धारदार हथियार लेकर कर्नाटक के चर्च में घुसा शख्स, पादरी ने भागकर बचाई जान, सीसीटीवी में कैद हुई घटना
कर्नाटक के बेलगावी स्थित एक चर्च में शनिवार को एक व्यक्ति धारदार हथियार लेकर घुस गया। इससे वहां हड़कंप मच गया। यह पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई।
बेंगलुरु, 12 दिसंबर। कर्नाटक के बेलगावी स्थित एक चर्च में शनिवार को एक व्यक्ति धारदार हथियार लेकर घुस गया। इससे वहां हड़कंप मच गया। यह पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई। फुटेज में चर्च के प्रभारी फादर फ्रांसिस डिसूजा का पीछा करते हुए वह व्यक्ति हाथ में छुरा लिए हुए दिखाई दे रहा है। उसे देखते ही पुजारी वहां से भाग जाते हैं।

हथियारबंद व्यक्ति कुछ देर तक उनका पीछा करता है, लेकिन बाद में भाग जाता है। वह अपने साथ एक तार भी ले जाते हुए दिखाई दे रहा है, हालांकि वह तार क्यों ले गया यह स्पष्ट नहीं है। यह घटना बेलगावी में शीतकालीन सत्र के लिए विधानसभा की बैठक से एक दिन पहले की है। धर्म परिवर्तन के खिलाफ एक विधेयक, जिसका विपक्ष और ईसाई संगठनों ने विरोध किया है, इस सत्र में विधानसभा में पेश किया जाना है। रविवार की इस घटना के बारे में पुलिस शिकायत के बाद, चर्च को सुरक्षा प्रदान की गई है और पुलिस द्वारा जांच शुरू कर दी गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि चर्च के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया गया है। हमारे पास सीसीटीवी फुटेज है। जांच जारी है।
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वहीं बंगलौर के आर्चडायसी के प्रवक्ता जे ए कंथराज ने इस घटना को खतरनाक और परेशान करने वाला घटनाक्रम करार दिया है। इस साल सितंबर में, 30 हिंदू धर्मगुरुओं के साथ एक बैठक के बाद, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज एस बोम्मई ने कहा था कि राज्य में जल्द ही धर्मांतरण के खिलाफ एक कानून लाया जाएगा और सरकार कानून बनाने के लिए अन्य राज्यों में ऐसे कानूनों पर विचार कर रही है। हालांकि विपक्षी कांग्रेस ने इस कदम का विरोध किया है। राज्य के पार्टी प्रमुख डी के शिवकुमार ने आरोप लगाया है कि कानून का उद्देश्य ईसाइयों को निशाना बनाना है।
यह राज्य में निवेश के रास्ते में बाधा बनेगा। इस कदम का विरोध करते हुए बेंगलुरु के आर्कबिशप पीटर मचाडो ने सीएम बोम्मई को पत्र लिखा है और इस कानून को बढ़ावा न देने का आग्रह किया है। उन्होंने लिखा- कर्नाटक में पूरा ईसाई समुदाय एक साथ धर्मांतरण विरोधी विधेयक के प्रस्ताव का विरोध करता है। संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला देते हुए, आर्कबिशप ने कहा कि इस तरह के कानूनों को लागू करने से नागरिकों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन होगा।












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