MP News: जानिए कैसे कुंवारों को शादी के नाम पर लगाया जा रहा था चूना, पुलिस ने किया गैंग का बड़ा खुलासा
Bhopal News: भोपाल पुलिस ने साइबर क्राइम से जुड़े एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कुंवारों को ठगने के लिए फेक मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स और कॉल सेंटर का इस्तेमाल कर रहा था।
इस गैंग ने अब तक 500 से ज्यादा लोगों को ठगा है। पुलिस ने इस गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है, जिसका नाम हरीश भारद्वाज है।

फेक मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स और कॉल सेंटर से वारदात
गिरोह द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन्स के तहत, उन्होंने छह फर्जी मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स तैयार की थीं। इन वेबसाइट्स के जरिए लोगों से शादी के नाम पर पैसे वसूले जाते थे। गैंग ने विभिन्न कॉल सेंटरों के माध्यम से कुंवारों को संपर्क किया और उन्हें आकर्षक विवाह प्रस्ताव दिए, साथ ही उनसे विभिन्न खर्चों के नाम पर पैसे लिए। गैंग के शिकार मुख्य रूप से वे लोग होते थे जो शादी के लिए इंटरनेट पर विभिन्न मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर रहे थे।
आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी
पुलिस ने सोमवार को आरोपी हरीश भारद्वाज (24) को गिरफ्तार किया। हरीश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के वाराणसी का निवासी है, लेकिन फिलहाल वह बिलासपुर में रह रहा था। गिरफ्तार आरोपी 12वीं पास है और वह एक कॉल सेंटर का मैनेजर था। पुलिस पूछताछ में हरीश ने यह स्वीकार किया कि उसने और उसके गैंग ने अब तक 500 से ज्यादा लोगों को ठगा है।
भोपाल में एक युवक से की गई ठगी
इस साल मई में भोपाल के कस्तूरबा नगर निवासी आनंद कुमार दीक्षित को भी इसी गैंग ने शिकार बनाया था। आनंद ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसने फेसबुक पर एक "संगम विवाह" मैट्रिमोनियल एड देखी थी, और जब उसने संपर्क किया तो कॉल सेंटर की लड़कियों ने उसे अलग-अलग खर्चों के लिए 1.5 लाख रुपए ले लिए। इसके बाद से ही पुलिस इस केस की जांच कर रही थी, और अब जाकर आरोपी पकड़ा गया है।
पुलिस ने खोले थे आरोपी के बैंक अकाउंट
आनंद ने अपनी शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर भी दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में आरोपी के बैंक खातों को सीज कर दिया था, लेकिन हरीश भारद्वाज इन खातों को फिर से खोलने के लिए भोपाल आया था। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसने ठगी की पूरी जानकारी दी और गैंग के बारे में बताया।
फर्जी वेबसाइट्स और कॉल सेंटर का खुलासा
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने जिन 6 फर्जी मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स का इस्तेमाल किया, उनके नाम थे: इंडियन रॉयल मैट्रिमोनी, सर्च रिश्ते, ड्रीम पार्टनर इंडिया, 7 फेरे मैट्रिमोनी, संगम विवाह और माय शादी प्लानर। इन वेबसाइट्स के जरिए वे लोगों को लुभाने के बाद कॉल सेंटर से संपर्क करते थे और उनसे पैसे वसूलते थे।
ऐसे करते थे शादी के नाम पर ठगी
स्टेप 1: सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन
आरोपी सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पेज बनाते थे। यहां वे अपनी बनवायी हुई मैट्रिमोनियल वेबसाइट का विज्ञापन देते थे। वे इंटरनेट से किसी भी लड़की की फोटो डाउनलोड करते थे और उसका फर्जी बायोडाटा तैयार कर उसे इस पेज पर अपलोड कर देते थे। इस विज्ञापन को देखकर लोग इनसे संपर्क करने लगते थे।
स्टेप 2: वॉट्सऐप ग्रुप पर भेजना
जब लोग इन विज्ञापनों पर क्लिक करते थे, तो वे सीधे आरोपी के वॉट्सऐप ग्रुप में शामिल हो जाते थे। यहां से आरोपी इन लोगों से क्यूरी के नाम पर चैट शुरू करते थे। फिर ठग इन्हें इंटरनेट से डाउनलोड की गई लड़की की फोटो भेजते और अगर वह फोटो पसंद आ जाती, तो आरोपी लड़की का फर्जी बायोडाटा भेज देते थे।
स्टेप 3: रजिस्ट्रेशन के नाम पर फीस लेना
अगर ग्राहक को बायोडाटा पसंद आता, तो आरोपी उसे रजिस्ट्रेशन करने के लिए कहते थे और इसके बदले में पैसे लेते थे। इसके बाद, वे एक और कदम बढ़ाते थे। आरोपियों का अगला कदम था, किसी लड़की का फोन नंबर शेयर करना, जो कॉल सेंटर में काम करती थी और इस लड़की को लड़की के रिश्ते की बात करने के लिए भेजा जाता था।
स्टेप 4: शादी की प्लानिंग के नाम पर पैसे मांगना
जैसे ही लोग रजिस्ट्रेशन करने के बाद आगे बढ़ते, कॉल सेंटर में काम करने वाली लड़की शादी के लिए शॉपिंग, दस्तावेज तैयार करने, कागजी प्रक्रिया आदि के नाम पर पैसे मांगने लग जाती थीं। धीरे-धीरे यह प्रक्रिया इतनी बढ़ जाती कि ठग लोग हर छोटी-छोटी चीज़ के लिए पैसे मांगने लगते थे।
छोटे-छोटे अमाउंट में ठगी और बचने की कोशिश
ये ठग बड़ा फ्रॉड नहीं करते थे, ताकि उनका ध्यान ज्यादा आकर्षित न हो। वे छोटे-छोटे अमाउंट में पैसे लेते थे, जिससे पीड़ितों को शिकायत करने में दिक्कत होती थी और वे पुलिस केस नहीं करते थे। इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति अधिक पूछताछ करता तो आरोपी उन्हें किस्तों में पैसे वापस करने का झांसा देते थे, या फिर पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें चुप करवा लेते थे।
पुलिस कार्रवाई से बचने के उपाय
आरोपी अक्सर पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए किसी भी बड़े फ्रॉड में शामिल नहीं होते थे और छोटे-मोटे अमाउंट में पैसे लेकर फिर उन्हें वापस भी कर देते थे। इस तरह से वे अपने अपराधों को आसानी से छुपा लेते थे।
इस पूरे ठगी के नेटवर्क का पर्दाफाश होने के बाद अब पुलिस इस गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए और कड़ी कार्रवाई करने का संकल्प लिया है।












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