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Bhopal News: बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में विवाद, मंदिर जाने को लेकर छात्राओं से माफीनामा, ABVP का प्रदर्शन

मध्य प्रदेश के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले दुर्गा पूजा के दौरान फीस न जमा करने पर छात्राओं को रोकने का नोटिस दिया गया था, और अब सुंदरकांड पाठ और मंदिर जाने को लेकर नया विवाद सामने आया है।

छात्राओं ने आरोप लगाया है कि हॉस्टल की वॉर्डन, अनिता तिलवानी ने उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुमति लिए बिना मंदिर जाने और सुंदरकांड पढ़ने से रोक दिया।

Controversy in Barkatullah University Apology taken on Sunderkand Temple ABVP protests

क्या था पूरा मामला?

मामला उस समय तूल पकड़ा जब विश्वविद्यालय में कुछ दिन पहले सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ था। छात्राओं ने आयोजन में भाग लिया था और इसके लिए कुलसचिव से पहले ही अनुमति ले ली थी, जो उन्हें रात 8 बजे तक वापस लौटने की इजाजत देती थी। कार्यक्रम समय से पहले खत्म हो गया और छात्राएं 7:40 बजे तक हॉस्टल वापस लौट आईं। हालांकि, देर रात जब वॉर्डन अनिता तिलवानी ने छात्राओं को एकत्रित किया, तो उन्होंने न केवल छात्राओं को डराया-धमकाया, बल्कि उन्हें लिखित माफीनामा भी लिखवाया।

वॉर्डन ने छात्राओं से कहा, "अगर आपको मंदिर जाना है, तो पहले विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।" इसके साथ ही, वॉर्डन ने छात्राओं को धमकी भी दी कि अगर वे इसका पालन नहीं करेंगी, तो उनके रिजल्ट को खराब किया जा सकता है। वॉर्डन ने यह भी कहा, "मैं कुलसचिव और कुलपति से नहीं डरती। अब तुम लोग अपना पावर दिखाओ। मेरा पावर तुमसे बहुत ज्यादा है, और कुलपति और कुलसचिव मेरा कुछ नहीं कर सकते।" वॉर्डन का यह बयान छात्राओं के लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि उन्होंने छात्राओं से मंदिर जाने के लिए अब से लिखित अनुमति लेने की बात भी कही।

ABVP ने किया विरोध प्रदर्शन

छात्राओं की शिकायत के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने विश्वविद्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। ABVP ने इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से दमनकारी नीतियों की निंदा की और वॉर्डन की कार्रवाई को छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन बताया।

वॉर्डन की कार्रवाई पर छात्राओं की प्रतिक्रिया

छात्राओं के अनुसार, वॉर्डन का यह कदम उनके धार्मिक अधिकारों को हनन करने जैसा था। उन्होंने कहा कि "हमने जो सुंदरकांड पाठ किया था, वह हमारे धार्मिक अधिकारों का हिस्सा था और हमने विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुमति लेकर कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। फिर भी वॉर्डन ने हमें गालियां दीं और धमकी दी कि मंदिर या भंडारे में जाने के लिए अब से लिखित अनुमति लेनी होगी।"

कुलसचिव और कुलपति की भूमिका पर सवाल

छात्राओं ने कुलसचिव और कुलपति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि "कुलसचिव से अनुमति लेने के बावजूद वॉर्डन ने हमें रोकने का हक किस आधार पर लिया? क्या यह प्रशासन की तरफ से एकतरफा फैसला नहीं है?"

विरोध और भविष्य में कदम

इस पूरे विवाद के बाद छात्रों और शिक्षकों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे और वॉर्डन की कार्रवाई की समीक्षा की जाए। वहीं ABVP ने वॉर्डन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन इस मामले में निष्क्रिय रहा, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में यह विवाद धार्मिक और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर बढ़ता जा रहा है। छात्राओं और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव से यह साफ होता है कि विश्वविद्यालय की आंतरिक नीतियों और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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