MP Bhopal Ground report: खाद-बीज की कालाबाजारी से किसान बेहाल, फसलें चौपट, सरकारी समितियों पर उठे सवाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ग्रामीण इलाकों में किसान खाद और बीज की किल्लत से जूझ रहे हैं। वन इंडिया हिंदी के संवाददाता एलएन मालवीय ने ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर किसानों से बात की, जहां उन्होंने खाद-बीज की कालाबाजारी और वितरण प्रणाली की खामियों पर गहरी नाराजगी जताई।
किसानों का कहना है कि समय पर खाद और बीज न मिलने से उनकी फसलें चौपट हो रही हैं, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। हालांकि, कुछ इलाकों में समय पर आपूर्ति होने की बात भी सामने आई है। यह ग्राउंड रिपोर्ट भोपाल के किसानों की बदहाली और सिस्टम की नाकामी को उजागर करती है।

किसानों की पीड़ा: खाद-बीज की किल्लत से फसलें बर्बाद
भोपाल के बैरसिया, फंदा, और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में किसान खाद की कमी से परेशान हैं। रबी सीजन में गेहूं, चना, और अन्य फसलों की बुवाई के लिए DAP (डाई अमोनियम फॉस्फेट) और यूरिया की जरूरत है, लेकिन किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल रही। संवाददाता एलएन मालवीय से बात करते हुए किसान रमेश पटेल (बैरसिया) ने कहा, "तीन दिन से खाद के लिए लाइन में खड़ा हूं, लेकिन दुकानदार कहते हैं स्टॉक खत्म है। वहीं, कुछ लोग कालाबाजारी में खाद 500-600 रुपये प्रति बोरी ज्यादा दाम में बेच रहे हैं।"
किसान मोहन पटेल (जगदीशपुर) ने बताया, "सरकारी दर 266 रुपये प्रति बोरी यूरिया की है, लेकिन बाजार में 340-500 रुपये में बिक रही है। छोटे किसान कहां से इतना पैसा लाएं? फसलें बिना खाद के बर्बाद हो रही हैं।" कई किसानों ने बताया कि समय पर खाद न मिलने से बुवाई रुक गई है, जिससे फसल चक्र बिगड़ रहा है और उत्पादन पर असर पड़ रहा है।
कालाबाजारी का खेल: बिचौलियों की चांदी
किसानों ने खाद और बीज की कालाबाजारी पर गंभीर आरोप लगाए। बैरसिया मंडी में हाल ही में किसानों ने हंगामा किया, जब उन्हें पता चला कि सरकारी स्टॉक कुछ चुनिंदा लोगों को ऊंचे दामों में बेचा जा रहा है। गौर कृषि सेवा केंद्र के संचालक कमल सिंह गौर पर कालाबाजारी का आरोप लगा, जहां 1350 रुपये की DAP बोरी 1850 रुपये में और 267 रुपये की यूरिया बोरी 340 रुपये में बेची जा रही थी। जांच के बाद SDM आशुतोष शर्मा ने गोदाम और दुकान को सील कर दिया। यह भोपाल में इस सीजन की पहली बड़ी कार्रवाई थी।
किसानों का आरोप है कि निजी एजेंसियां और कुछ सहकारी समितियां बिचौलियों से मिलकर मनमानी कर रही हैं। रमेश पटेल ने कहा, "केंद्रों पर बोर्ड लगा होता है 'खाद खत्म', लेकिन बिचौलियों के पास ट्रॉलियों में खाद मिल जाता है।" भारतीय किसान संघ के नेता सर्वज्ञ जी. दीवान ने कहा, "सरकार की नीतियां विफल हो रही हैं। कालाबाजारी रोकने के लिए उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम का सख्ती से पालन होना चाहिए।"

सरकारी समितियों की नाकामी: वितरण प्रणाली पर सवाल
किसानों ने भोपाल की सहकारी समितियों और खाद वितरण केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। टीकमगढ़ और सागर जैसे जिलों में भी किसानों ने खाद की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। भोपाल के बंडा में पूर्व कांग्रेस विधायक तरवर सिंह लोधी ने 18 दिन पहले धरना दिया, जिसमें उन्होंने तत्काल खाद आपूर्ति की मांग की।
किसान राहुल धूत ने वन इंडिया हिंदी को बताया, "वितरण प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है। जहां 10 बोरी खाद चाहिए, वहां 3-5 बोरी ही मिल रही हैं। टोकन सिस्टम और CCTV की बात होती है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।" कई किसानों ने शिकायत की कि समितियां पहले से तय लोगों को खाद दे रही हैं, जिससे छोटे किसानों को मायूसी मिलती है।
कुछ इलाकों में राहत: समय पर खाद की आपूर्ति
हालांकि, भोपाल के कुछ क्षेत्रों में स्थिति बेहतर बताई जा रही है। बैरसिया कृषि उपज मंडी में प्रशासन ने पुलिस की मौजूदगी में टोकन सिस्टम शुरू किया, जहां किसानों को 5-5 बोरी DAP दी जा रही है। SDM आशुतोष शर्मा ने कहा, "हम जल्द ही खाद की आपूर्ति सामान्य करेंगे। कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई हो रही है।" शाजापुर, सागर, और दमोह जैसे जिलों में टोकन सिस्टम और अतिरिक्त काउंटरों से वितरण में सुधार हुआ है।
सरकार का दावा और हकीकत: मुख्यमंत्री के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाद की कालाबाजारी पर सख्त रुख अपनाया है। 23 नवंबर 2024 को कमिश्नर-कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि खाद वितरण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने कहा, "प्रदेश में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है। जहां अव्यवस्था की शिकायत मिलेगी, वहां सख्त कार्रवाई होगी।" उनके प्रयासों से DAP का आवंटन 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख मीट्रिक टन किया गया।
लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। भोपाल के किसानों का कहना है कि सरकारी दावे कागजों तक सीमित हैं। किसान नेता राहुल धूत ने कहा, "प्रशासन को स्थायी समाधान निकालना होगा। किसानों को संगठित होकर अपनी मांगें सरकार तक पहुंचानी होंगी।"
किसानों की मांगें: पारदर्शी और सख्त सिस्टम
- किसानों ने कालाबाजारी रोकने और वितरण सुधारने के लिए कई मांगें रखी हैं:
- कालाबाजारी पर तत्काल रोक: बिचौलियों और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई।
- पारदर्शी वितरण: स्टॉक की खुली निगरानी, CCTV, और टोकन सिस्टम का प्रभावी उपयोग।
- किसानों की सूची: जिन्हें खाद नहीं मिला, उनकी सूची सार्वजनिक हो।
- ड्रोन तकनीक: यूरिया छिड़काव और खाद वितरण में ड्रोन का उपयोग बढ़े।












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