Bhopal News: हरियाली बनाम हाईवे की जंग, अयोध्या बायपास चौड़ीकरण में 8000 पेड़ों पर संकट, होगा बड़ा आंदोलन
एक तरफ विकास की गाड़ी रफ्तार पकड़ रही है, तो दूसरी तरफ हरियाली का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का अयोध्या बायपास, जो आने वाले वर्षों में 10 लेन का हाईवे बनने जा रहा है, वहां अब पेड़ और परियोजना आमने-सामने खड़े हैं। इस सड़क चौड़ीकरण परियोजना में 8000 से अधिक पेड़ों की बलि चढ़ाई जाने वाली है, जिससे शहर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर बवाल मच गया है।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट को अंजाम दे रही है। इसके लिए नगर निगम में पेड़ काटने की अनुमति का आवेदन भी किया जा चुका है। लेकिन जैसे ही ये खबर सार्वजनिक हुई, भोपाल की सड़कों पर हरियाली प्रेमियों का आक्रोश फूट पड़ा।

"ये सिर्फ पेड़ नहीं, सांसें हैं हमारी"
रत्नागिरी तिराहे से लेकर आसाराम तिराहे तक फैले हरे-भरे पेड़ों की कतारें अब सिर्फ मौन दर्शक नहीं रहेंगी। बीते रविवार को सैकड़ों लोग रत्नागिरी तिराहे पर जमा हुए और एक अद्भुत दृश्य सामने आया - लोगों ने पेड़ों को रक्षासूत्र बांधकर उन्हें 'संरक्षण का वचन' दिया।
श्रमिक नेता दीपक गुप्ता, जो इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं, ने कहा - "यह सिर्फ पेड़ों की लड़ाई नहीं है, यह हमारी सांसों की, हमारे बच्चों के भविष्य की, और इस शहर की पहचान की लड़ाई है। विकास जरूरी है, पर विकास का मतलब विनाश नहीं होना चाहिए।"
तो क्यों बनाया जा रहा है 10 लेन का अयोध्या बायपास?
एनएचएआई का दावा है कि अयोध्या बायपास सड़क पर तीन बड़े ब्लैक स्पॉट हैं, जहां हर साल औसतन 30 से 35 लोग अपनी जान गंवा देते हैं।
- इसी के चलते ये सड़क अब:
- मुख्य 6 लेन
- और दोनों ओर 2-2 सर्विस लेन मिलाकर
- कुल 10 लेन का एक्सप्रेस बायपास बनने जा रही है।
NHAI अधिकारियों का तर्क है: "हम नागरिकों की जान बचाने के लिए यह चौड़ीकरण कर रहे हैं। यह परियोजना सिर्फ रफ्तार नहीं, सुरक्षा भी लेकर आएगी।"
Bhopal News: विरोध की आहट के बीच कानूनी कवच तैयार
परियोजना को लेकर आंदोलन की आहट मिलते ही, NHAI ने हाईकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में कैविएट दाखिल कर दी है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई स्टे की मांग करता है, तो कोर्ट बिना एनएचएआई की बात सुने कोई भी रोक नहीं लगाएगा।
18 मई को होगा निर्णायक आंदोलन
पर्यावरण कार्यकर्ता उमाशंकर तिवारी ने बताया कि शिवाजी नगर में बीते सप्ताह एक अहम बैठक हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि: 18 मई की शाम को अयोध्या बायपास पर महाआंदोलन होगा। शहरभर से सैकड़ों लोग, सामाजिक संगठन, पर्यावरणविद्, छात्र, और वरिष्ठ नागरिक इस अभियान में शामिल होंगे। एक वैकल्पिक रूट प्लान की मांग की जाएगी, ताकि पेड़ भी बचें और प्रोजेक्ट भी आगे बढ़े।
Bhopal News: विकास बनाम प्रकृति: क्या कोई संतुलन संभव है?
NHAI की तरफ से यह कहा जा रहा है कि वे अयोध्या बायपास के आस-पास "सिटी फॉरेस्ट" विकसित करने के लिए तैयार हैं। यानी जहां पेड़ काटे जाएंगे, वहां नए पौधे लगाए जाएंगे।
लेकिन सवाल उठता है - क्या 40-50 साल पुराने पेड़ों की जगह एक नर्सरी के पौधे लगाकर उसी तरह का इकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है?
रक्षासूत्र से शुरू हुआ संघर्ष: पेड़ों की कलाई में बंधी उम्मीद
रविवार की शाम एक भावुक क्षण बन गई, जब आम नागरिकों ने खुद जाकर पेड़ों की शाखाओं पर रक्षासूत्र बांधे। कुछ बच्चों ने अपने नाम के साथ "मुझे बचाओ" लिखे हुए कार्ड्स पेड़ों पर टांगे। 7 वर्षीय बच्ची श्रेया ने अपनी छोटी हथेली से पेड़ की छाल पर रेशमी धागा बांधते हुए कहा -"ये पेड़ हमें हवा देते हैं। मैं इन्हें कटने नहीं दूंगी।"
क्या है आगे की राह?
एनएचएआई का दावा है कि उन्हें कानूनी मंजूरी मिलने के बाद ही वे पेड़ों की कटाई शुरू करेंगे। लेकिन आंदोलनकारियों ने यह साफ कर दिया है कि: वे 'चिपको आंदोलन' की तर्ज पर पेड़ों से चिपक कर भी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। जन जागरूकता अभियान, ऑनलाइन याचिकाएं, और कला प्रदर्शनियों के ज़रिए यह आंदोलन शहरभर में फैलेगा।
क्या भोपाल बचाएगा अपनी हरियाली?
अयोध्या बायपास का चौड़ीकरण भोपाल की ट्रैफिक और सुरक्षा के लिहाज़ से अहम है। लेकिन 8000 पेड़ों का बलिदान क्या सचमुच अनिवार्य है? सवाल यह नहीं कि सड़क बने या न बने - सवाल यह है कि क्या प्रकृति और प्रगति साथ चल सकती हैं? एक तरफ बुलडोजर है, तो दूसरी तरफ बंधे हुए रक्षासूत्र। अब देखना यह है कि 18 मई का आंदोलन क्या रुख लेता है - और प्रशासन क्या विकल्प तलाशता है।












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