Barabanki news: मूँगफली समझकर खाया जेट्रोफा का फल, दर्जन भर बच्चों और महिलाओं की हालत बिगड़ी

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक जंगली पौधे के बीज खाने से करीब दर्जन भर लोग बीमार हो गए। खेत मे बथुआ बीनने गए बच्चों और महिलाओं ने मूंगफली समझकर जेट्रोफा का फल खा लिया। जिसके बाद इनकी तबियत बिगड़ने लगी और इसकी जानकारी जब परिजनों को हुई तो आनन-फानन में बच्चों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जिस पौधे के बीज को खाने से इन सभी की तबियत बिगड़ी है, उसे जेट्रोफा के नाम से जाना जाता है। देश में पहले जेट्रोफा को जंगली अरण्डी के नाम से जाना जाता था। इसकी उपयोगिता एवं महत्व की जानकारी के अभाव में इसकी व्यापारिक तौर पर खेती नहीं की जा रही थी। परन्तु विगत वर्षो से इसका उपयोग बायोडीजल के रूप में होने के कारण यह केरोसिन तेल, डीजल, कोयला, जलौनी लकड़ी के विकल्प के रूप में उभरा है

मूंगफली समझकर खा लिया जेट्रोफा

मूंगफली समझकर खा लिया जेट्रोफा

दरअसल, पूरा मामला उत्तर प्रदेश के बाराबंकी ज़िले में जैदपुर थाना छेत्र के चंदौली गांव का है। यहाँ कुछ बच्चे और महिलाऐं खेत मे बथुआ बीनने गए गए हुए थे। इसी दौरान उन्होंने जेट्रोफा के फल को मूंगफली समझकर खा लिया। बता दें की जेट्रोफा के बीज में जहरीला पदार्थ पाया जाता है। जिसके चलते कुछ ही देर में सभी को दस्त और उलटी आने लगे। जब गाओ में कई लोगों की एकसाथ तबियत ख़राब हुई तो गांव में हड़कंप मच गया। आनन फानन में परिजनों ने बीमार बच्चों और महिलाओं को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जिला अस्पताल में भर्ती सभी लोगों के स्वास्थ्य में सुधार बताया जा रहा है फिलहाल अभी भी सभी का इलाज चल रहा है।
असल में यह पिछले एक हफ्ते में दूसरा मामला ऐसा सामने आया है जिसमे जेट्रोफा के पौधे को खाने से लोग बीमार हुए हैं। 21 नवंबर को ऐसा ही एक मामला हाथरस से सामने आया था जिसमे जेट्रोफा के बीज खाने से 7 बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। बच्चों ने खेल-खेल में जेट्रोफा के बीज खा लिए थे, हालाँकि इलाज के बाद सभी की तबियत बिलकुल ठीक हो गई थी।

जेट्रोफा के बीज में जहरीला पदार्थ पाया जाता है

जेट्रोफा के बीज में जहरीला पदार्थ पाया जाता है

भारत में गांवों, खेतों, पगडंडियों और सड़कों के किनारे सहज रूप से जेट्रोफा के पौधे उपलब्ध हो जाते हैं। ऐसे में इसके बीज से उत्पन्न गंभीर स्थिति से अंजान रहना काफी खतरनाक हो सकता है। जेट्रोफा के बीज में कुछ मात्रा में जहरीला पदार्थ पाया जाता है। इसे खाने से यह पदार्थ व्यक्ति में नशा पैदा करता है। ज्यादा सेवन करने से व्यक्ति बेहोशी की हालत में पहुंच जाता है। जेट्रोफा के बीज खाने की जानकारी होते ही पीड़ित व्यक्ति को शीघ्र अस्पताल ले जाना चाहिए, जिससे उसका समय से उपचार हो सके क्योंकि ज्यादा देर करना व्यक्ति के लिए घातक हो सकता है। तत्काल उपचार के उपाय के संबंध डॉक्टरों का कहना है कि पीड़ित व्यक्ति अगर बेहोश नहीं है तो उल्टी कराने के लिए नमक-पानी का घोल दिया जा सकता है। लेकिन यह ध्यान रहे कि यह घोल बेहोशी की हालत में कभी न दें। उन्होंने बताया कि उल्टी के जरिए जेट्रोफा के असर को कम कराया जाता है।

जेट्रोफा बायोडीजल पेट्रोलियम ईधन का विकल्प

जेट्रोफा बायोडीजल पेट्रोलियम ईधन का विकल्प

किसी भी पुन: नवीनीकरण योग्य जैव पुंज (रिन्यूवेबिल बायोमास) से तैयार ऐसा वनस्पति तेल जो पेट्रोलियम ईधन का विकल्प हो सकें, जैव डीजल कहलाता है। वास्तव में वनस्पतिक तालों को ईंधन के रूप में प्रयोग करने की अवधारणा कोई नयी नहीं है। डीजल ईंजन के आविष्कारक रुडोल्फ डीजल ने सन 1895 में वानस्पतिक तेल से चलने वाला पहला इंजन बनाया था। आज जेट्रोफा के बीजों से तैयार बायो डीजल इंजनों की बनावट में बिना किसी परिवर्तन के प्रयोग किया जाने लगा है। अमरीका व यूरोपियन देशों में 10-20 प्रतिशत बायोडीजल, पेट्रोलियम डीजल के साथ मिलाकर प्रयोग किया जा रहा है। भारतीय रेल ने दिल्ली से अमृतसर के बीच में जेट्रोफा बायोडीजल (5 प्रतिशत मिश्रित) डीजल तेल से शताब्दी एक्सप्रेस चलाकर तथा महिंद्रा एंड महिंद्रा कम्पनी ने अपने ट्रेक्टरों में बायोडीजल का प्रयोग सफलता पूर्वक परिक्षण करके दिखलाया है। दसवी योजना के अंत तक पेट्रोडीजल की मांग 52.33 मिलियन टन तक हो सकती है। यदि इस अवधि तक 5 प्रतिशत पेट्रो डीजल को जैविक डीजल में बदलना है तो उसके लिए 2.29 मिलियन हैक्टेयर जमीन पर जेट्रोफा का बीज उगाकर तेल निकालने की आवश्यकता है।

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