MP News: भोपाल में गैंगस्टर जुबेर का जुलूस, अब पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, हाईकोर्ट कार्रवाई, जानिए पूरा मामला

Bhopal News: भोपाल में कुख्यात गैंगस्टर जुबैर मौलाना की गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा उसका सिर और दाढ़ी-मूंछ मुंडवाकर जुलूस निकालने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। इस घटना ने न केवल शहर में हलचल मचा दी, बल्कि जबलपुर हाईकोर्ट तक पहुंच गया। '

कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग को दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। आखिर क्या है यह पूरा मामला? आइए, इसे रोचक और सरल भाषा में समझते हैं।

Gangster Zuber procession now puts policemen in trouble High Court demands action

जुबैर मौलाना की गिरफ्तारी और जुलूस की कहानी

करीब दो महीने पहले भोपाल पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात गैंगस्टर जुबैर मौलाना और उसके तीन साथियों को धर दबोचा। जुबैर पर शहर के मंगलवारा और टीला जमालपुरा इलाकों में दहशत फैलाने का आरोप था। पुलिस ने उसके कब्जे से एक देसी पिस्टल, चार जिंदा कारतूस और तीन छुरियां बरामद की थीं। बताया जाता है कि जुबैर और उसके गुर्गों ने इन इलाकों में वाहनों में तोड़फोड़ की और फायरिंग कर लोगों में खौफ पैदा किया था।

पुलिस ने दावा किया कि जुबैर ने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद ही अपने सिर के बाल और दाढ़ी-मूंछ मुंडवा लिए थे। लेकिन गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे और उसके साथियों का जुलूस निकाला, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस जुलूस ने न केवल लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर दिए।

पत्नी ने उठाया मानवाधिकार का मुद्दा

जुबैर की पत्नी शमीम बानो ने इस घटना को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने कोर्ट में कहा कि पुलिस ने इस्लाम में दी गई धार्मिक व्यवस्था का उल्लंघन करते हुए उनके पति की दाढ़ी-मूंछ और सिर के बाल जबरन मुंडवाए। शमीम के वकील प्रशांत चौरसिया ने कोर्ट को बताया कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार), अनुच्छेद 22 (गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) के साथ-साथ मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है।

वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के बाद उसका जुलूस निकालना गैरकानूनी है। पुलिस का काम आरोपी को कोर्ट में पेश करना है, जिसके बाद उसे ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा जाता है। लेकिन इस मामले में पुलिस ने कानून को हाथ में ले लिया और जुबैर का सार्वजनिक रूप से अपमान किया।

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भोपाल कमिश्नर और मानवाधिकार आयोग को शिकायत

शमीम बानो ने कोर्ट को यह भी बताया कि उन्होंने इस मामले में भोपाल पुलिस कमिश्नर और मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस याचिका को गंभीरता से लिया और मानवाधिकार आयोग को इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

पुलिस का पक्ष और विवाद

पुलिस का कहना है कि जुबैर मौलाना एक कुख्यात अपराधी है, जिसके खिलाफ भोपाल और रायसेन के कई थानों में 53 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या का प्रयास, रंगदारी, दंगा और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि जुबैर छह महीने से फरार था और उसकी गिरफ्तारी पर 30,000 रुपये का इनाम भी घोषित था।

पुलिस के अनुसार, जुबैर ने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद ही दाढ़ी और सिर मुंडवाया था। लेकिन जुलूस निकालने और जबरन मुंडन के आरोपों पर पुलिस ने ज्यादा सफाई नहीं दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला और सुर्खियों में आ गया।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले को मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हुए सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार, जो उसकी धार्मिक भावनाओं या सम्मान को ठेस पहुंचाए, स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग को इस मामले की गहन जांच करने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया।

जुबैर मौलाना कौन है?

जुबैर मौलाना भोपाल का एक कुख्यात गैंगस्टर है, जो लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय है। उसके खिलाफ हत्या का प्रयास, रंगदारी, फायरिंग और तोड़फोड़ जैसे कई संगीन मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि जुबैर ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर शहर में दहशत फैलाई थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए भोपाल पुलिस की कई टीमें लंबे समय से उसकी तलाश में थीं। आखिरकार, उसे परवलिया के एक फार्म हाउस से गिरफ्तार किया गया।

आगे क्या?

इस मामले ने भोपाल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार आयोग अब इस मामले की जांच करेगा और यह देखा जाएगा कि पुलिस ने अपनी सीमा का उल्लंघन किया या नहीं। जुबैर की पत्नी शमीम बानो और उनके वकील को उम्मीद है कि कोर्ट के आदेश के बाद दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई होगी। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि उनकी मंशा अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करना था।

यह मामला अब न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में मानवाधिकार आयोग की जांच और उसकी रिपोर्ट इस मामले में नया मोड़ ला सकती है।

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