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प्रसिद्ध मंदिर में चढ़ाए गए नारियल की हुई नीलामी, फल विक्रेता ने नारियल पाने के लिए अदा किए इतने लाख रुपए

लोगों की आस्था और विश्वास का भी जवाब नहीं। फिर चाहे वो भगवान का कोई प्रसिद्ध मंदिर हो या फिर सड़क पर पड़ा हुआ पत्थर, अगर इंसान की उसमें आस्था जग जाए तो वह उसके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाता है।

बैंगलोर, 12 सितंबर। लोगों की आस्था और विश्वास का भी जवाब नहीं। फिर चाहे वो भगवान का कोई प्रसिद्ध मंदिर हो या फिर सड़क पर पड़ा हुआ पत्थर, अगर इंसान की उसमें आस्था जग जाए तो वह उसके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाता है। विदेशों का तो पता नहीं, लेकिन भारत में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं। ताजा मामला कर्नाटक का है। जहां एक फल विक्रेता ने, जी हां फल बेचने वाले ने 12वीं सदी के एक मंदिर में भगवान मलिंगराय को चढ़ाए गए नारियल को प्राप्त करने के लिए साढ़े छ: लाख रुपए खर्च कर दिये। आस्था के आगे उसने पैसों की कोई कीमत नहीं समझी।

नारियल की लगी थी बोली

नारियल की लगी थी बोली

कर्नाटक के बागलकोट जिले के जमाखंडी के चिक्कलकी गांव में 12वीं शताब्दी का भगवान मलिंगराय का मंदिर है। इस नारियल को इसी मंदिर में भगवान मलिंगराय को चढ़ाया गया था। भगवान पर चढ़ाने के बाद मंदिर कमेटी ने श्री बीलिंगेश्वर मेले के अंतिम दिन इस नारियल की बोली लगाई। बोली लगाने वालों में कई श्रद्धालु शामिल थे। तभी एक व्यक्ति ने बोली लगाई साढ़े छ: लाख रुपए। नारियल के लिए इतनी मोटी रकम सुनकर सभी के कान खड़े हो गए। कोई भी इस बोली के आस-पास भी नहीं पहुंच सका। इस बोली लगाने वाले का नाम था महावीर हराके, जो विजयपुरा जिले में एक फल विक्रेता हैं।
भगवान मलिंगराय को शिव के नंदी का अवतार माना जाता है और उनके गददू में रखे इस नारियल की काफी मान्यता है। ऐसा माना जाता है कि जो भी व्यक्ति इस नारियल को प्राप्त कर लेता है उसका भाग्य चमक जाता है।

कभी 10 हजार से ऊपर नहीं लगी बोली

कभी 10 हजार से ऊपर नहीं लगी बोली

खबरों की मानें तो मंदिर कमेटी काफी समय से इस नारियल की बोली लगाती रही है, लेकिन पहले कभी भी बोली 10 हजार से ऊपर नहीं पहुंची। हालांकि इस बार बोली ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये। नारियल के लिए बोली लगने की शुरुआत 1 हजार रुपए से शुरू हुई थी, जल्द ही यह 1 लाख के आंकड़े को पार कर गई। इसके बाद एक श्रद्धालु ने 3 लाख की बोली लगाई। मंदिर कमेटी को अब ऐसा लगने लगा था कि बोली इससे ऊपर नहीं जाएगी। लेकिन महावीर का इरादा कुछ और ही था, उन्होंने बोली की राशि को दोगुना बढ़ाकर साढ़े छ: लाख कर दिया।
मंदिर कमेटी ने कहा कि इस पैसे का उपयोग मंदिर के विकास और धार्मिक कामों के लिए होगा।

इस वजह से महावीर ने लगाई सबसे अधिक बोली

इस वजह से महावीर ने लगाई सबसे अधिक बोली

बोली जीतने वाले फल विक्रेता महावीर से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भले ही उनके इस निर्णय को पागलपन और अंधविश्वास कहा जा सकता है, लेकिन उनके लिए यह भक्ति और विश्वास का मामला था। भगवान मलिंगराय पर अपनी अटूट आस्था के बारे में महावीर ने बताया कि जब वह गंभीर शारीरिक और आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे थे, तब उन्होंने भगवान मलिंगराय से प्रार्थना की थी और कुछ ही दिनों में सब कुछ बदल गया। महावीर ने कहा कि वह नारियल को अपने घर में रखेंगे और उसकी रोज पूजा करेंगे।

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