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MP News Bhopal: लव जिहाद केस में खुलासा, फरहान के पिता का दावा- पुलिस ने मांगी 10 लाख की रिश्वत, चला बुलडोजर

MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लव जिहाद और कॉलेज छात्राओं के साथ दुष्कर्म के मामले में आज एक और सनसनीखेज मोड़ सामने आया। इस मामले के मुख्य आरोपियों में से दो, साद और साहिल, के अर्जुन नगर स्थित अवैध मकानों पर जिला प्रशासन ने शनिवार सुबह बुलडोजर चला दिया।

हालांकि, तीसरे मुख्य आरोपी फरहान के घर पर कार्रवाई फिलहाल टाल दी गई है। इस बीच, फरहान के पिता रिजवान ने एक चौंकाने वाला दावा किया है कि पुलिस ने उनसे 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, और रिश्वत न दे पाने की वजह से उनके बेटे पर लव जिहाद का केस दर्ज किया गया।

Disclosure in love jihad case Farhan father claims- police demanded bribe of 10 lakhs bulldozer action

शनिवार सुबह 5 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई ने भोपाल में सामाजिक और सियासी हलचल मचा दी है। फरहान, साद, साहिल, नबील, अली, और अबरार पर एक निजी कॉलेज की छात्राओं के साथ रेप, ब्लैकमेलिंग, और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के गंभीर आरोप हैं। इस मामले की सुनवाई भोपाल जिला कोर्ट में चल रही है, लेकिन शनिवार को लोक अदालत के कारण फरहान की पेशी टल गई।

फरहान के पिता का सनसनीखेज दावा

फरहान के पिता रिजवान ने मकान गिराए जाने की कार्रवाई के बाद मीडिया से बातचीत में गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "पुलिस ने हमसे 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। करीब 15 दिन तक इस मामले को दबाए रखा गया। हम सिर्फ 2 लाख रुपये दे पाए, लेकिन 8 लाख रुपये की व्यवस्था नहीं कर सके। इसके बाद मिसरोद थाने के रंजीत सिंह ने मेरे बेटे फरहान पर लव जिहाद का केस दर्ज कर दिया। अभी कोर्ट का फैसला भी नहीं आया है, लेकिन हमारे मकान गिराए जा रहे हैं। यह अन्याय है।"

रिजवान के इस बयान ने मामले को और जटिल कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे को फंसाया गया है और पुलिस ने रिश्वत न मिलने के कारण कार्रवाई की। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। DCP (जोन-1) प्रियांक शर्मा ने कहा, "यह आरोप पूरी तरह निराधार हैं। इस मामले में सभी कार्रवाइयां कानून के दायरे में और ठोस सबूतों के आधार पर हो रही हैं। रिश्वत का कोई सवाल ही नहीं उठता।"

बुलडोजर कार्रवाई: साद और साहिल के मकान ढहाए गए

शनिवार तड़के 5 बजे भोपाल के अर्जुन नगर में भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई। गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में प्रशासन ने साद और साहिल के मकानों को ढहा दिया, जो सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने थे। शुक्रवार रात को इन मकानों के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई थी, और क्षेत्र को सील कर दिया गया था।

एसडीएम श्रीवास्तव ने बताया, "साद और साहिल के मकान सरकारी जमीन पर बने थे, और इन्हें बनाने की कोई वैध अनुमति नहीं थी। गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा ने पहले ही इन्हें नोटिस जारी कर 4 सितंबर तक अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने के कारण बुलडोजर से अतिक्रमण हटाया गया। यह पूरी प्रक्रिया कानूनी और पारदर्शी है।"

हालांकि, फरहान के घर पर कार्रवाई को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, लोक अदालत के कारण फरहान की कोर्ट में पेशी नहीं हो सकी, जिसके चलते उसके मकान पर बुलडोजर चलाने का फैसला टाल दिया गया। गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा ने कहा, "फरहान के मकान पर कार्रवाई को कुछ समय के लिए टाला गया है, लेकिन जल्द ही नियमानुसार कार्रवाई होगी।"

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लव जिहाद और रेप का मामला: क्या है पूरा विवाद?

पुलिस और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) को मिली शिकायतों के अनुसार, फरहान, साद, साहिल, नबील, अली, और अबरार पर भोपाल के एक निजी कॉलेज की छात्राओं को निशाना बनाने के गंभीर आरोप हैं। पीड़ित छात्राओं ने बताया कि आरोपियों ने पहले अपनी असली पहचान छिपाकर हिंदू नामों का इस्तेमाल किया और सोशल मीडिया या कॉलेज के जरिए दोस्ती की। इसके बाद उन्हें नशीले पदार्थ देकर उनके साथ रेप किया गया और अश्लील वीडियो बनाए गए। इन वीडियो का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया गया, और छात्राओं पर धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए दबाव डाला गया।

