MP News: दिल्ली में ईरानी गैंग के दो बदमाशों के साथ मुठभेड़, बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाई कॉन्स्टेबल की जान
MP News: दिल्ली पुलिस ने भोपाल के करोंद क्षेत्र की अमन कॉलोनी के निवासी और कुख्यात ईरानी गैंग के दो सदस्यों को एक नाटकीय मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है। यह घटना शुक्रवार-शनिवार, 18-19 जुलाई 2025 की देर रात को दिल्ली के इंद्रप्रस्थ पार्क के पास मेरठ एक्सप्रेसवे टी-पॉइंट पर हुई।
मुठभेड़ में दोनों बदमाशों, 38 वर्षीय मुर्तजा अली उर्फ दमार और 40 वर्षीय सिराज अली, को पैरों में गोली लगने से घायल अवस्था में पकड़ा गया और इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दौरान एक कॉन्स्टेबल की जान बुलेटप्रूफ जैकेट के कारण बच गई, जब बदमाशों की गोली उनकी जैकेट पर लगी।

पुलिस ने घटनास्थल से दो पिस्तौल, छह कारतूस, और एक चोरी की बाइक बरामद की है। यह मुठभेड़ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच, हजरत निजामुद्दीन थाने, और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की संयुक्त कार्रवाई का परिणाम थी।
मुठभेड़ का घटनाक्रम: रात 12:30 बजे बिछा जाल
दिल्ली पुलिस की अतिरिक्त उपायुक्त (एडिशनल डीसीपी) ऐश्वर्या शर्मा ने बताया कि कॉन्स्टेबल राजेंद्र को गुप्त सूचना मिली थी कि ईरानी गैंग के दो बदमाश, जो भारी हथियारों से लैस हैं, दिल्ली में रेकी कर रहे हैं और डकैती की साजिश रच रहे हैं। इस सूचना के आधार पर हजरत निजामुद्दीन थाने और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने इंद्रप्रस्थ पार्क के सामने मेरठ एक्सप्रेसवे टी-पॉइंट पर घेराबंदी की। रात करीब 12:30 बजे, दोनों आरोपी-मुर्तजा अली और सिराज अली-एक चोरी की बाइक (बजाज पल्सर) पर सवार होकर वहां पहुंचे।
पुलिस ने जब उन्हें रुकने का इशारा किया, तो बदमाशों ने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस टीम पर चार राउंड फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने तीन राउंड गोलियां चलाईं, जिससे दोनों बदमाशों के बाएं पैर में गोली लगी। इस मुठभेड़ में कॉन्स्टेबल राजेंद्र की जान उसकी बुलेटप्रूफ जैकेट के कारण बच गई, क्योंकि बदमाशों की एक गोली उनकी जैकेट पर लगी। घायल बदमाशों को तुरंत काबू में कर लिया गया और सफदरजंग ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
आरोपियों का आपराधिक इतिहास
पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों बदमाशों का आपराधिक इतिहास बेहद गंभीर है। मुर्तजा अली उर्फ दमार, जो केवल दसवीं तक पढ़ा है, अपराध की दुनिया का पुराना खिलाड़ी है। उसके खिलाफ मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, और कर्नाटक में लूट, डकैती, और चोरी के 46 मामले दर्ज हैं, जिनमें चार डकैती, 37 लूट, और चार स्नैचिंग के मामले शामिल हैं। वह एक साल पहले ही जेल से रिहा हुआ था। दूसरी ओर, सिराज अली, जो आठवीं तक पढ़ा है, पहले भोपाल में बेल्ट और परफ्यूम बेचने का काम करता था। उसके खिलाफ भी भोपाल में शस्त्र अधिनियम (आर्म्स एक्ट) के तहत एक मामला दर्ज है।
पूछताछ में दोनों ने खुलासा किया कि वे अपने गिरोह के अन्य चार सदस्यों के साथ मिलकर दिल्ली और एनसीआर में डकैती और चोरी की वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। वे भोपाल से विशेष रूप से इस साजिश के लिए दिल्ली आए थे। पुलिस ने उनके पास से दो .32 बोर की पिस्तौल, छह जिंदा कारतूस, और एक चोरी की बजाज पल्सर मोटरसाइकिल बरामद की है।
पुलिस की कार्रवाई और केस दर्ज
