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Baghpat Property Sale: परवेज मुशर्रफ की पारिवारिक जमीन किसने खरीदी? इनको मिला मालिकाना हक

Baghpat property sale: बागपत जिले के बड़ौत कस्बे में एक ऐतिहासिक ज़मीन सौदे ने सुर्खियां बटोरी हैं। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ के परिवार की जिस ज़मीन पर दशकों से विवाद छाया हुआ था। अब उसका मालिकाना हक पूरी तरह बदल गया है। करीब 13 बीघा कृषि भूमि जिसे शत्रु संपत्ति घोषित किया गया था।

अब बड़ौत के पंकज ठेकेदार मनोज गोयल और गाजियाबाद की जेके स्टील के नाम हो गई है। इस ज़मीन की कीमत करीब 1.38 करोड़ रुपये आंकी गई और इसकी नीलामी भारत सरकार के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय, लखनऊ द्वारा की गई।

Baghpat property sale pervez musharraf

शनिवार को कार्यालय के पर्यवेक्षक प्रशांत सैनी की मौजूदगी में बड़ौत तहसील में बैनामे की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रकिया पूरी हो जाने के बाद अब इस जमीन का कानूनी रूप से स्वामित्व नया हो गया है।

यह ज़मीन बड़ौत के कोताना गांव में स्थित है, जहां परवेज मुशर्रफ के पूर्वज रहा करते थे। परिवार 1943 में दिल्ली और फिर 1947 के बंटवारे के समय पाकिस्तान चला गया था। इसके बावजूद, गांव में मौजूद उनकी संपत्तियों की पहचान मुशर्रफ परिवार से ही होती रही।

दशकों पुरानी विरासत का कानूनी अंत

शत्रु संपत्ति घोषित की जा चुकी इस ज़मीन का मालिकाना हक कई वर्षों तक कानूनी कशमकश में फंसा रहा। हालांकि, परवेज मुशर्रफ की व्यक्तिगत जमीन पहले ही बेची जा चुकी थी। लेकिन उनके भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ और परिवार के नाम की ज़मीन को पंद्रह साल पहले शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया था।

सितंबर 2024 में लखनऊ स्थित शत्रु संपत्ति कार्यालय ने इस संपत्ति की नीलामी प्रक्रिया शुरू की। भूमि की स्थिति अलग-अलग खसरा नंबरों में दर्ज थी, इसलिए अलग-अलग हिस्सों की बोली लगाई गई, जो सफलतापूर्वक पूरी हुई।

नीलामी में भाग लेने वाली तीनों फर्मों - पंकज ठेकेदार, मनोज गोयल और जेके स्टील - ने पूरी धनराशि सरकार को जमा करा दी थी। बैनामा प्रक्रिया पूरी होते ही उनके नाम रिकॉर्ड में दर्ज करने की औपचारिकता भी शुरू हो गई है।

इस कदम के साथ ही मुशर्रफ परिवार की कोताना स्थित ज़मीन से कानूनी और प्रशासनिक रूप से नाम पूरी तरह हट चुका है। यह भारत सरकार द्वारा शत्रु संपत्तियों के बेहतर उपयोग और पुनर्वितरण की दिशा में एक और ठोस कदम माना जा रहा है।

कोताना की और संपत्तियां भी नीलामी की कतार में

कोताना में केवल बांगर की ज़मीन की नीलामी हुई है, जबकि खादर की संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया अब भी शेष है। जल्द ही खादर की शत्रु संपत्ति का मूल्यांकन कर नीलामी की नई तारीखें घोषित की जाएंगी।

संपत्ति के आधार मूल्य निर्धारण के लिए सर्वे का कार्य भी शीघ्र शुरू होने वाला है। स्थानीय प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि बाकी संपत्तियों को भी इसी पारदर्शी प्रक्रिया के तहत बेचा जाएगा।

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