BJP विधायक भगवान दास सबनानी की जीत पर कांग्रेस के PC शर्मा को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, चुनाव याचिका खारिज
2023 के विधानसभा चुनावों के बाद, भोपाल के दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में एक नई कानूनी जंग की शुरुआत हुई थी। कांग्रेस के उम्मीदवार रहे पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने बीजेपी के विजयी उम्मीदवार भगवान दास सबनानी की जीत पर सवाल उठाए थे, और आरोप लगाया था कि ईवीएम में गड़बड़ी के चलते चुनाव परिणाम प्रभावित हुए थे। लेकिन अब जबलपुर हाईकोर्ट ने पीसी शर्मा की चुनाव याचिका खारिज कर दी है, तो यह मामला एक नई मोड़ पर आ गया है।
ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप: एक साजिश या संयोग?
पीसी शर्मा ने कोर्ट में अपनी याचिका में दावा किया था कि नवंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी के प्रत्याशी भगवान दास सबनानी ने सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करते हुए ईवीएम में गड़बड़ी की थी। उनका कहना था कि चुनावी परिणामों में अनियमितताएं थीं, खासकर तब जब मतगणना के समय अधिकांश ईवीएम मशीनों की बैटरी 99 प्रतिशत तक चार्ज थी। शर्मा ने आरोप लगाया कि मतदान के बाद कई दिनों तक ईवीएम मशीनों का प्रयोग हुआ और यह मतदान प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता था।

याचिका में तथ्य की कमी: कोर्ट ने क्यों दिया फैसला
हालांकि, पीसी शर्मा इन आरोपों को कोर्ट में साबित करने में नाकाम रहे। जब मामला अदालत में पहुंचा, तो शर्मा अपनी याचिका में आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य पेश नहीं कर पाए। इसका नतीजा यह हुआ कि कोर्ट ने याचिका को विचार करने योग्य नहीं माना और बीजेपी के वकील ज्ञानेन्द्र सिंह बघेल द्वारा दायर की गई याचिका खारिज करने की अर्जी को मंजूर करते हुए, पीसी शर्मा की चुनाव याचिका को खारिज कर दिया।
भगवान दास सबनानी की ऐतिहासिक जीत
भगवान दास सबनानी ने नवंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में 15883 मतों से शानदार जीत हासिल की थी। वे भाजपा के उम्मीदवार थे और उन्होंने कांग्रेस के पीसी शर्मा को हराया था। चुनाव परिणामों को लेकर पीसी शर्मा की ओर से उठाए गए सवालों ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचाई, लेकिन अब कोर्ट के फैसले ने इस विवाद को समाप्त कर दिया है।
आरोपों पर उठे सवाल: क्या यह महज एक राजनीतिक दांव था?
चुनाव के दौरान आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलना आम बात है, लेकिन जब आरोपों के समर्थन में तथ्य न हो तो उनका असर बहुत कम हो जाता है। पीसी शर्मा ने कोर्ट में जिस आधार पर ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया था, वह ठोस सबूतों से परे था। इस पूरे मामले ने राजनीति और कानूनी क्षेत्र में कई सवाल खड़े किए हैं। क्या यह आरोप महज एक राजनीतिक दांव था, या फिर सत्ता की जंग में अपनी हार को स्वीकार न कर पाने का परिणाम?
कोर्ट का फैसला: लोकतंत्र की जीत
जबलपुर हाईकोर्ट ने इस फैसले से यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में राजनीति से ज्यादा महत्वपूर्ण तथ्य होते हैं। अदालत ने यह मानते हुए पीसी शर्मा की याचिका को खारिज किया कि आरोपों के बिना किसी ठोस प्रमाण के न्यायपालिका को उस पर विचार करने का कोई आधार नहीं था। यह फैसला एक बार फिर से इस बात को स्पष्ट करता है कि न्यायपालिका की भूमिका में किसी भी तरह के दबाव को नहीं सहा जाता और न ही इसे किसी पक्षपाती दृष्टिकोण से देखा जाता है।
अब क्या होगा?
अब इस फैसले के बाद भगवान दास सबनानी की सीट पर कोई कानूनी संकट नहीं होगा। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाएं जारी रहेंगी। कांग्रेस द्वारा चुनावी याचिका दायर करना एक राजनीतिक बयान था, जो अब कानून की अदालत से खारिज हो चुका है।
पीसी शर्मा के लिए यह एक बड़ा झटका है, लेकिन वे शायद इस हार को भी राजनीतिक मंच पर अपनी ताकत बढ़ाने के तौर पर इस्तेमाल करेंगे। भाजपा और कांग्रेस के बीच की जंग में कानूनी नतीजे भले ही उनके पक्ष में न हों, लेकिन यह निश्चित रूप से प्रदेश की राजनीति के समीकरणों को और दिलचस्प बना देगा।
जनता की नजरें अब इस पर
अब सवाल यह है कि इस फैसले के बाद भोपाल और प्रदेश के अन्य हिस्सों में राजनीति के कौन से समीकरण बदलेंगे। क्या यह केवल कानूनी जीत होगी, या इसे आगामी चुनावों के लिए एक राजनीतिक टूल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा? समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल यह जीत भगवान दास सबनानी की है और यह भाजपा के लिए एक बड़ी राहत का पल है।












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