता ने समिति से माफी मांगी, और विवाद शांत हो गया। दो युवकों को हल्की चोटें आईं, लेकिन अब इलाके में शांति है। आइए, इस पूरी घटना को सरल भाषा में विस्तार से समझते हैं, ताकि आप हर पहलू को अच्छी तरह जान सकें।

Goddess Kali statue vandalised stones hurled from Muslim neighbourhood alleged investigation finds children at fault

नवरात्रि की शोभायात्रा में भगदड़

शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर 2025 से शुरू हुई, जब पूरे देश में मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा हो रही है। विदिशा शहर में भी भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। सोमवार शाम करीब 6 बजे जय स्तंभ चौक बजरिया इलाके में नंदवाना समिति ने मां काली की प्रतिमा के साथ एक भव्य झांकी निकाली। यह इलाका विदिशा का पुराना व्यावसायिक केंद्र है, जहां हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय रहते हैं। झांकी में सैकड़ों भक्त शामिल थे - महिलाएं, पुरुष और बच्चे। मूर्ति को रंग-बिरंगे फूलों और लाइट्स से सजाया गया था, और ढोल-नगाड़ों के साथ नारे लग रहे थे।

लेकिन शोभायात्रा जैसे ही मुस्लिम बस्ती के पास पहुंची, अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तीन से चार पत्थर फेंके गए, जिनमें से एक सीधे मां काली की प्रतिमा पर लगा। इससे मूर्ति के हाथ का हिस्सा टूट गया। झांकी में शामिल एक युवक को हल्की चोट लगी, जबकि एक अन्य को भी मामूली खरोंच आई। युवक ने तुरंत कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। उसका आरोप था, "पत्थर आसपास के घरों, खासकर मुस्लिम बस्ती से फेंके गए। यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की साजिश लग रही है।" घटना के वक्त इलाके में हल्की भीड़ थी, और पथराव से भगदड़ मच गई। लोग चीखने-चिल्लाने लगे, और झांकी को जल्दी आगे बढ़ाया गया।

यह घटना नवरात्रि के पहले ही दिन हुई, जब विदिशा में सैकड़ों झांकियां निकल रही थीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि बजरिया इलाका संवेदनशील है, लेकिन ऐसी घटनाएं दुर्लभ हैं।

तनाव का माहौल: हंगामा, नारेबाजी और पुलिस का एक्शन

पथराव की खबर फैलते ही मौके पर सैकड़ों लोग जमा हो गए। गुस्साए भक्तों ने हंगामा शुरू कर दिया। वे 'जय मां काली' के नारे लगाते हुए आसपास के घरों की ओर इशारा कर रहे थे। कुछ ने कहा, "यह धार्मिक उन्माद है, सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।" नारेबाजी तेज हो गई, और स्थिति बेकाबू होती दिख रही थी। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "लोग मूर्ति को देखकर रो रहे थे। प्रतिमा टूटना सबके लिए सदमा था।"

सूचना मिलते ही कोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज अपने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने भीड़ को संभाला और शांति की अपील की। प्रशासनिक अधिकारी भी आ गए, जिन्होंने कहा, "यह मामला संवेदनशील है। हम पूरी जांच करेंगे, लेकिन हिंसा नहीं होने देंगे।" पुलिस ने इलाके को घेर लिया और वाहनों को रोक दिया। कलेक्टर और एसपी ने भी निगरानी संभाली। तनाव कम करने के लिए समिति के पदाधिकारियों को भी शांत किया गया।

जांच का खुलासा: बच्चों की गलती, आक्रोश शांत

विवाद बढ़ता देख पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। थाना प्रभारी आनंद राज समिति के पदाधिकारियों के साथ उस घर पहुंचे, जहां से पत्थर फेंके गए थे। वहां जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ - छत पर 4-5 बच्चे खेल रहे थे। घर में हाल ही में निर्माण कार्य हुआ था, जिसकी वजह से गिट्टियां और पत्थर बिखरे पड़े थे। बच्चे खेल-खेल में एक गिट्टी फेंक बैठे, जो झांकी पर जा लगी।

समिति के पदाधिकारी राज खटीक ने जांच के बाद कहा, "हमने जाकर देखा तो बच्चे खेल रहे थे। उनसे गलती से पत्थर फेंका गया था। अब हम कोई पुलिस कार्रवाई नहीं चाहते। यह अनजाने में हुआ।" आक्रोश शांत होते ही समिति ने शिकायत वापस ले ली। बच्चों के पिता शफीन पठान ने भी तुरंत माफी मांगी। उन्होंने कहा, "कुछ समय पहले हमारे घर में निर्माण हुआ था। गिट्टियां छत पर रखी थीं। आज बच्चे खेल रहे थे, गलती से एक फेंक दिया। हमने झांकी समिति से माफी मांग ली है। आगे ध्यान रखेंगे, गिट्टियां हटा ली हैं।" शफीन ने समिति को घर बुलाया और मूर्ति के लिए नया हिस्सा बनवाने का वादा किया।

इस खुलासे से तनाव तुरंत कम हो गया। पुलिस ने कहा कि मामला सुलझ गया है, कोई FIR दर्ज नहीं की गई।

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