दशहरे पर भोपाल पहुंचे अभिनेता अभिषेक बच्चन और जया बच्चन, कालीबाड़ी की झांकी में बंगाली महिलाओं ने खेला सिंदूर

टीटी नगर स्थित कालीबाड़ी की झांकी में जया बच्चन और अभिषेक बच्चन ने मां दुर्गा का पूजन किया। इसके बाद बंगाली औरतों के साथ सिंदूर भी खेला। बता दे मां बेटे करीब 5 मिनट तक दुर्गा पंडाल में रहे।

भोपाल,5 अक्टूबर। दशहरे के पर्व पर राजधानी पहुंच कर अभिनेता अभिषेक बच्चन और जया बच्चन ने मां दुर्गा मां के दर्शन किए। टीटी नगर स्थित कालीबाड़ी की झांकी में जया बच्चन और अभिषेक बच्चन ने मां दुर्गा का पूजन किया। इसके बाद बंगाली औरतों के साथ सिंदूर भी खेला। बता दे मां बेटे करीब 5 मिनट तक दुर्गा पंडाल में रहे। इस दौरान उनको देखने के लिए बड़ी संख्या में भोपाल के लोगों की भीड़ उमड़ गई। इसके बाद वह अपने मौसी के घर के लिए निकल गए। उनके साथ बेटी आराध्या बच्चन भी झांंकी देखने आई थी।

Actors Jaya & Abhishek Bachchan Bhopal on Dussehra, Bengali women vermilion

बता दे कालीबाड़ी में आज बंगाली समाज की महिलाओं ने दशहरे पर्व पर झांकी के अंदर सिंदूर से होली खेली। देवी जी को सिंदूर लगाते हुए ढोल नगाड़ों के साथ पारंपरिक डांस भी किया। लेकिन इस बीच बारिश हो जाने के कारण कार्यक्रम ज्यादा लंबा नहीं चल सका। आधे घंटे की बारिश ने पूरे पंडाल को गीला कर दिया। इसके बाद भी कालीबाड़ी की झांकी पर बंगाली महिलाओं का डांस जारी रहा।

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    क्यों खेलते सिंदूर से होली

    बंगाली समाज की मान्यता अनुसार दुर्गा पूजा के आखिरी दिन सिंदूर से होली खेली जाती है। बंगाली समाज के अनुसार यह एक रस्म होती है, जो जो आखिरी दिन निभाई जाती है। परंपरा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि देवी दुर्गा अपने चार बच्चों के साथ दुर्गा पूजा उत्सव मनाने के लिए धरती पर आती है। दुर्गा मां 9 दिन तक धरती पर रहती है इसके बाद जब वे यहां जाती है तो अंतिम दिन उदासी वाला माहौल बन जाता है। जब देवी जी की विदाई होती है तो ऐसा माना जाता है कि दुर्गा मां के आंसू बहे थे, इसलिए उनके गालों को पान के पत्तों से पूछा जाता है इसके बाद उनकी मांग में और पारंपरिक चूड़ियों पर सिंदूर लगाकर फिर सिंदूर होली खेली जाती है। इसके बाद महिलाएं अपनी सुखी जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए मनोकामना करती हैं और एक दूसरे को सिंदूर लगाकर मिठाई खिलाती हैं।

    वही बंगाली समाज की महिलाओं ने कहा कि दुर्गा मां अपने मायके आती हैं। जब वह जहां से जाती हैं तो हम उन्हें सिंदूर लगाकर विदा करते हैं। दशहरे वाले दिन यह परंपरा निभाई जाती है। इस दिन हम खूब इंजॉय करते हैं।

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