Bhopal News: ऐतिहासिक लाल दरवाजे पर वक्फ के नाम पर कब्जा, स्थानीय लोगों ने CM और राज्यपाल से लगाई गुहार
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का ऐतिहासिक लाल दरवाजा, जो कभी शहर की शान और पहचान हुआ करता था, आज अतिक्रमण की चपेट में है। शाहजहानाबाद थाने के पास स्थित इस प्राचीन पत्थरों से निर्मित दरवाजे के चारों ओर मकान और दुकानें बन चुकी हैं, और वक्फ बोर्ड के नाम पर इसका कब्जा होने का आरोप लग रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर निगम ने इस दरवाजे का रखरखाव पुरातत्व विभाग को सौंपा था, लेकिन रखरखाव केवल कागजों तक सीमित रहा। अब स्थिति यह है कि मोहम्मद मियां और असद मियां के परिवारों द्वारा वर्षों से इस ऐतिहासिक स्थल पर कब्जा किया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने और लाल दरवाजे को उसके मूल स्वरूप में लाने की मांग की है।

भोपाल का लाल दरवाजा, जो कभी नवाबी दौर की भव्यता और शहर की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक था, आज अतिक्रमण और उपेक्षा का शिकार है। शाहजहानाबाद थाने के पास स्थित यह दरवाजा प्राचीन पत्थरों से निर्मित है और भोपाल के ऐतिहासिक स्थलों में शुमार था। लेकिन अब इसके चारों ओर मकान, दुकानें, और घनी बस्तियां बन चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वक्फ बोर्ड के नाम पर मोहम्मद मियां और असद मियां के परिवारों ने इस ऐतिहासिक स्थल पर सालों से कब्जा कर रखा है।
स्थानीय निवासी रमेश शर्मा ने बताया, "लाल दरवाजा भोपाल की शान था, लेकिन अब यह केवल नाममात्र का बचा है। इसके आसपास अवैध निर्माण हो गए हैं, और वक्फ बोर्ड के नाम पर इसका दुरुपयोग हो रहा है।" एक अन्य निवासी, शबाना खान ने कहा, "नगर निगम और पुरातत्व विभाग ने इसकी देखरेख की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन रखरखाव केवल कागजों पर हुआ। अब तो दुकानें तक किराए पर चल रही हैं।"
अतिक्रमण हटाने की मांग, CM और राज्यपाल को पत्र
लाल दरवाजे को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए स्थानीय निवासियों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगूभाई छगनभाई पटेल को पत्र लिखा है। सात लोगों के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में कहा गया है कि फर्जी दावेदारों ने दरवाजे के आसपास दुकानें बनाकर किराए पर चला दी हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि नगर निगम और पुरातत्व विभाग ने लाल दरवाजे के रिनोवेशन के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने का दावा किया, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। निवासियों ने मांग की है कि इसकी उच्चस्तरीय जांच हो और ऐतिहासिक स्थल को जल्द से जल्द अतिक्रमण मुक्त किया जाए।
पत्र में यह भी सुझाव दिया गया कि यदि लाल दरवाजे को अतिक्रमण से मुक्त कर समांतर सड़क का निर्माण किया जाए, तो यह भोपाल टॉकीज के लिए एक वैकल्पिक पहुंच मार्ग बन सकता है, जिससे यातायात की समस्या भी कम होगी। स्थानीय निवासी अनिल गुप्ता ने कहा, "यदि यह दरवाजा अपने मूल स्वरूप में आ जाए, तो यह न केवल भोपाल की धरोहर को बचाएगा, बल्कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को भी बेहतर बनाएगा।"

वक्फ बोर्ड और अतिक्रमण का विवाद
भोपाल में वक्फ बोर्ड से जुड़े अतिक्रमण के मामले कोई नई बात नहीं हैं। हाल के वर्षों में कई ऐसी खबरें सामने आई हैं, जिनमें वक्फ बोर्ड के नाम पर सरकारी और ऐतिहासिक भूमि पर कब्जे के आरोप लगे हैं। 2024 में Zee News की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि भोपाल में वक्फ बोर्ड ने 27,000 वर्ग फीट सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण किया, जिसके लिए तहसीलदार कोर्ट ने वक्फ बोर्ड को 20% अतिरिक्त बाजार मूल्य और निर्माण तोड़ने की लागत चुकाने का आदेश दिया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल में वक्फ बोर्ड की 800 में से 700 संपत्तियां अतिक्रमण की चपेट में हैं, जिसमें मॉडल स्कूल ग्राउंड, मुंशी हुसैन तालाब, और सिकंदरिया सराय जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
लाल दरवाजे का यह प्रकरण भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वक्फ बोर्ड के नाम पर कुछ व्यक्तियों ने इस ऐतिहासिक स्थल को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल किया है। एक निवासी, सलीम खान ने X पर लिखा, "लाल दरवाजा भोपाल की धरोहर है, लेकिन वक्फ के नाम पर इसका दुरुपयोग हो रहा है। सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
पुरातत्व विभाग और नगर निगम पर सवाल
लाल दरवाजे का रखरखाव नगर निगम ने पुरातत्व विभाग को सौंपा था, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि दोनों ही संस्थानों ने इसकी उपेक्षा की। पत्र में कहा गया है कि रिनोवेशन के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन धरातल पर कोई बदलाव नहीं हुआ। एक RTI कार्यकर्ता, प्रदीप जैन ने बताया, "हमने इस मामले में जानकारी मांगी थी, लेकिन जवाब अस्पष्ट थे। यह साफ है कि लाल दरवाजे की स्थिति जानबूझकर खराब की गई है।"
2021 में, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भी लाल दरवाजे को बचाने की मांग उठाई थी। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि यह दरवाजा प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए 9वीं भोपाल इन्फैंट्री के सैनिकों की स्मृति में बनाया गया था और इसे पुरातत्व विभाग को सौंपकर संरक्षित करना चाहिए। हालांकि, तब से लेकर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सामाजिक और सियासी प्रतिक्रियाएं
बीजेपी के स्थानीय नेता रमेश ठाकुर ने कहा, "लाल दरवाजा भोपाल की ऐतिहासिक पहचान है। हम सरकार से मांग करते हैं कि इसकी जांच हो और इसे अतिक्रमण मुक्त किया जाए।" दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार को पुरातत्व विभाग और नगर निगम की जवाबदेही तय करनी चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता जितेंद्र मिश्रा ने कहा, "यह शर्मनाक है कि हमारी धरोहर इस तरह नष्ट हो रही है। सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए।"












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