Bhopal News: संभागायुक्त संजीव सिंह ने ग्राम मोगराराम पहुंचकर प्याज-लहसुन किसानों से की खुली बातचीत
भोपाल संभाग के संभागायुक्त संजीव सिंह ने सीहोर जिले के ग्राम मोगराराम पहुंचकर प्याज और लहसुन उत्पादक किसानों से सीधा संवाद किया।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश के कई इलाकों में ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन मोगराराम जैसे इलाकों में प्याज-लहसुन की खेती अभी भी किसानों की आय का मुख्य स्रोत बनी हुई है। संभागायुक्त ने किसानों की उत्पादन क्षमता, विपणन की चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

ग्राम मोगराराम में आयोजित इस बैठक में सैकड़ों किसान शामिल हुए। संभागायुक्त ने किसानों से उनके अनुभव सुने और कहा कि प्याज-लहसुन जैसी उद्यानिकी फसलों में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने वैज्ञानिक भंडारण, कम पानी में अधिक उत्पादन की तकनीकों, मिनी स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति और लागत कम करने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। संजीव सिंह ने कहा कि यदि किसान आधुनिक खेती पद्धतियां अपनाएं और विभागीय मार्गदर्शन लें, तो कम लागत में बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता हासिल की जा सकती है।
प्याज भंडारण गृह के लिए सूची तैयार करने के निर्देश
संभागायुक्त ने सबसे महत्वपूर्ण निर्देश प्याज भंडारण से जुड़ा दिया। उन्होंने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को आदेश दिया कि क्षेत्र में प्याज भंडारण गृह निर्माण के इच्छुक किसानों की प्राथमिकता के आधार पर सूची तैयार की जाए। इस सूची को शीघ्र शासन को प्रेषित किया जाए ताकि किसानों को वैज्ञानिक भंडारण सुविधा उपलब्ध हो सके। इससे किसान अपनी फसल को उचित मूल्य पर बेच सकेंगे और बिचौलियों के शोषण से बच सकेंगे।
सिंह ने कहा, "भंडारण की कमी के कारण किसान मजबूरी में कम दाम पर फसल बेच देते हैं। यदि हम वैज्ञानिक भंडारण गृह उपलब्ध करा सकें, तो किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा।"
उद्यानिकी योजनाओं से अधिक से अधिक लाभ
संभागायुक्त ने उद्यानिकी विभाग को निर्देश दिए कि पात्र किसानों को विभाग की विभिन्न योजनाओं-जैसे सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप-फर्टिगेशन, स्प्रिंकलर, हाई-डेंसिटी प्लांटेशन और सब्सिडी वाली योजनाओं-से अधिक से अधिक लाभान्वित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि पानी की बचत भी होगी और लागत कम होगी।
सिंह ने अधिकारियों से मैदानी स्तर पर सतत मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे विभागीय विशेषज्ञों से संपर्क करें और आधुनिक तकनीकों को अपनाएं।
किसानों ने रखी अपनी बात
किसानों ने संभागायुक्त को बताया कि प्याज-लहसुन की खेती में लागत बढ़ रही है, लेकिन बाजार में मूल्य स्थिर नहीं रहते। कई किसानों ने भंडारण गृह की कमी और बाजार तक पहुंच की समस्या बताई। एक किसान ने कहा, "हम फसल उगाते हैं, लेकिन भंडारण न होने से सड़ जाती है। यदि गृह मिले तो हम उचित दाम पर बेच सकेंगे।"
संभागायुक्त ने उनकी बातें ध्यान से सुनीं और कहा कि सरकार किसानों की हर चिंता से अवगत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही भंडारण गृहों की योजना को गति मिलेगी।
निरीक्षण में मौजूद प्रमुख लोग
इस दौरान जिला पंचायत सीईओ सर्जना यादव, उद्यानिकी विभाग के जिला अधिकारी जगदीश मुजाल्दा, स्थानीय अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। संभागायुक्त ने अधिकारियों को समय-सीमा के साथ कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
यह दौरा किसानों के बीच उम्मीद की किरण लेकर आया है। मोगराराम जैसे गांवों में जहां प्याज-लहसुन की खेती मुख्य आजीविका है, भंडारण और आधुनिक तकनीकों से उनकी आय बढ़ने की संभावना है। संभागायुक्त का यह प्रयास सरकार की किसान-केंद्रित नीति को मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।












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