Bhopal News : रस्सी बम फोड़ने से युवक के कान का पर्दा फटा, सरसों का तेल डालने से तकलीफ और बढ़ी
भोपाल में रस्सी बम चलाने के कारण एक युवक के कान के पर्दे फट गए। युवक अपने दोस्तों के साथ बैठकर आतिशबाजी देख रहा था। इसी दौरान किसी ने रस्सी बम चला दिया। रस्सी बम की आवाज इतनी तेज थी कि युवक के कान के पर्दे फट गए।
Bhopal News : राजधानी भोपाल में रस्सी बम के प्रतिबंध के बाद भी शरारती तत्वों ने प्रशासन की बात को नहीं माना। राजधानी में कई जगह रस्सी बम चलने के मामले सामने आए। ऐसा ही मामला भोपाल के ईश्वर नगर से सामने आया जहां पर रस्सी बम चलाने के कारण एक युवक के कान के पर्दे फट गए। युवक अपने दोस्तों के साथ बैठकर आतिशबाजी देख रहा था। इसी दौरान किसी ने रस्सी बम चला दिया। रस्सी बम की आवाज इतनी तेज थी कि युवक के कान के पर्दे फट गए। युवक ने बताया कि जैसे ही रस्सी बम उसके कानों के पास फटा तो उसके कान में जलन होने लगी। इसके बाद उसने डॉक्टर से चेकअप कराया तो पता चला कि कान के पर्दे फट गए।

सरसों का तेल डालने से बढ़ी तकलीफ
ईश्वर नगर में रहने वाला एक युवक अपने दोस्तों के साथ आतिशबाजी देख रहा था। इसी दौरान उसके एक दोस्त ने रस्सी बम उसके पास आकर चला दिया। जैसे ही राशि बम फूटा तो युवक के कान में सनसनाहट होने लगी। इसके बाद युवक अपने घर आया और उसने बताया कि उसकी कानों में जलन हो रही है तो घर वालों ने उसके कामों में सरसों का तेल डाल दिया, जिससे उसकी तकलीफ और बढ़ गई। ENT एक्सपर्ट डॉक्टर एसपी दुबे ने बताया कि युवक के कान में बहुत तेज दर्द हो रहा था जब हमने एंडोस्कोप डालकर देखा तो उसके कान का पर्दा फटा हुआ था। युवक ने बताया कि उसकी कान के पास रस्सी बम फटा था।

प्रशासन की मनाही के बावजूद चलाएं रस्सी बम
राजधानी सहित प्रदेश के कई शहरों में रस्सी बम पर प्रतिबंध था। इसके बावजूद शहरों में रस्सी बम की आतिशबाजी की गई। प्रदेश में 108 एंबुलेंस का संचालन करने वाली जय अंबे कंपनी की कॉल सेंटर पर सोमवार दोपहर 12 बजे से मंगलवार दोपहर 3 बजे तक करीब से 37 ऐसे मामले सामने आए है। ENT एक्सपर्ट डॉक्टर दुबे ने कहा कि जश्न मनाएं लेकिन कोशिश करेंगे तेज ध्वनि के पटाखे ना फोड़े। डॉक्टर दुबे ने बताया कि तेज आवाज वाले पटाखों से अक्सर कान के पर्दे फटने का डर रहता है, इसलिए उनसे दूरी बना कर रखना चाहिए।

1 महीने सावधानी बरतने पर कान का पर्दा हो जाता हैं ठीक
डॉक्टर दुबे ने बताया कि इस समस्या में सबसे अच्छी बात यह है कि जो ट्रॉमेटिक परफॉरेशन बहुत अच्छे से ही सील हो जाते हैं। 1 महीने में आमतौर पर यह पर्दे हिल हो जाते हैं। 1 महीने तक विशेष सावधानी रखना पड़ती है। 1 महीने तक कान में किसी भी प्रकार का पानी या कोई गिला पदार्थ ना जाए इसका विशेष ध्यान रखना है। पानी के जाने से फंगल इंफेक्शन हो सकता है और कान में दर्द बढ़ जाता है। तब इसका टेपेनोप्लास्टिक नामक ऑपरेशन होता है। अगर इससे बचना है तो 1 महीने तक विशेष सावधानी बरतें और कान का पर्दा अपने आप ठीक हो जाता है।

एक महीने बाद सुनने की करेंगे जांच
डॉक्टर दुबे ने बताया कि इस मरीज का एक महीने बाद सुनने (श्रवण शक्ति) की जांच करेंगे। उन्होंने बताया कि पटाखे चलाते समय सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि कान बहुत संवेदी अंग है। किसी भी तेज धमाके के बाद अगर कान के अंदर सनसनाहट हो तो उसको टिनिटस कहते हैं। इस बात का संकेत होता है कि कान के अंदर सुनने वाला अंग (कॉक्लिया) किसी प्रकार से क्षतिग्रस्त हुआ है। जब कभी भी तेज धमाके बाद आपके कान में सनसनाहट पैदा हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। जितना हो सके अपने कानों को तेज आवाज से बचाएं।












Click it and Unblock the Notifications