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दीक्षा भूमि नागपुर से ऐतिहासिक संकल्प: ग्वालियर हाईकोर्ट में डॉ अंबेडकर की प्रतिमा लगाकर रहेंगे — दामोदर यादव

Damodar Yadav Mandal: दीक्षा भूमि नागपुर से सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों को लेकर एक बड़ा संदेश सामने आया है। नागपुर स्थित दीक्षा भूमि में सामाजिक कार्यकर्ता दामोदर यादव मंडल ने एक ऐतिहासिक संकल्प लेते हुए ऐलान किया कि ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा हर हाल में स्थापित कर के रहेंगे।

यह संकल्प केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे उस संघर्ष की निरंतरता है, जो न्यायपालिका के केंद्र में संविधान के शिल्पकार की उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग करता है।

Damodar Yadav Mandal diksha bhumi nagpur sankalp gwalior high court ambedkar statue

मई 2025 से विवाद

गौरतलब है कि ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर मई 2025 से विवाद चला आ रहा है। इस विवाद के केंद्र में वकीलों के दो स्पष्ट गुट सामने आए हैं। एक ओर वकीलों का बड़ा वर्ग और सामाजिक संगठन, जिनमें भीम आर्मी जैसे संगठन शामिल हैं, प्रतिमा स्थापना की जोरदार मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बार काउंसिल के कुछ सदस्य और कुछ अधिवक्ता बिना प्रशासनिक अनुमति प्रतिमा स्थापना और प्रस्तावित स्थान को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। इसी वैचारिक टकराव के कारण यह मुद्दा लगातार तूल पकड़ता गया।

विवाद क्यों हो रहा है?

विवाद की मुख्य वजह प्रतिमा स्थापना के लिए स्थान का चयन, प्रशासनिक अनुमति को लेकर गतिरोध और वकीलों के बीच वैचारिक मतभेद रहे हैं। हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए जब कुछ वकीलों ने हाईकोर्ट परिसर में बाबा साहेब की प्रतिमा लगाने की मांग को आगे बढ़ाया, लेकिन बाद में दूसरे गुट ने उसी स्थान पर तिरंगा झंडा फहराकर विरोध दर्ज कराया। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया और हाईकोर्ट परिसर में तनाव की स्थिति पैदा हो गई।

Damodar Yadav Mandal diksha bhumi nagpur sankalp gwalior high court ambedkar statue

भीम आर्मी के सदस्यों और कुछ वकीलों के बीच झड़प

तनाव अपने चरम पर तब पहुंचा जब 17 मई 2025 को ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में भीम आर्मी के सदस्यों और कुछ वकीलों के बीच झड़प हो गई। इस झड़प के बाद हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। सुरक्षा के मद्देनजर हाईकोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके और कानून-व्यवस्था बनी रहे।

Damodar Yadav Mandal diksha bhumi nagpur sankalp gwalior high court ambedkar statue

इस पूरे घटनाक्रम के बीच आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी जैसे संगठनों ने खुलकर बाबा साहेब की प्रतिमा स्थापना की मांग का समर्थन किया है। इन संगठनों का कहना है कि डॉ भीमराव अंबेडकर केवल एक समुदाय नहीं, बल्कि पूरे देश के संविधान और लोकतंत्र के आधार स्तंभ हैं, इसलिए न्याय के मंदिर में उनकी प्रतिमा होना सम्मान और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक है।

दामोदर यादव मंडल का संकल्प

इन्हीं परिस्थितियों के बीच दीक्षा भूमि नागपुर से लिया गया दामोदर यादव मंडल का संकल्प इस आंदोलन को नई ऊर्जा देता नजर आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में फैले आडंबर, पाखंड और सामाजिक अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष किया जाएगा और हर हाल में बाबा साहेब के समता, न्याय और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित व्यवस्था स्थापित की जाएगी। उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान की आत्मा को मजबूत करने की है।

दीक्षा भूमि से लिया गया यह संकल्प न केवल ग्वालियर हाईकोर्ट से जुड़े विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देता है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलन को भी नई दिशा और मजबूती प्रदान करता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह संकल्प किस तरह प्रशासन, न्यायपालिका और समाज के बीच संवाद को आगे बढ़ाता है और बाबा साहेब के विचारों को न्याय के केंद्र तक पहुंचाने में कितनी सफलता हासिल करता है।

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