MP News: क्या अब मिलेगा संविदा कर्मचारियों को पूरा हक? सरकार सख्त—ग्रेच्युटी, अनुकम्पा नियुक्ति पर मांगा जवाब
Contract employees News: सामान्य प्रशासन विभाग ने मध्य प्रदेश के सभी विभागों, निगम-मंडलों, विश्वविद्यालयों, स्थानीय निकायों और प्राधिकरणों को कड़ा पत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। सवाल सीधा है-आखिर 22 जुलाई 2023 की संविदा नीति अभी तक पूरी तरह लागू क्यों नहीं हुई?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह जानकारी प्राथमिकता के आधार पर तुरंत उपलब्ध कराई जाए, जिससे लंबित मामलों पर कार्रवाई की जा सके।

क्या है संविदा नीति 2023?
22 जुलाई 2023 को जारी इस नीति में संविदा कर्मचारियों को कई अहम अधिकार दिए गए थे, जिनमें शामिल हैं:
- नियमित कर्मचारियों के समान न्यूनतम वेतन (समकक्षता)
- अनुकम्पा नियुक्ति (Compassionate Appointment)
- सेवा निवृत्ति पर ग्रेच्युटी का लाभ
- अवकाश सुविधा और NPS कटौती
- संविदा का ऑटोमेटिक नवीनीकरण
- नियमित भर्ती में 50% पदों पर प्राथमिकता
- अधिकतम आयु सीमा में छूट (55 वर्ष तक)
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन प्रावधानों को कई विभागों ने अभी तक लागू ही नहीं किया।
किन विभागों पर सबसे ज्यादा सवाल?
जानकारी के मुताबिक कई बड़े विभागों में हजारों प्रकरण लंबित हैं, जैसे:
- राज्य शिक्षा केन्द्र
- महिला एवं बाल विकास विभाग
- वन विभाग
- लोक निर्माण विभाग
- खेल एवं युवक कल्याण विभाग
इन विभागों में ग्रेच्युटी और अनुकम्पा नियुक्ति के मामलों में भारी देरी देखी जा रही है।
आधा-अधूरा लागू: कर्मचारियों में बढ़ा आक्रोश
मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि कुछ विभागों ने केवल वेतन समकक्षता लागू की, लेकिन बाकी सुविधाएं जानबूझकर रोकी गईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई पदों के ग्रेड पे कम कर दिए गए। अनुकम्पा नियुक्ति और ग्रेच्युटी के मामले लंबित रखे गए। कोर्ट से आदेश आने के बाद भी विभाग अपील कर रहे हैं। जिससे कर्मचारियों में असंतोष और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
कोर्ट तक पहुंचे मामले
कई संविदा कर्मचारी अपने हक के लिए अदालत की शरण में पहुंच चुके हैं। कुछ मामलों में कोर्ट से ग्रेच्युटी के आदेश भी मिल चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद विभागों द्वारा पालन नहीं किया जा रहा। यह स्थिति सरकार की मंशा और विभागीय अमल के बीच बड़ा गैप दिखाती है।
अब क्या होगा आगे?
सामान्य प्रशासन विभाग ने साफ कर दिया है कि सभी विभागों को स्पष्ट कारण बताना होगा, जहां नीति लागू नहीं हुई, वहां जवाबदेही तय होगी, जल्द ही सभी संस्थाओं में नीति लागू करना अनिवार्य होगा। यानी अब निगम, मंडल, विश्वविद्यालय, योजनाएं और नगर निगम-किसी को भी छूट नहीं मिलेगी।
संविदा कर्मचारियों के लिए क्या मतलब?
अगर सरकार सख्ती से इस नीति को लागू करती है, तो प्रदेश के लाखों संविदा कर्मचारियों को बड़ा फायदा मिल सकता है:
- सेवा के बाद आर्थिक सुरक्षा (ग्रेच्युटी)
- परिवार को सुरक्षा (अनुकम्पा नियुक्ति)
- बेहतर वेतन और स्थिरता
- नियमित नौकरी की दिशा में मौका
मध्य प्रदेश में संविदा कर्मचारियों के लिए यह खबर बेहद अहम है। वर्षों से लंबित मांगों पर अब सरकार ने सख्त रुख दिखाया है। अगर इस बार विभागों की जवाबदेही तय होती है, तो यह फैसला लाखों कर्मचारियों के भविष्य को बदल सकता है।












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