कौन है मोइनुद्दीन, जिन्होंने वकालत छोड़ शुरू की फूलों की खेती, लाखों में टर्नओवर

कौन है मोइनुद्दीन, जिन्होंने वकालत छोड़ शुरू की फूलों की खेती, लाखों में टर्नओवर

बाराबंकी, 02 जून: लखनऊ से दिल्ली तक के बाजार बाराबंकी जिले के फूलों से महकते और गुलजार रहते हैं। इन फूलों की खेती करने वाले किसान का नाम है मोइनुद्दीन। मोइनुद्दीन ने बागबानी मिशन के तहत मिले अनुदान की मदद और खेती के हुनर से खुद के साथ जिले के सैकड़ों किसानों की जिंदगी भी बदल दी। बता दें कि मोइनुद्दीन देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सम्मानित हो चुके हैं। आइए जानते है मोइनुद्दीन के बारे में।

कौन है मोइनुद्दीन

कौन है मोइनुद्दीन

मोइनुद्दीन, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के देफदार पुरवा गांव के रहने वाले है। लखनऊ से एलएलबी पास करने के बाद मोइनुद्दीन का मन वकालत में नहीं लगा। इसलिए वह वकालत की प्रैक्टिस बीम में छोड़कर अपने पुश्तैनी गांव आ गए। मोइनुद्दीन ने यहां परम्परागत खेती छोड़कर फूलों की खेती शुरू कर दी। मोइनुद्दीन की मानें तो उन्हें शुरुआत में ग्लेडियोलस फूलों की खेती शुरू की थी। ग्लेडियोलस विदेशी फूल है, जो उन्होंने एक बीघा में लगाया था। इससे मिले अच्छे मुनाफे ने बाकी किसानों का ध्यान भी इस खेती की ओर खींचा।

अच्छी आमदनी ने बढ़ाया किसानों का हौसला

अच्छी आमदनी ने बढ़ाया किसानों का हौसला

मोईनुद्दीन से सलाह और मार्गदर्शन लेकर गांव के कुछ किसानों ने भी इस खेती में अपना हाथ आजमाया और अच्छी आय ने उनका हौसला बढ़ाया। आज हालात यह है कि गांव के अधिकतर किसान फूलों की खेती करने लगे है, जिसके चलते इस गांव को फूलों की खेती वाले गांव के नाम से भी जाना जाता है। बता दें कि मोइनुद्दीन यही नहीं रुके, उन्होंने उद्यान विभाग से सरकारी सब्सिडी लेकर हॉलैंड के विदेशी फूल जरबेरा की खेती के लिए साल 2009 में यूपी में पहला पाली हाउस लगवाया। आज इस खेती में उन्हें काफी अच्छा मुनाफा मिल रहा है।

90 लाख है सालाना टर्न ओवर

90 लाख है सालाना टर्न ओवर

मोइनुद्दीन के करीब एक एकड़ में बने इस पाली हाउस और 50 बीघा ग्लेडियोलस के फूलों की खेती से सालाना टर्न ओवर 90 लाख के आसपास का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोइनुद्दीन के फूल को दिल्ली तक पहुंचाने के लिए भारतीय रेलवे ने फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का 10 मिनट का स्पेशल स्टॉपेज कर दिया है, जिसे उनके साथ गांव के बाकी किसानों का फूल भी दिल्ली पहुंच सके। वहीं, फूलों की खेती से कामयाबी मिलने के बाद उन्होंने प्रदेश सरकार से मिले अनुदान की मदद से एक कोल्ड स्टोरेजे भी लगा लिया है।

ऐसे होता है मोटा मुनाफा

ऐसे होता है मोटा मुनाफा

मोइनुद्दीन की मानें तो ग्लेडियोलस फूलों की खेती एक बीघे से शुरू की, जिसमे लागत लगभग 40 हज़ार रुपए आई थी। ये फूल साल में एक बार ही होते है और 5 महीने में तैयार हो जाते हैं। बताया कि इस फूल की खेती में मुनाफा दुगना हुआ था। वही, जरबेरा का पोली हाउस एक बीघे में लगाने की लागत लगभग 15 लाख रुपए आती है जिसमे आधा पैसा बतौर सब्सिडी वापस हो जाता है। जरबेरा के फूल साल भर निकलते हैं और एक बीघे में लगभग 5 लाख तक साल में मुनाफा होता है।

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