महापौर,नपा अध्यक्ष और नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव प्रणाली को लेकर असमंजस, गृह मंत्री मिश्रा ने दिया बड़ा बयान
महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर परिषद अध्यक्षों को जनता चुनेगी या पार्षद ? इसको लेकर एक बार फिर मध्यप्रदेश में असमंजस का माहौल हैं।
भोपाल, 25 मई। मध्यप्रदेश में महापौर नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्षों की चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगातार असमंजस की स्थिति बनती जा रही है। मंगलवार रात को खबर आई कि सरकार ने चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने का फैसला कर लिया है। जिसमें जनता डायरेक्ट महापौर, नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्षों को चुनेगी। इतना ही नहीं खबर तो यह भी आई कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों ने मध्य प्रदेश नगर पालिका विधि अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश का प्रारूप अनुमति के लिए राजभवन को भेजा है। हालांकि प्रदेश के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने इससे इंकार किया है। बुधवार को जब कुछ मीडिया कर्मियों ने उनसे इस बात पर सवाल पूछा तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि मध्यप्रदेश में नगर पालिका, नगर निगम, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत जनपद पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव से जुड़ा कोई भी अध्यादेश अब तक राजभवन नहीं भेजा गया है।

बता दें मध्यप्रदेश में महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर परिषद अध्यक्ष के सीधे चुनाव से जुड़े अध्यादेश ने भाजपा के भीतर उलझनें बढ़ा दी हैं। इस मामले में सीएमओ से जो अध्यादेश राजभवन भेजा गया था, उसे 1 दिन बाद ही सीएमओ ने वापस बुला लिया था। इसके बाद कल मंगलवार को फिर अध्यादेश भेजे जाने की खबर सामने आई थी, लेकिन आज गृह मंत्री ने इस खबर का खंडन कर दिया।
कमलनाथ सरकार ने किया था परिवर्तन
सत्ता में आते ही कमलनाथ सरकार ने अप्रत्यक्ष प्रणाली (पार्षदों को महापौर चुनने का अधिकार) से चुनाव कराने का निर्णय लिया था। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने के बाद सरकार गिर गई और जैसे ही, शिवराज चौथी बार सत्ता में आए, तो उन्होंने कमलनाथ सरकार के फैसले को अध्यादेश के जरिए पलट दिया था, लेकिन इसे विधानसभा में डेढ़ साल तक पेश नहीं किया गया। इससे कमलनाथ सरकार के समय बनाई गई ये व्यवस्था आज भी प्रभावी है।












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