MP News: भोपाल में CM मोहन यादव का कांग्रेस पर तीखा हमला, 'राहुल गांधी मोटी चमड़ी के, फटकार का असर नहीं

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित 'आजादी का महापर्व' कार्यक्रम में कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस को लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति असम्मान और इतिहास से भागने का दोषी ठहराया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) विपक्ष में थी, तब भी उसने राष्ट्रहित में सरकार का साथ दिया, लेकिन कांग्रेस हार का ठीकरा चुनाव आयोग (ECI) पर फोड़ती है और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बावजूद अपनी भाषा नहीं सुधारती।

CM Mohan Yadav takes a dig at Congress in Bhopal says- Rahul Gandhi has a thick skin

साथ ही, उन्होंने 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की जिम्मेदारी कांग्रेस पर मढ़ते हुए कहा कि वह इस ऐतिहासिक सत्य से मुंह मोड़ रही है। इस बयान ने मध्यप्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर सियासी तापमान बढ़ा दिया है।

बीजेपी की राष्ट्रवादी विरासत: अटल जी का उदाहरण

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बीजेपी की राष्ट्रवादी छवि को रेखांकित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "1971 के बांग्लादेश युद्ध के समय अटल जी और पूरी विपक्षी जमात ने भारत की प्रतिष्ठा का गुणगान किया। बीजेपी ने हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा।"

उन्होंने आपातकाल (1975-77) का उल्लेख करते हुए कहा, "19 महीने जेल में बिताने के बावजूद हमने लोकतंत्र के स्तंभों-प्रेस, न्यायपालिका, और चुनाव आयोग-पर कभी उंगली नहीं उठाई। लेकिन आज हालात उलटे हैं। कांग्रेस जैसे ही चुनाव हारती है, वह चुनाव आयोग को गाली देने लगती है। यह उनकी हताशा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति असम्मान को दर्शाता है।"

राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमला: 'मोटी चमड़ी'

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा व्यक्तिगत हमला बोला। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी इतनी मोटी चमड़ी के हैं कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की बार-बार की फटकार का भी उन पर कोई असर नहीं होता। वे बार-बार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करते हैं।"

मोहन यादव ने 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान राहुल गांधी के 'चौकीदार चोर है' बयान का जिक्र किया, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई थी और माफी मांगने को कहा था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दंडित किए जाने के बावजूद अपनी भाषा और रवैया नहीं बदला। पता नहीं कहां से चोर-चोरी का चक्कर पकड़ लिया है।"

उन्होंने चुनाव आयोग की तारीफ करते हुए कहा, "दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत है, और यह मजबूती चुनाव आयोग की वजह से है। ECI हर परीक्षा में खरा उतरा है। लेकिन कांग्रेस को अपनी हार का ठीकरा किसी न किसी पर फोड़ना है।"

विभाजन की सच्चाई: कांग्रेस पर गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री ने 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन को लेकर कांग्रेस पर इतिहास से भागने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "14 अगस्त 1947 को देश का बंटवारा हुआ, और उस समय सत्ता में कांग्रेस थी। यह ऐतिहासिक सत्य है। लेकिन 'विभाजन की विभीषिका' दिवस पर चर्चा से कांग्रेस बचना चाहती है। वे सुप्रीम कोर्ट तक चले गए कि इस विषय पर बात न हो, जबकि यह कोई राय नहीं, बल्कि ध्रुव सत्य है।"

उन्होंने आगे कहा, "विभाजन के दर्द को याद करना जरूरी है ताकि हम उस त्रासदी से सबक लें। लेकिन कांग्रेस इसे दबाना चाहती है, क्योंकि यह उनकी गलतियों को उजागर करता है।" यह बयान केंद्र सरकार द्वारा 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के रूप में 14 अगस्त को मनाने की घोषणा के संदर्भ में था, जिसे कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

'56 इंच का सीना' बनाम 'रोने-बहाने'

मोहन यादव ने बीजेपी और कांग्रेस की तुलना करते हुए कहा, "एक तरफ रोने और बहाने बनाने वाले हैं। दूसरी तरफ 56 इंच के सीने वाले नेता और उनकी विश्वस्तरीय पार्टी है, जो लगातार विजय पताका फहराते हुए सुशासन के लिए जो भी संभव है, कर रही है।" उन्होंने दावा किया कि देश की जनता बीजेपी के सुशासन को देख रही है और उसका समर्थन कर रही है।

उन्होंने केंद्र सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी ने पिछले 11 वर्षों में राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, और डिजिटल इंडिया जैसे कदमों के जरिए देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत किया है। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने हर वर्ग के लिए काम किया है, और यह काम जनता के सामने है।"

मध्यप्रदेश में बढ़ता तनाव

मोहन यादव का यह बयान मध्यप्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के बीच बढ़ते सियासी तनाव को दर्शाता है। 2023 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने मध्यप्रदेश में प्रचंड जीत हासिल की थी, और मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया। दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार अपनी हार के लिए ECI, EVM, और अन्य संस्थानों पर सवाल उठा रही है। 2024 के लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस ने EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे, जिसे बीजेपी ने "हारे हुए की हताशा" करार दिया था।

मुख्यमंत्री का यह बयान स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर आया है, जब देश एकजुटता का संदेश देता है। लेकिन उनके इस हमले ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कांग्रेस की हकीकत उजागर की है। यह बयान हमारी पार्टी की राष्ट्रवादी छवि को और मजबूत करेगा।"

कांग्रेस का जवाब: 'ध्यान भटकाने की रणनीति'

कांग्रेस ने मोहन यादव के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "बीजेपी अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए इस तरह के बयान देती है। मध्यप्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई, और अपराध चरम पर हैं, लेकिन सरकार का ध्यान केवल कांग्रेस पर हमला करने पर है।" उन्होंने विभाजन के मुद्दे को उठाने की निंदा करते हुए कहा, "यह लोगों की भावनाओं को भड़काने की कोशिश है।"

कांग्रेस प्रवक्ता रितु चौधरी ने राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमले की निंदा की और कहा, "राहुल गांधी ने हमेशा जनता के मुद्दों को उठाया है। बीजेपी को जवाब देना नहीं आता, इसलिए वे व्यक्तिगत हमले करते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि ECI और अन्य संस्थानों पर सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है, और कांग्रेस इसे जारी रखेगी।

सामाजिक और सियासी प्रभाव

मोहन यादव का यह बयान मध्यप्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर सियासी चर्चा का केंद्र बन गया है। यह बयान बीजेपी की रणनीति को दर्शाता है, जिसमें वह खुद को राष्ट्रवादी और कांग्रेस को राष्ट्रविरोधी के रूप में पेश करना चाहती है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान 2028 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर दिया गया है, जिसमें बीजेपी अपनी जीत को और मजबूत करना चाहती है।

सामाजिक स्तर पर, यह बयान उन लोगों को आकर्षित कर सकता है जो लोकतांत्रिक संस्थानों और गांधीवादी मूल्यों को महत्व देते हैं। हालांकि, कुछ बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे विभाजनकारी करार दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अनिल शर्मा ने कहा, "स्वतंत्रता दिवस पर हमें एकजुटता का संदेश देना चाहिए, न कि सियासी बयानबाजी करनी चाहिए।"

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