रीवा में फूड प्वाइजनिंग से 3 की मौत, 20 से अधिक बीमार, हैजे की आशंका के चलते कुएं के पानी का लिया सेंपल
रीवा, 14 जून: जिले के बैकुंठपुर के नजदीक माड़ौ गांव में लगातार आदिवासी बस्ती के लोगों की बिगड़ रही तबियत के बीच तीन की मौत के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। यहां पर करीब 20 से अधिक संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।
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जिसमें से कुछ का गांव में ही उपचार किया जा रहा है और जिनकी हालत ठीक नहीं थी उन्हें सिरमौर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया है। गांव में यह घटना फूड प्वाइजिनिंग की वजह से हुई अथवा पानी की खराबी से इसका पता लगाने के लिए पानी का सेंपल जांच के लिए भेजा गया है। बीते कई दिनों से गांव में एक-एक कर लोग बीमार हो रहे थे लेकिन गांव के लोगों ने भी इसे सामान्य मानते हुए घर पर ही दवाइयां लेना जारी रखा था।
जब हालत गंभीर होने लगी तब बात प्रशासन तक पहुंची। माड़ौ गांव के मचला टोला में आदिवासी बस्ती में बीते सात जून को पारिवारिक उत्सव था। जहां से धूप में ही लोग टाटा बदरांव गांव ट्रेक्टर में सवार होकर गए थे। जहां पर पूरी दोपहर भगत के कार्यक्रम के बाद सायं घर लौटे। रात्रि के समय सामूहिक भोज का कार्यक्रम था। दूसरे दिन सुबह से ही लोगों को उल्टी-दस्त की समस्या शुरू हो गई। पहले तो बच्चों पर इसका असर हुआ बाद में बड़े भी प्रभावित हुए। दिनेश कोल के पांच वर्षीय पुत्र आकाश को रीवा के गांधी स्मारक अस्पताल लाया गया, जहां पर दस जून की रात्रि बच्चे की मौत हो गई। चिकित्सकों ने बताया कि बच्चा पहले से भी बीमार था।इसके बाद गांव में बीमारी से प्रभावित रामवती पत्नी विशाले कोल(80) की बीती रात मौत हो गई। जिसकी सूचना पर सीएमएचओ रीवा से टीम लेकर पहुंचे, साथ ही सिरमौर से एसडीएम नीलमणि अग्निहोत्री भी पहुंचे थे। बस्ती के हर व्यक्ति का परीक्षण किया गया और ओआरएस के साथ ही अन्य दवाएं दी गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की टीम शाम को गांव से वापस लौटी तो सुगनी देवी पत्नी गामा कोल (80) की मौत हो गई है।
सिरमौर में इनका चल रहा है उपचार
सिरमौर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कई लोगों का उपचार किया जा रहा है। जिसमें संगीता कोल पिता छोटेलाल 20 वर्ष, कुसुम पिता छेदीलाल 16 वर्ष, आशा कोल पिता मिर्रा कोल 18 वर्ष, सगुन पिता जगजीवन 15 वर्ष, रूपा कोल पिता अनिल कोल ढाई वर्ष, अरुण कोल पिता शिवरण 22 वर्ष, आरती पिता रामकुमार 16 वर्ष आदि का उपचार किया जा रहा है। भाईलाल कोल को रीवा लाया गया था, जहां से उपचार के लिए हालत ठीक होने पर छुट्टी दे दी गई है। डॉ. प्रशांत शुक्ला ने बताया कि अब सबकी हालत में सुधार है। माड़ौ गांव की बस्ती में कुछ दिन पहले कोई कार्यक्रम था। जहां पर भोजन करने के बाद लोगों की तबियत खराब हुई थी। एक बच्चे को रीवा लाया गया था तो मौत हुई, इसके बाद गांव में वृद्धा की मौत हो गई। इस कारण पूरी बस्ती के लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है, जिनकी हालत ठीक नहीं थी, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
डॉ. एनएन मिश्रा, सीएमएचओ रीवा
गांव में सैकड़ा भर लोगों की बस्ती में दो दर्जन लोगों के एक साथ बीमार होने के बाद इसके कारणों का पता लगाया जा रहा है। एसडीएम ने पीएचइ की टीम बुलाकर कुएं के पानी का सेंपल एकत्र कराया है। इसकी जांच के लिए लैब भेजा गया है। जहां से पानी की गुणवत्ता से जुड़ी रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि किस वजह से लोगों की हालत खराब हुई। जब तक इसकी पुष्टि नहीं होगी तब तक पानी टैंकर के जरिए लोगों तक उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि चिकित्सकों का मानना है कि यदि कुंए का पानी खराब होता तो पूरी बस्ती के लोग प्रभावित होते। करीब दो दर्जन लोग ही प्रभावित हुए हैं, जो उत्सव से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गए थे।












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