Mumbai की सड़कें बनाने MP के थर्मल पावर की राख ‘सोना’, यहां के लिए ये माटी है क्या ?
मध्य प्रदेश के थर्मल पॉवर से निकलने वाली राख का इस्तेमाल मुम्बई की सड़कें बनाने में हो रहा हैं। एमपी के शहरों की सड़कें भी खस्ताहाल है। लोग सवाल उठा रहे है कि मुंबई की तरह यहां सड़कें बनाने तकनीक का इस्तेमाल क्यों नहीं है।

Ashes of MP's thermal power are 'gold:मध्य प्रदेश में शहरों की उच्च गुणवत्ता के सड़कें बनाने हमेशा से डिमांड होती आई हैं। कुछ जगहों पर सीसी रोड अच्छी भी बनी, जो सालों से टिकी हुई हैं, लेकिन कुछ तो बनते ही उखड़कर निर्माण एजेंसियों को आईना दिखा रही है। इसके उलट इसी प्रदेश के थर्मल पावर से निकालने वाली राख महाराष्ट्र के मुंबई के लिए सोने से कम नहीं। वहां की सड़कें बनाने यहां की राख भेजी जा रही है। लोग सवाल उठा रहे है कि क्या एमपी में इसका इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा?

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मध्य प्रदेश में कभी नगरीय प्रशासन मंत्री रहे पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का वह डायलॉग बड़ा चर्चित रहा, जब वह सार्वजनिक मंचों से कहते नजर आते थे, कि शहरों की सड़कें हेमामालिनी के चिकने गालों की तरह मजबूत बनेंगी। गड्ढे देखने तरस जाओंगे। वास्तव में कुछ सड़कें ऐसी बनी भी, लेकिन वह फॉर्मूला मौजूदा दौर में अब नजर नहीं आता। पिछली बारिश में राजधानी भोपाल से लेकर इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे सभी बड़े शहरों की मुख्य सड़कों के हाल बेहाल हो गए। टिकाऊ सड़कें बनाने जिस तकनीक का मुंबई जैसे महानगरों में हो रहा है, उसका एमपी में नाम भी नहीं लिया जा रहा। आपको जानकर हैरानी होगी कि प्रदेश थर्मल पावर हॉउस से निकल रही राख यानि फ्लाई ऐश मुंबई की सड़कें बनाने के लिए सोना से कम नहीं।

सारणी और खंडवा के पावर हॉउस से निकल रहे बेस्ट मटेरियल राख की मुंबई में डिमांड है। मालगाड़ियों के जरिए कई मीट्रिक टन राख मुंबई भेजी रहा है। उर्जा विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि यहां की राख पहली बार किसी दूसरे राज्य भेजने का प्रयोग सफल रहा। दोनों ही थर्मल प्लांट की राख का इस्तेमाल मुम्बई की सड़कें बनाने में हो रहा हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर विजय वर्मा बताते है कि इस राख का कंपोनेंट में इस्तेमाल कर सड़क के बेस को मजबूत किया जाता हैं। पानी में मिलने के बाद फ्लाई ऐश की ताकत सीमेंट जैसी मजबूत हो जाती है। जिसके ऊपर की परत एक निश्चित अवधि में ही उधड़ना शुरू होती हैं। जानकर यही सवाल कर रहे है कि यहां की राख से जब मुंबई की सड़कें बन सकती है, तो फिर एमपी की वैसी ही तकनीक से मजबूत सड़कें बनाने इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा?












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