MP News: “50 लाख वोट गायब करने की साजिश!” — जानिए उमंग सिंघार ने क्यों लगाया चुनाव आयोग पर ये बड़ा आरोप
MP News: मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने आज भोपाल में एक विस्फोटक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर चुनाव आयोग (ECI) की 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया पर कड़ा प्रहार किया। सिंघार ने SIR को 'सिलेक्टिव इंटेंसिव रिमूवल' (Selective Intensive Removal) करार देते हुए इसे लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करने वाली साजिश बताया।
उनका दावा है कि मध्य प्रदेश में 40-50 लाख प्रवासी मजदूरों और आदिवासी मतदाताओं के नाम सूची से काटे जाने की योजना है, जो भाजपा को अगामी विधानसभा चुनावों में फायदा पहुंचाएगी। "चुनाव आयोग भाजपा की कठपुतली बन चुका है। हम कैसे विश्वास करें जब पुरानी वोट चोरी के सवालों का जवाब तक नहीं दिया गया?"-सिंघार ने सवाल उठाया।

सिंघार का ये दावा राष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला सकती है, खासकर तब जब SIR का दूसरा चरण 4 नवंबर से शुरू हो रहा है। सिंघार ने ठोस आंकड़ों और प्रमाणों के साथ SIR की समयसीमा, चयन मानदंडों और मध्य प्रदेश पर पड़ने वाले असर पर सवाल खड़े किए। साथ ही, 2023 के विधानसभा चुनावों में 16 लाख फर्जी वोट जोड़ने के पुराने आरोपों को दोहराते हुए ECI पर चुप्पी साधने का इल्जाम लगाया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक नारायण सिंह पट्टा भी मौजूद थे।
SIR का दूसरा चरण: घोषणा से विवाद तक
चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर 2025 को SIR के दूसरे चरण की घोषणा की, जो 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों-उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुदुच्चेरी, बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गुजरात-में 4 नवंबर 2025 से 7 फरवरी 2026 तक चलेगा। ECI का दावा है कि 51 करोड़ मतदाताओं (कुल 97 करोड़ के लगभग 53%) की घर-घर सत्यापन प्रक्रिया मात्र 30 दिनों (4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025) में पूरी हो जाएगी। ड्राफ्ट मतदाता सूची 9 दिसंबर को जारी होगी, और अंतिम सूची फरवरी 2026 में। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, "यह 21 साल बाद हो रही व्यापक सफाई है, जो SSR (स्पेशल समरी रिविजन) की कमियों को दूर करेगी।"
लेकिन सिंघार ने इस दावे पर सवाल उठाए: "देश भर के 51 करोड़ वोटरों की गिनती 30 दिनों में कैसे संभव? यह आयोग की जमीनी हकीकत से अनभिज्ञता या जल्दबाजी दिखाता है, जिससे लाखों वैध मतदाता बाहर हो सकते हैं।" उन्होंने चयन मानदंडों की कमी पर जोर दिया-केवल 12 राज्यों को क्यों चुना गया? ECI ने कहा कि यह 2026 के विधानसभा चुनाव वाले राज्यों और उच्च जोड़-हटाव वाले क्षेत्रों पर फोकस है, लेकिन विस्तृत पारदर्शिता नहीं दी।
असम को बाहर रखना: NRC का 'बहाना' या वाजिब कारण?
सिंघार ने असम को SIR से बाहर रखने पर तीखा प्रहार किया: "NRC का बहाना बनाकर असम को छोड़ा गया, जबकि NRC नागरिकता से जुड़ा है और SIR मतदाता अधिकार से। यह पक्षपात की मिसाल है।" ECI का पक्ष: असम में 'अलग नागरिकता प्रावधान' (सेक्शन 6A) और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाले NRC के कारण इसे अलग रखा गया। CEC कुमार ने कहा, "असम के लिए विशेष आदेश अलग से जारी होंगे।" असम में 2026 चुनाव हैं, इसलिए SIR यहां विवादास्पद हो सकता था, लेकिन विपक्ष इसे भाजपा-समर्थक असम CM हिमंता बिस्वा सरमा को फायदा बताता है।
SSR vs SIR: विफलताओं का हिसाब क्यों नहीं?
सिंघार ने तर्क दिया कि यदि हर साल SSR पर्याप्त था, तो SIR की जरूरत क्यों? "SSR की विफलताओं का विश्लेषण बिना SIR लाना उचित नहीं।" ECI ने SIR को 'सफलता' बताया, लेकिन पारदर्शी डेटा नहीं दिया। बिहार SIR-1 (2024) इसका उदाहरण है, जहां 65 लाख नाम हटाए गए। सिंघार ने कहा, "बिहार में 'विदेशी' या गलत प्रविष्टियों की वास्तविक संख्या बताना ECI की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप क्यों करना पड़ा?"
