कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व मंत्री Deepak Joshi, बोले- मैं बुधनी में शिवराज के खिलाफ चुनाव लड़ने को तैयार हूं

कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व मंत्री दीपक जोशी, बोले- मैं उस सीट पर चुनाव नहीं लड़ूंगा जिस सीट पर कांग्रेस का कोई कार्यकर्ता दावेदारी कर रहा

Deepak Joshi joined Congress, said- I am ready to contest against Shivraj Singh Chouhan in Budhni
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी के बेटे और पूर्व मंत्री दीपक जोशी (Deepak Joshi) ने शनिवार को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। भोपाल में 74 बंगले से सरकारी आवाज बी-30 से अपने पिता कैलाश जोशी की तस्वीर लेकर पीसीसी दफ्तर पहुंचे।

दीपक ने कांग्रेस की सदस्यता लेने से पहले ट्वीट करते हुए लिखा था कि समय ही हर बात सिद्ध करेगा। ईमानदारी मेरी विरासत है, मेरी पूंजी है, वो मेरे साथ है। प्रणाम पिता जी फिर सुबह खेड़ापति मंदिर में दर्शन करने के बाद देवास से भोपाल के लिए रवाना हुए। घर से निकलते समय बड़ी बहन ने तिलक लगाकर उन्हें आशीर्वाद दिया।

दीपक जोशी का गंभीर आरोप

दीपक जोशी ने भोपाल में मीडिया से कहा कि मेरी बीवी को कोरोना हो गया था। उनको इलाज की ज़रूरत थी। मगर बीजेपी ने जिला प्रशासन को बोल रखा था कि दीपक जोशी की कोई भी बात नहीं सुनी। मेरी बीवी को इलाज नहीं मिल सका और उसकी मौत हो गई।

दीपक ने किस वजह से बीजेपी छोड़ कांग्रेस को ज्वाइन किया

कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने से पहले दीपक जोशी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि शिवराज सिंह चौहान भले ही मुझे अपना छोटा भाई माने, लेकिन मैं उन्हें अपना बड़ा भाई नही मानता हूं। उन्होंने कहा कि मेरे पिता मुख्यमंत्री रहे। भोपाल से सांसद रहे। वहां से वोटर रहे। उनके नाम पर कुछ नहीं। उनका स्मारक बनाने की मांग की, तो कमलनाथ जी ने पूछा बताइए कहां जमीन चाहिए। हाटपिपलिया में 3 महीने में जमीन का आवंटन कर दिया। शिवराज जी को 30 महीने स्मारक की स्वीकृति देने में लग गए।

तीन बार रहे विधायक, बागली और हाटपिपलिया से चुने जा चुके

कांग्रेस का दामन थामने वाले पूर्व सीएम कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी तीन बार विधायक रहे हैं। वह शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट में मंत्री भी रहे है। दीपक जोशी ने अपना पहला चुनाव अपने पिता कैलाश जोशी की पारंपरिक सीट बागली से जीता था। इस सीट का गठन 1962 में हुआ था। तबसे कैलाश जोशी इस सीट पर 8 बार लगातार चुनाव जीते थे। उनके पिता जून 1977 से जनवरी 1978 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे।

कैलाश जोशी 1998 में बागली से चुनाव हार गए थे इसके बाद पार्टी ने 2003 में दीपक जोशी को इस सीट से मौका दिया। उन्होंने कांग्रेस के श्याम होलानी को 17000 वोटों से हराया। इसके बाद 2008 में यह सीट आरक्षित हो गई। तब भाजपा ने हाटपिपलिया से दीपक जोशी को चुनाव लड़ाया। वे इस सीट से लगातार दो चुनाव जीते। इसके बाद वे 2018 का चुनाव हार गए थे। जोशी लंबे समय से पार्टी से असंतुष्ट बताए जा रहे थे। वे कई बार अपनी उपेक्षा की शिकायत भी कर चुके थे।

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