NHRC ने अपनी प्रारंभिक जांच में इसे एक "सुनियोजित और संगठित अपराध" करार दिया है। आयोग का कहना है कि आरोपियों का नेटवर्क मध्य प्रदेश से बाहर अन्य राज्यों तक फैला हो सकता है। पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (दुष्कर्म), 294 (अश्लीलता), 506 (आपराधिक धमकी), और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के तहत केस दर्ज किया है। सभी छह आरोपी वर्तमान में हिरासत में हैं।

DCP (क्राइम) अखिल पटेल ने बताया, "आरोपियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप से कई आपत्तिजनक वीडियो और फोटो बरामद हुए हैं। हम इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहे हैं। अन्य पीड़िताओं से भी सामने आने की अपील की गई है, और उनकी गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।"

कोर्ट में सुनवाई टली, परिजनों की याचिका खारिज

इस मामले में भोपाल जिला कोर्ट में शनिवार को फरहान की पेशी होनी थी, लेकिन लोक अदालत के कारण सुनवाई टल गई। आरोपियों के परिजनों ने मकानों को बचाने के लिए कोर्ट में स्थगन याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया था कि मकान उनके पूर्वजों ने बनाए थे और वे वैध हैं। हालांकि, प्रशासन ने दस्तावेज पेश कर साबित किया कि ये मकान सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने हैं। शुक्रवार देर रात सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद साद और साहिल के मकानों पर बुलडोजर चलाया गया।

मछली परिवार से कनेक्शन की जांच

यह मामला भोपाल के कुख्यात मछली परिवार के ड्रग्स और अपराध नेटवर्क से भी जोड़ा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, फरहान, साद, और साहिल का संबंध मछली परिवार के कुछ सदस्यों, जैसे यासीन अहमद उर्फ मछली और शारिक मछली, से हो सकता है, जिनके खिलाफ पहले से ड्रग्स तस्करी, ब्लैकमेलिंग, और यौन शोषण के मामले दर्ज हैं। क्राइम ब्रांच इस नेटवर्क के दिल्ली और राजस्थान से संभावित कनेक्शन की भी जांच कर रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सामाजिक और सियासी हलचल

इस कार्रवाई और रिजवान के रिश्वत के दावे ने भोपाल में सामाजिक और सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों ने बुलडोजर कार्रवाई का समर्थन किया है। एक स्थानीय निवासी, रमेश वर्मा (बदला हुआ नाम), ने कहा, "लव जिहाद और रेप जैसे अपराध समाज के लिए खतरा हैं। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों को सबक मिलना चाहिए। प्रशासन ने सही कदम उठाया है।"

वहीं, विपक्षी कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विपिन वानखेड़े ने कहा, "बीजेपी सरकार इस तरह की कार्रवाइयों को सियासी फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है। फरहान के पिता के रिश्वत के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अगर पुलिस ने रिश्वत मांगी, तो यह गंभीर मामला है।" जवाब में बीजेपी प्रवक्ता दुर्गेश केसवानी ने कहा, "यह कार्रवाई कानून के तहत है। अपराधियों का कोई धर्म नहीं होता। कांग्रेस इस मुद्दे को सियासी रंग देकर जनता को गुमराह कर रही है।"

प्रशासन और पुलिस के सामने चुनौतियां

  • रिश्वत के आरोपों की जांच: फरहान के पिता के रिश्वत के दावे ने पुलिस की साख पर सवाल उठाए हैं। इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
  • सामाजिक शांति: अर्जुन नगर में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस को शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी है।
  • कानूनी पारदर्शिता: मकानों को ढहाने की कार्रवाई को कुछ लोग कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। प्रशासन को सभी दस्तावेजों के साथ पारदर्शिता बनाए रखनी होगी।
  • पीड़िताओं की सुरक्षा: पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि पीड़ित छात्राएं और उनके परिवार सुरक्षित रहें। अन्य पीड़िताओं को सामने लाने के लिए गोपनीयता जरूरी है।
  • नेटवर्क की जांच: आरोपियों के नेटवर्क के तार अन्य राज्यों तक हो सकते हैं। पुलिस को इसकी गहराई से जांच करनी होगी।

आगे का रास्ता

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई अवैध निर्माण और अपराध के खिलाफ एक चेतावनी है। नगर निगम आयुक्त ने कहा, "हम सरकारी जमीन पर बने सभी अवैध निर्माणों को चिन्हित कर रहे हैं। यह कार्रवाई उसी का हिस्सा है। अपराधियों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी।"

पुलिस अब आरोपियों के डिजिटल उपकरणों से और सबूत जुटा रही है। क्राइम ब्रांच ने अन्य कॉलेजों और संस्थानों से भी जानकारी मांगी है ताकि इस नेटवर्क के पूरे दायरे का पता लगाया जा सके। NHRC ने भी इस मामले में अपनी जांच तेज कर दी है और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपने की बात कही है।

रिजवान के रिश्वत के दावे की जांच के लिए पुलिस ने एक आंतरिक कमेटी गठित करने की बात कही है। ग्वालियर रेंज IG ने कहा, "रिश्वत के आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है। इसकी निष्पक्ष जांच होगी, और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

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