मुठभेड़ के बाद, अपराध और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने सनलाइट कॉलोनी थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और शस्त्र अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब ईरानी गैंग के बाकी चार सदस्यों की तलाश में जुटी है, जिनके बारे में बदमाशों ने पूछताछ में जानकारी दी है। अतिरिक्त डीसीपी ऐश्वर्या शर्मा ने बताया कि यह ऑपरेशन क्राइम ब्रांच, हजरत निजामुद्दीन थाने, और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई का परिणाम था, जिसमें इंस्पेक्टर शिव कुमार और प्रमोद चौहान की टीमें शामिल थीं।
ईरानी गैंग का भोपाल कनेक्शन
ईरानी गैंग का भोपाल से गहरा संबंध सामने आया है। मुर्तजा अली और सिराज अली, दोनों भोपाल के करोंद क्षेत्र की अमन कॉलोनी के निवासी हैं। मुर्तजा पहले भोपाल में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता था, लेकिन 2015 में उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। सिराज अली भी भोपाल में छोटा-मोटा व्यवसाय करता था, लेकिन बाद में वह भी इस गैंग का हिस्सा बन गया। पुलिस का मानना है कि यह गैंग भोपाल को अपने ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करता है और वहां से दिल्ली, एनसीआर, और अन्य राज्यों में वारदातों को अंजाम देता है।
पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि ईरानी गैंग के सदस्य अक्सर फर्जी पहचान पत्र और पुलिस या सरकारी अधिकारियों के वेश में ठगी और लूट की वारदातें करते हैं। इस गैंग का इतिहास दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, और अन्य राज्यों में कई आपराधिक मामलों से जुड़ा है।
बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाई जान
इस मुठभेड़ में कॉन्स्टेबल राजेंद्र की बहादुरी और बुलेटप्रूफ जैकेट की अहम भूमिका रही। बदमाशों द्वारा चलाई गई चार गोलियों में से एक गोली उनकी बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी, जिसके कारण उनकी जान बच गई। यह घटना पुलिस कर्मियों के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट की महत्ता को एक बार फिर रेखांकित करती है। पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्रा ने इस ऑपरेशन की सराहना करते हुए कहा कि उनकी टीमें अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सामाजिक और सियासी प्रतिक्रिया
इस मुठभेड़ ने दिल्ली और भोपाल दोनों जगह हलचल मचा दी है। भोपाल में स्थानीय नेताओं ने इस गैंग के आपराधिक इतिहास पर चिंता जताई है और मध्य प्रदेश पुलिस से इस गैंग के अन्य सदस्यों पर नकेल कसने की मांग की है। कांग्रेस के स्थानीय नेता राकेश वर्मा ने कहा, "भोपाल में इस तरह के आपराधिक गिरोह का सक्रिय होना चिंताजनक है। मध्य प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह स्थानीय स्तर पर ऐसी गतिविधियों पर नजर रखे।"
वहीं, दिल्ली में पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना हो रही है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई और कॉन्स्टेबल राजेंद्र की बहादुरी की तारीफ की है। एक यूजर ने लिखा, "दिल्ली पुलिस ने शानदार काम किया। बुलेटप्रूफ जैकेट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह पुलिसकर्मियों के लिए कितना जरूरी है।"
भविष्य की चुनौतियां
यह मुठभेड़ दिल्ली और भोपाल में ईरानी गैंग की सक्रियता को उजागर करती है। पुलिस के सामने अब चुनौती है कि वह इस गैंग के बाकी सदस्यों को पकड़े और उनकी आपराधिक योजनाओं को पूरी तरह नाकाम करे। साथ ही, भोपाल में इस गैंग के ठिकानों की गहन जांच की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी वारदातों को रोका जा सके।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में गहराई से जांच कर रही है और गैंग के अन्य सदस्यों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि अंतरराज्यीय आपराधिक गिरोहों को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन को और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।












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