यूपी का लाल न करता ये काम तो पानी के लिए तरसते रह जाते लोग
यूपी में कर्नाटक कॉडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुराग तिवारी का शव मिला था। अनुराग तिवारी ने कर्नाटक के बीडर में उन्होंने पानी के हालात बहुत ही सुधार दिए थे।
लखनऊ। कर्नाटक कैडेर के अधिकारी अनुराग तिवारी की मौत राज्य के बीडर के लिए चौंकाने वाली रही। अनुराग, बीडर के डिप्टी कमिश्नर थे और डेढ़ साल से भी कम वक्त के समय में जिन्होंने उनके साथ काम किया था सभी उनके प्रयासों की सराहना करते नहीं थक रहे हैं।
दरअसल, अनुराग ने इलाके के लिए पानी का पानी मुहैया कराने के लिए बहुत काम किया था।

अनुराग ने सूखे जिले को जल से कर दिया परिपूर्ण
उत्तर प्रदेश निवासी अनुराग ने ने हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र जिले के लिए पारंपरिक जल स्रोतों को फिर से जीवंत और पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया शुरू की। अनुराग की वजह से जिले के कई हिस्सों में आज तक पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति है।
अनुराग को सुरंग बावी की कवायद शुरू करने की प्रक्रिया का श्रेय दिया जाता है, जो कि मध्ययुगीन युग के लिए एक भूमिगत जलसेतु है।

जब खुलवाए टैंक और कुएं
साल 2016 में जब बिडर दशकों में सबसे खराब सूखे का सामना कर रहा था, अनुराग ने बिडर के डिप्टी कमिश्नर के रूप में 240 टैंकों और कुएं खुलाने की प्रक्रिया शुरु की थी। यह प्रक्रिया कुछ महीनों में पूरी हो चुकी थी और जब मानसून प्रभावित हुआ, तो ये परंपरागत जल निकायों को वर्ष भर के नागरिकों के लिए ताजा पानी सुनिश्चित करने के लिए भरे गए थे।

ये भी थी अनुराद की उपलब्धि
500 साल पुराने कुंए जजा की बाड़ी का पुनरुद्धार, एनजीओ के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, जिसमें अनुराग तिवारी ने भी काम किया था। बता दें कि जजा की बाड़ी सूख गई था और कचरे से भर गई था। अनुराग की मेहनत और एनजीओ की मदद से वह साफ हो गया था और अब बिडर के लोगों के लिए स्वच्छ पेय जल का एक स्रोत है।

औरड़ जिले में मिली सफलता
इतना ही नहीं जल निकायों को पुनर्जीवित करने में किसानों की मदद करने के लिए जिला प्रशासन ने किसानों को अपने खेतों में मिट्टी का इस्तेमाल करने की अनुमति दी। औरड़ जिले में यह एक बड़ी सफलता थी और इसी ने कर्नाटक सरकार को कीरे संजीवनी योजना शुरू करने के लिए प्रेरित किया था जिसका उद्देश्य टैंकों और छोटे जल निकायों को साफ करना था।
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