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MP News: कामधेनु और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना से बदली किसानों की किस्मत, दूध उत्पादन से बढ़ी लाखों की आमदनी

Bhimrao Ambedkar Kamdhenu: मध्य प्रदेश में पशुपालन और डेयरी व्यवसाय अब केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक तरक्की का मजबूत आधार बनता जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही डॉ भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना ने खासतौर पर छोटे और मध्यम किसानों की किस्मत बदलने का काम किया है।

भोपाल से सटे सीहोर और देवास जिले इसके बड़े उदाहरण बनकर सामने आए हैं, जहां किसानों की आय, दूध उत्पादन और जीवन स्तर-तीनों में साफ सुधार देखने को मिल रहा है।

Bhimrao Ambedkar Kamdhenu and CM Dairy Plus schemes have transformed lives of milk-producing farmers

दूध उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का फोकस

मध्य प्रदेश सरकार का उद्देश्य सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार, आत्मनिर्भरता और किसानों की आय दोगुनी करना है। इसी लक्ष्य के तहत डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। इनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना सबसे अहम मानी जा रही हैं।

जमीनी हकीकत: किसानों की जुबानी सफलता की कहानी

Bhimrao Ambedkar Kamdhenu and CM Dairy Plus schemes have transformed lives of milk-producing farmers

1.सीहोर: विशाल बरेठा की बदली तस्वीर

सीहोर जिले की ग्राम पंचायत कचनारिया के किसान विशाल बरेठा ने वन इंडिया हिंदी को बताया कि पहले उनके पास सिर्फ 2 गाय थीं। दूध उत्पादन कम होने के कारण आमदनी सीमित थी और खर्च निकालना भी मुश्किल होता था। डॉ भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत उन्होंने 25 दुधारू पशु खरीदे। इसके बाद दूध उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। आज वे नियमित रूप से दूध बेचकर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। विशाल बताते हैं कि मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना से भी उन्हें अतिरिक्त मदद मिली, जिससे उनका डेयरी व्यवसाय और मजबूत हुआ।

2. देवास: मजदूरी से डेयरी उद्यमी बने मनोहर लाल

देवास जिले के हाट पिपलिया निवासी मनोहर लाल की कहानी कई किसानों के लिए प्रेरणा है।
मनोहर पहले खेतों में मजदूरी करते थे। दिनभर की मेहनत के बाद उन्हें महज 200-250 रुपये ही मिल पाते थे, जिससे परिवार चलाना बेहद कठिन था।

उन्होंने पहले डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत करीब 6 लाख रुपये का लोन लेकर 10 गायें खरीदीं। धीरे-धीरे उनका डेयरी व्यवसाय बढ़ा और आज उनके पास 15 से अधिक दुधारू पशु हैं।
इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना का लाभ लिया, जिसमें मुर्रा नस्ल की भैंसों पर 50 से 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिली।

मनोहर बताते हैं कि अब उनका दूध उत्पादन काफी बढ़ गया है और मासिक आय 80 हजार रुपये से अधिक हो चुकी है। मजदूरी करने वाले मनोहर आज आत्मनिर्भर डेयरी किसान बन चुके हैं।

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डॉ भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना: बड़े डेयरी फार्म की राह

  • यह योजना उन किसानों और उद्यमियों के लिए है, जो बड़े स्तर पर डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
  • योजना के तहत 25 दुधारू पशुओं (गाय/भैंस) की डेयरी यूनिट स्थापित की जाती है।
  • कुल परियोजना लागत लगभग 36 से 42 लाख रुपये तक होती है।
  • इसमें सरकार की ओर से 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है।
  • यह योजना विशेष रूप से संगठित डेयरी फार्म, आधुनिक शेड, चारा व्यवस्था और पशु चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ावा देती है।

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना: छोटे पशुपालकों को संबल

  • यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
  • इसके तहत लाभार्थियों को मुर्रा नस्ल की 2 भैंसें उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • पशु खरीद पर 50% से 75% तक की सब्सिडी दी जाती है।
  • योजना का उद्देश्य कम पूंजी में अधिक दूध उत्पादन और नियमित आय सुनिश्चित करना है।

अन्य योजनाएं और सरकारी पहल

  • सरकार केवल पशु उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि डेयरी सेक्टर को संपूर्ण रूप से मजबूत कर रही है।
  • आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के तहत 10 लाख रुपये तक की डेयरी यूनिट पर सामान्य वर्ग को 25% और SC/ST वर्ग को 33% तक की सब्सिडी।
  • गोशालाओं से मुफ्त गाय और बछिया उपलब्ध कराने की व्यवस्था।
  • नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान और पशु चिकित्सा सेवाएं।
  • सहकारी दुग्ध संघों को दूध बेचने पर प्रति लीटर ₹5 का अतिरिक्त अनुदान।

डेयरी सेक्टर से गांवों में खुशहाली

डॉ भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना ने यह साबित कर दिया है कि सही नीति, समय पर सब्सिडी और तकनीकी सहयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
सीहोर और देवास जैसे जिलों में किसानों की बढ़ती आमदनी इस बात का प्रमाण है कि डेयरी व्यवसाय अब सिर्फ दूध उत्पादन नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और स्थायी रोजगार का रास्ता बन चुका है।

अगर यही मॉडल राज्य के अन्य जिलों में भी प्रभावी ढंग से लागू हुआ, तो मध्य प्रदेश डेयरी सेक्टर में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

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