पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने सबसे वफादार का इस्तीफा किया मंजूर, कमलनाथ के नेतृत्व पर खड़े हुए सवाल

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में मीडिया विभाग अध्यक्ष पद नहीं मिलने से नाराज नरेंद्र सलूजा ने कांग्रेस पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। पूर्व सीएम कमलनाथ ने अपने सबसे वफादार का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया।

भोपाल, 9 जून। त्रिस्तरीय पंचायत और निकाय चुनाव के बीच सबसे बड़ी खबर ये आ रही है कि पूर्व सीएम कमलनाथ ने अपने सबसे वफादार नरेंद्र सलूजा का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। पूर्व सीएम ने नरेंद्र सलूजा को मनाने की वजह उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। आलोचक इसे कमलनाथ द्वारा अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने की घटना बता रहे हैं।

नरेंद्र सलूजा ने कांग्रेस पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया

राजनीति के जानकार और कई वर्षों से कांग्रेस कमेटी को कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि राजधानी में हजारों लोगों ने कमलनाथ को नरम नरेंद्र सलूजा की आंखों से देखा है। नरेंद्र सलूजा की पहचान कांग्रेस पार्टी के नेता से कहीं ज्यादा कमलनाथ के समर्थक के रूप में थी। वफादारी का लेवल इतना था कि जब मध्य प्रदेश की राजनीति में कमलनाथ का कोई नाम भी नहीं लेता था, तब नरेंद्र सलूजा कमलनाथ के बड़े-बड़े फोटो वाले बैनर लगाया करते थे। ऐसे में अचानक नरेंद्र सलूजा का कांग्रेस पार्टी के सारे पदों से इस्तीफा दे देना और कमलनाथ का उसे स्वीकार कर लेना एक बड़ा सवाल खड़ा कर देता है !

सलूजा के इस्तीफे से क्या नुकसान ?

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार मीडिया विभाग के अध्यक्ष पद पर नरेंद्र सलूजा का स्वभाविक दावा था और इसके लिए वे न केवल योगिता बल्कि विशेषज्ञता भी धारिता करते थे, लेकिन मीडिया विभाग के अध्यक्ष पद पर केके मिश्रा की नियुक्ति के बाद से नरेंद्र सलूजा नाराज थे। कमलनाथ ने उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया। एक वफादार कार्यकर्ता का दूर जाना स्वभाविक था। गुस्से में इस्तीफा भेज देना भी स्वभाविक था, लेकिन कमलनाथ का इस तरह से इस्तीफा स्वीकार कर लेना स्वभाविक नहीं था।

राजनीति के जानकार मानते हैं कि ये घटनाक्रम नरेंद्र सलूजा से ज्यादा कमलनाथ के लिए नुकसानदायक है। पूरी कांग्रेस पार्टी में एक संदेश जाता है कि कमलनाथ अपने सबसे खास वफादार का भी ध्यान नहीं रख सकते है। मीडिया विभाग का अध्यक्ष पद इतना भी महत्वपूर्ण नहीं था कि अपने और कांग्रेस पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता का नुकसान कर दिया जाए। अब आगे देखते हैं कि नरेंद्र सलूजा का रूख क्या होगा ? क्या वे बीजेपी का दामन थामेंगे ? या फिर कांग्रेस पार्टी में नए दायित्व का इंतजार करेंगे ?

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