बिहार SIR पर गौर करें: जुलाई 2024 में शुरू, 7.89 करोड़ में से 7.24 करोड़ फॉर्म जमा हुए। 65 लाख नाम हटाए गए, जिनमें डुप्लिकेट, मृत और अवैध शामिल बताए गए। लेकिन विपक्ष ने दलित-मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2025 को ECI को हटाए नामों की सूची प्रकाशित करने का आदेश दिया। ECI ने कहा, "अपीलों में शून्य अस्वीकृति," लेकिन डेटा अभी सार्वजनिक नहीं। सिंघार ने इसे 'बिहार मॉडल' की पुनरावृत्ति बताया।
अंत में, सिंघार ने जनगणना (अक्टूबर 2026) से पहले SIR पर सवाल उठाया: "क्या इससे वोटर डेटा में गड़बड़ी का अवसर बनेगा?" ECI ने SIR को जनगणना से अलग बताया, लेकिन विपक्ष इसे 'बैकडोर NRC' मानता है।
मध्य प्रदेश पर SIR का 'लक्षित असर': आदिवासी और प्रवासी सबसे ज्यादा खतरे में
मध्य प्रदेश SIR-2 में शामिल नहीं है, लेकिन सिंघार ने चेतावनी दी: "यदि लागू हुआ, तो 22% आदिवासी आबादी (दूरदराज क्षेत्रों में) और 25 लाख प्रवासी मजदूर (2011 जनगणना) प्रभावित होंगे।" ECI ने 13 दस्तावेजों (जैसे आधार, FRC) की सूची दी, लेकिन राज्य सरकार ने मार्च 2025 तक 3 लाख+ वन अधिकार दावे खारिज कर दिए। "FRC के अभाव में आदिवासी वोटर वंचित होंगे," सिंघार ने कहा।
प्रवासी मजदूरों पर फोकस: "40-50 लाख MP निवासी बाहर काम कर रहे हैं। बिहार जैसे तेज गिनती से उनके नाम कटेंगे।" बिहार में 47 लाख (ECI के 65 लाख के करीब) नाम हटे, ज्यादातर प्रवासी/कमजोर वर्गों के। सिंघार ने अनुमान लगाया: "MP में 50 लाख वोट कटौती BJP की साजिश है, जो 2030 चुनाव प्रभावित करेगी।" यह समस्या दलित, अल्पसंख्यक और छोटे OBC तक फैली है। अपील प्रक्रिया (ERO → DM → CEO) जटिल है, जो 'मेहनती वोटरों पर बोझ' डालती है।
'वोट चोरी' का पुराना काला अध्याय: 16 लाख फर्जी नाम, ECI की चुप्पी
सिंघार ने 19 अगस्त 2025 की प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र किया, जहां उन्होंने 2023 चुनावों में 'वोट चोरी' का खुलासा किया। दावा: अगस्त-अक्टूबर 2023 में 16 लाख नए मतदाता जोड़े गए (प्रति दिन 26,000), जिससे 27-40 सीटें प्रभावित हुईं। उदाहरण: भोपाल की नरेला विधानसभा में एक मकान पर 104 नाम जोड़े गए, लेकिन केवल 4 लोग रहते थे। दैनिक भास्कर की जांच ने इसे सत्यापित किया।
ECI का 9 जून 2023 निर्देश (बिंदु 2(c)): MP, छत्तीसगढ़ आदि में जोड़-हटाव डेटा वेबसाइट पर न डालें, जनता/पक्षों से न शेयर करें। सिंघार: "यह बदलाव छिपाने का संकेत है। पुरानी गड़बड़ियों पर जवाब न देने से SIR पर भरोसा कैसे?" ECI ने अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। BJP ने आरोपों को 'झूठा' बताया, लेकिन ठोस जवाब नहीं।
मतदाता अधिकार पर खतरा, पारदर्शिता की मांग
सिंघार ने SIR को 'मतदाता सूची सफाई' नहीं, बल्कि 'लोकतंत्र की कटौती' बताया। "कमजोर वर्गों का प्रतिनिधित्व खतरे में।" केंद्रीय सवाल:
- 12 राज्यों के चयन मानदंड क्या? सार्वजनिक लेखा-जोखा क्यों नहीं?
- बिहार SIR में विदेशी/गलत प्रविष्टियां कितनी? संख्यात्मक विवरण क्यों नहीं?
- जनगणना से पहले SIR क्यों? वोटर डेटा गड़बड़ी का जोखिम?
कांग्रेस की 'वोट अधिकार यात्रा' से जुड़ते हुए, सिंघार ने ECI से ट्रेनिंग और पारदर्शिता की मांग की। BJP ने इसे 'विपक्ष का हाई-ड्रामा' कहा, लेकिन ECI चुप है। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र/कर्नाटक में समान आरोप लगाए, जहां BBC ने वोट चोरी की पुष्टि की।
ECI का पक्ष: सफाई अभियान या राजनीतिक हथियार?
ECI ने SIR को 'निष्पक्ष' बताया, राजनीतिक दलों को ट्रेनिंग दी जा रही। लेकिन विपक्ष का कहना है कि बिना SSR विश्लेषण के यह जल्दबाजी है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप (बिहार) से ECI की विश्वसनीयता पर सवाल। यदि MP में SIR आया, तो कानूनी चुनौती निश्चित।












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