भोपाल में 107 करोड़ का घोटाला, 250 लोगों को झांसा देकर करोड़ों ठगी

कॉलोनी बनाने के नाम पर 107 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले भू माफिया रमाकांत को भोपाल जिला कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। साथ ही ₹50000 का जुर्माना भी किया है। धोखेबाज शख्स पेशे से इंजीनियर है।

भोपाल 3 जून। गुरुवार को भोपाल जिला कोर्ट ने सुनवाई करते हुए प्लॉट काटकर 107 करोड़ रुपये का घोटाला करने वाले भू माफिया रमाकांत विजय वर्गी को उम्र कैद की सजा सुना दी। कोर्ट ने धोखेबाज पर ₹50 हजार का जुर्माना भी ठोका है। बता दे भूमाफिया रमाकांत विजयवर्गीय पेशे से इंजीनियर है। उसने भोपाल में पंचवटी कॉलोनी बनाने का झांसा देकर 250 लोगों के साथ फ्रॉड किया था। एडीजे धर्मेंद्र टांडा की कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। जहां आरोपी को दोषी मानते हुए कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई। बता दे 2 साल पहले क्राइम ब्रांच ने कोहेफिजा पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार किया था।

इंजी रमाकांत कैसे बना भूमाफिया ?

इंजी रमाकांत कैसे बना भूमाफिया ?

भोपाल जिला कोर्ट के सरकारी वकील साबिर सिद्दीकी ने बताया कि रमादान ने 1976 में उज्जैन की कॉलेज इंजिनीरिंग की पढ़ाई की है। इसके बाद जुगाड़ जुगाड़ करके उसने सरकारी विभागों में कॉन्ट्रैक्ट लेकर काम करना शुरू कर दिया। भोपाल एयरपोर्ट के पास 2002 से 03 में पंचवटी फेस-1 पर काम किया। इसके बाद फेस-2 और फिर फेस-3 पर प्लॉटिंग शुरू की। किसानों से एग्रीमेंट कर लोगों से पैसे लिए इस बीच किसानों से हुए मनमुटाव के चलते प्रोजेक्ट अटक गया और उसने ग्राहकों से ली गई रकम हड़प ली।

कैसे हुआ मामला दर्ज

कैसे हुआ मामला दर्ज

2010 में कोई फिजा थाने में रमाकांत के खिलाफ धोखाधड़ी का पहला केस दर्ज किया गया था, इसके बाद उस पर केस की झड़ी सी लग गई। उसके खिलाफ थाने में 22 के दर्द हो चुके हैं। इतना ही नहीं इंदौर और ईडी में रमाकांत के सलाह 86 केस दर्ज है। इसके साथ ही 100 से अधिक आवेदकों ने कोर्ट में उसके खिलाफ केस दायर करने के लिए याचिका दी थी।

भेष बदलकर काट रहा था फरारी

भेष बदलकर काट रहा था फरारी

भोपाल में केस दर्ज होने के बाद पुलिस से बचने के लिए रमाकांत विजयवर्गीय ने भेज बदलने का सहारा लिया। बता दे भोपाल में ठगी करने के बाद में इंदौर के विजय नगर स्थित फ्लैट में राम कुमार व्यास बनकर रह रहा था। दाढ़ी और बाल बढ़ाकर हुलिया में बदल लिया था। 2 साल पहले उसे पुलिस ने पकड़ा मैं हुलिया बदलकर इंदौर से भोपाल आ रहा था। पुलिस उसे पकड़ ना सके इसके लिए उसने फर्जी पहचान पत्र भी बनवा लिया था। तब उसका बेटा विदेश में था।

ठगी करने के बाद कैसे बना नमकीन कारोबारी

ठगी करने के बाद कैसे बना नमकीन कारोबारी

ढाई सौ लोगों को चूना लगाने के बाद रमाकांत विजयवर्गी भेष बदलकर नमकीन के व्यापार में उतर गया। उज्जैन से नमकीन लाकर इंदौर में सप्लाई करने लगा। कुछ दिन बाद उसने ट्रैवल एजेंसी भी शुरू कर दी। रमाकांत ने डिस्ट्रिक्ट इन्फ्राट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी भी खोल रखी थी। उसने ठगी के पैसों को नमकीन के कारोबार में लगा दिया था हालांकि पुलिस उसके पास से रकम बरामद नहीं कर सकी। ठगी के शिकार लोगों ने कई बार पुलिस अफसरों पर भी विजयवर्गीय से सांठगांठ करने का आरोप लगाया है।

बुराई का अंत बुरा ही होता है। इसलिए भोपाल कोर्ट ने ढाई सौ लोगों से ठगी करने पर रमाकांत को उम्र कैद की सजा सुनाई है।

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