Exclusive: मेरा पहला काम सेना के लिए हर बाधा को दूर करना है: मनोहर पार्रिकर

बैंगलुरु। लगातार 13 घंटों की मीटिंग, सुविधाओं की जांच, बीच-बीच में उत्साहवर्धक भाषण, अधिकारियों को ध्यानपूर्व सुनना, आमंत्रण और फोटो सेशन के बीच मुस्कान भरा चेहरा। ऐसे व्यक्तित्व शायद ही आपने कभी देश के रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर का देखा होगा। पार्रिकर व्यस्त थे। एक कार्यक्रम से दूसरे कार्यक्रम में जाने की जल्दी थी। उन्हें अगले कार्यक्रम में 8 बजे पहुंचना था। उन्होंने अपने अधिकारी से बस इतना कहा कि जब वक्त हो जाएं तो बता दें। उन्होंने कलाई पर बंधी अपनी घड़ी की ओर देखी उसमें 7:40 मिनट हो रहा था। उन्होंने अपना चश्मा चढ़ाया और कहा कि आप अपना सवाल शुरु करें मैं आपको सुन रहा हूं। रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर ने वनइंडिया के साथ बातचीत में हर सवाल को तसल्ली से सुना और बड़े आराम से सभी सवालों का जवाब दिया।

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तेजस को लेकर इंडियन एयरफोर्स उत्सुक हैं

दिनभर तेजस को लेकर प्रजेंटेंशन, दस्तावेजों का आदान-प्रदान और एचएएल द्वारा बनाए गए तेजस को भारतीय वायुसेना को सौंपने के बाद भारत के रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर अब तेजस की पूरी सीरीज भारतीय वायुसेना के जत्थे में शामिल करना चाहते हैं। भारत के रक्षामंत्री तेजस फाइटर जेट को वायुसेना में शामिल कर उत्साहित है। तेजस के वायुसेना में शामिल होने के बाद भारतीय वायुसेना में नया सितारा जड़ जाएगा। तेजस भारत का इन हाउस प्रोजेक्ट है। रक्षामंत्री के मुताबिक तेजस एक उत्कृष्ट एयरक्राफ्ट है, लेकिन हमें इसमें और विकास करने की जरुरत है। वायुसेना को ये एयरक्राफ्ट वक्त पर मिलना चाहिए ताकि वो इसका जत्था वक्त पर तैयार कर सके। पार्रिकर ने कहा कि इस एयरक्राफ्ट के पीछे बहुत ही मेहनत की गई है। और भविष्य में तेजस की उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।

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मनोहर पार्रिकर ने कहा कि कुछ मुद्दे हैं जिसे मिलकर सुलझा लिया जाएगा। रक्षामंत्री ने कहा कि मैं तेजस की उड़ान क्षमता से प्रभावित हूं। उन्होंने कहा कि मैंने अब तक सिर्प तेजस के बारे में सुना था, लेकिन आज उसे करीब से देखा भी। उन्होंने कहा कि वायुसेना के पास जल्द से जल्द तेजस का जत्था होगा। उन्होंने कहा कि तेजस एमके-2 प्रोजेक्ट भी ट्रैक पर है और हिस्सेदारी दारक इसके लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए बैठकों का दौर जारी है और हम हर संभव मदद करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मेरा पहला कर्तत्व भारतीय सेना की राह से सभी बाधाओं को दूर करना है।

मेरा काम सेना की हर बाधा दूर करना है

रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने कहा कि बतौर रक्षामंत्री मेरा पहला कर्तत्व भारतीय सेना की राह से बाधाओं को दूर करना हैं। ये वक्त है कि जब देश को जरुरतों के लिए उसे इंतजार न करना पड़े। हमें वक्त से पहले सेना के पास उन की जरुरतों को पहुंचाना है। मेरा कर्तत्व है कि मैं सेना को सही दिशा में ले जाउं। रक्षामंत्री पार्रिकर ने इंटरव्यू के दौरान डीआरडीओ के प्रमुख डॉ. अविनाश चंद्रा के विवाद मसले पर कोई चर्चा नहीं की। तय समय पर सेना की जरुरतों को लेकर पार्रिकर ने कहा कि ये उनका काम है कि सेना की जरुरत वक्त से पहले पूरा की जाएं।

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सेना को उत्साह की जरुरत

सेना के उत्साह पर पूछे गए सवाल पर रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर ने कहा कि हमारी सेना को वक्त-वक्त पर प्रोत्साहन की जरुरत है। उन्होंने कहा कि ये लगातार होना चाहिए। ये मेरा मकसद है। बतौर रक्षामंत्री पार्रिकर ने कहा कि मेरा मुख्य उद्देशय है कि हमरी सेना बिना भय के देश की सेवा करें। पार्रिकर ने कहा कि हमारी सेना की जरुरतों का ध्यान रखना मेरा मुख्य काम हैं। पार्रिकर ने सेना के परिवारों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारा काम सेना के जवानों के परिवारवालों की सुरक्षा और उनकी देखभाल भी हैं। उनके परिवारवाले सुखी रहे ये देखना भी हमारा काम है।

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मुझे पब्लिसिटी की जरुरत नहीं

जब तक हमने ये सवाल उनसे पूछा तब तक घड़ी में 7:55 मिनट बज चुके थे। कमरे में एक सीनियर अधिकारी ने आकर हमें याद दिलाया। पार्रिकर ने जाते-जाते कहा कि मुझे किसी ब्रांडिंग की जरुरत नहीं हैं। मेरा पास काम है। मुझे काम करना है ऐसे में मुझे किसी भी ब्रांडिंग की जरुरत नहीं है। मुझे किसी पब्लिसिटी की जरुरत नहीं। अगर मेरी फोर्स खुश है तो यहीं मेरी सबसे बड़ी ब्रांडिंग होगी।

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