चंबल से 147 साल पहले विदेश चले गए थे पूर्वज, छठवीं पीढ़ी ने विदेश से वापस आकर दी यह सौगात
भिंड के भगवंतपुरा गांव के रहने वाले पेमराज महाराज की चौथी पीढ़ी ने साउथ अफ्रीका से आकर ग्रामीणों को दी स्कूल भवन की सौगात
भिंड, 4 सितंबर। चंबल के भिंड जिले के एक छोटे से गांव से 147 साल पहले एक शख्स विदेश चला गया था। उस शख्स की छठवीं पीढ़ी 147 साल बाद चंबल के भिंड जिले वापस पहुंची और यहां उन्होंने अपने पैतृक गांव में पहुंचकर गांव के लोगों को शानदार सौगात देकर सुर्खियां बटोर लीं। खुद भिंड कलेक्टर ने इस परिवार द्वारा दी गई सौगात को सराहा। पूरा मामला भिंड के भगवंतपुरा गांव से जुड़ा हुआ है।

147 साल पहले शुरू हुई थी यह कहानी
भिंड जिले के अटेर इलाके के एक छोटे से गांव भगवंतपुरा के रहने वाले पेमराज महाराज 1875 में पश्चिम बंगाल के प्लासी इलाके से जहाज में सवार होकर दक्षिण अफ्रीका चले गए। दक्षिण अफ्रीका में पेमराज महाराज ने एक शुगर फैक्ट्री में नौकरी कर ली। उन्होंने 44 साल तक वहां रहकर नौकरी की थी। जब वे भारत वापस लौटे तो 8 मार्च 1920 को उनका देहांत हो गया।

दक्षिण अफ्रीका में ही बस गई पेमराज महाराज की फैमिली
पेमराज महाराज की फैमिली दक्षिण अफ्रीका में ही बस गई थी। यहीं धीरे-धीरे उनके कारोबार का विस्तार हुआ। पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार संपन्न होता गया और वर्तमान में पेमराज महाराज की छठवीं पीढ़ी भी इस दुनिया में आ गई।

दौलत शोहरत कमाने के बाद पैतृक भूमि की आई याद
पेमराज महाराज के परिवार ने दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए काफी दौलत शोहरत कमाई। इसके बाद उन्हें अपने पूर्वजों की पैतृक भूमि की याद आई। जिसके बाद पूरे परिवार ने अपने पूर्वजों की जन्मस्थली को तलाश करना शुरू कर दिया। पेमराज महाराज की वर्तमान पीढ़ी में मौजूद रिजेश महाराज और रिजय महाराज समेत अन्य परिवार के सदस्यों ने अपने पूर्वजों की जन्मस्थली को तलाशना शुरू कर दिया। यह पता करना उनके लिए काफी कठिन काम था कि वे भारत देश के किस स्थान के रहने वाले हैं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार कई साल तक वे खोज में लगे रहे कि आखिर उनके पूर्वज भारत में किस स्थान पर जन्मे थे।

पेमराज महाराज की यात्रा के रिकॉर्ड से गृह गांव का चला पता
पेमराज महाराज के परिवार वालों ने पेमराज महाराज के जहाज द्वारा यात्रा करने का रिकॉर्ड खंगाला। काफी मशक्कत के बाद उन्हें रिकॉर्ड मिल गया जिसमें भगवंतपुरा गांव का जिक्र भी शामिल था, लेकिन भगवत पुरा गांव को ढूंढना परिवारजनों के लिए काफी मुश्किल था क्योंकि भगवंतपुरा गांव के साथ ग्वालियर का नाम लिखा हुआ था। भिंड का उसमें कहीं उल्लेख नहीं था।

सिंधिया स्कूल के क्रिकेट कोच की मदद ली
दक्षिण अफ्रीका में बसे पेमराज महाराज के परिवार ने अपने पूर्वजों के गांव को खोजने के लिए सिंधिया स्कूल के क्रिकेट कोच विजय प्रकाश शर्मा की मदद ली। सिंधिया स्कूल के क्रिकेट कोच विजय प्रकाश शर्मा क्रिकेट टीम को लेकर दक्षिण अफ्रीका गए हुए थे और यहीं पर उनकी मुलाकात पेमराज महाराज के परिवार के रीनेश और रिजय से हुई थी। दोनों ने मिलकर क्रिकेट कोच से उनके पूर्वजों के पैतृक गांव को ढूंढने के लिए मदद मांगी जिस पर क्रिकेट कोच ने अपनी सहमति दे दी।

गांव ढूंढकर दक्षिण अफ्रीका से बुलाया पूरा परिवार
क्रिकेट कोच विजय प्रकाश शर्मा ने भगवंतपुरा गांव का पता लगा लिया। भिंड जिले के अटेर इलाके में स्थित भगवंतपुरा गांव के बारे में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में मौजूद पेमराज महाराज के परिवार वालों को बताया। गांव का पता चलते ही खुशी के मारे पूरा परिवार एक साथ भिंड पहुंच गया।

ग्रामीणों से मिलकर जताई खुशी
पेमराज महाराज का परिवार 147 साल बाद अपने पूर्वजों की जन्म स्थली भगवंतपुरा गांव पहुंचा था। यहां उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात की। इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव की स्कूल की हालत बहुत खराब है। यह सुनकर पेमराज महाराज के परिवार ने यह निर्णय लिया कि वह अपने पूर्वजों की जन्मस्थली पर रहने वाले लोगों को स्कूल की सौगात देंगे।

गांव में बनवा दिया सर्व सुविधा युक्त नया स्कूल भवन
पेमराज महाराज के परिवार ने गांव वालों की परेशानी जानकर इस गांव में 1800 वर्गफीट एरिया में एक नया स्कूल भवन तैयार करवाया और इस स्कूल भवन में फर्नीचर समेत अन्य संसाधन भी जुटाए। इसके बाद इस स्कूल को ग्रामीणों के लिए भेंट कर दिया।

स्कूल के लोकार्पण के समय कलेक्टर भी रहे मौजूद
पेमराज महाराज के परिवार की छटवीं पीढ़ी के हाथों स्कूल का फीता काटकर उसका लोकार्पण किया गया। इस मौके पर भिंड कलेक्टर डॉ सतीश कुमार समेत जिला शिक्षा अधिकारी भगवंतपुरा गांव में पेमराज महाराज के परिजनों के साथ मौजूद रहे। कलेक्टर ने भी ग्रामीणों के लिए दिए गए इस स्कूल भवन को लेकर खुशी जाहिर की।












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