ट्रेन से बस्ती पहुंचे प्रवासी श्रमिकों ने कहा- 635 रु दिया किराया, BJP सांसद ने कही ये बात
बस्ती। कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी और लॉकडाउन के बीच दूसरे प्रदेशों में फंसे प्रवासी श्रमिको को वापस लाने के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई गई है। गुरुवार (7 मई) को गुजरात के नडियाद से चली श्रमिक स्पेशल ट्रेन बस्ती पहुंच। ट्रेन में बस्ती समेत विभिन्न जिलों के सवार 1218 प्रवासी श्रमिक के कदम स्टेशन के प्लेटफार्म पर पड़े तो चहलकदमी बढ़ गई। प्रशासन ने शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए सबकी थर्मल स्क्रीनिग कराई।

मजदूरों को चेहरे पर दिखी खुशी
बस्ती के डीएम का कहना है कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन से लगभग 1218 लोग बस्ती रेल्वे स्टेशन पर पहुंचे। यह प्रदेश के 38 जिलों के रहने वाले हैं। इन प्रवासी श्रमिकों को घर तक पहुंचाने के लिए बसों का इंतेजाम किया गया है। इन श्रमिकों कि मेडिकल स्क्रीनिंग कराकर डिस्चार्ज स्लिप दी जा रही है और उन के जनपद में जाने वाली बसों में बिठा कर भेजा गया है। वहीं श्रमिकों के चेहरे पर अपने घर पहुंचने की खुशी साफ तौर पर दिखी।

रोजी-रोटी का संक्ट हो गया था खड़ा
वहीं, प्रवासी श्रमिकों ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से उन के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। उनके पास ना तो काम है और ना ही पैसे। जो पैसे वो लॉकडाउन के चलते धीरे-धीरे खत्म हो गए। जहां पर काम करते थे वहां पर भी उन को कोई मदद नहीं मिली। इस दौरान उनके भीतर का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने कहा ट्रेन में 635 रुपए किराया लिया गया और यहां बीच राह में लाकर छोड़ दिया गया। मजदूरों के हाथ में उतने मूल्य का टिकट भी मिला।

कहा बीजेपी सांसद ने
सरकार का दावा है कि श्रमिकों का किराया राज्य सरकार वहन करेगी। हालांकि टिकट के लिए श्रमिकों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। बात चीत में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि किराया किसने वसूला। मजदूर सिर्फ इतना बता पाए कि जहां रजिस्ट्रेशन कराए वहीं पर टिकट का पैसा वसूला गया। जो श्रमिक बस्ती पहुंचे, उन्हें बस के जरिये गंतव्य तक नि:शुल्क भेजा गया। इसके लिए निगम 64 बसों के लगाई गईं थी। वहीं, जब सांसद हरीश द्विवेदी से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि किसी से कोई पैसा नहीं लिया जा रहा है। रेल मंत्रालय 85 प्रतिशत और 15 प्रतिशत राज्य सरकारें टिकट पर खर्च कर रही है।
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