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नाइजीरिया: देश के हालात बदलने में कितने सफल रहे बुहारी

नाइजीरिया के राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी

वर्ष 2015 में मुहम्मदु बुहारी ने राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित होकर इतिहास रचा था. यह पहला मौका था जब विपक्षी पार्टी के किसी उम्मीदवार ने शांतिपूर्वक सत्ता संभाली थी. दरअसल, 1983 में पूर्व जनरल मुहम्मदु बुहारी ने बलपूर्वक सत्ता हासिल की थी. हालांकि, दो साल के अंदर ही तख्तापलट कर उन्हें उस समय सत्ता से बेदखल कर दिया गया था. इसके बाद वे दोबारा 2015 में चुनाव जीतकर राष्ट्रपति बने और देश की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कई वादे किए.

बुहारी उस समय सत्ता में आए जब देश में बदलाव की सख्त जरूरत थी. अपहरण और बम विस्फोट की घटनाएं आम हो गई थीं. इसके लिए इस्लामवादी समूह बोको हराम को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जिसका पूर्वोत्तर नाइजीरिया के बड़े हिस्से पर नियंत्रण था.

नाइजीरिया में आत्मघाती हमलों का दौर भी शुरू हो गया था. ऐसा ही एक हमला जुलाई 2014 में देश के उत्तरी इलाके में मौजूद कडुना शहर में हुआ था. इस हमले में बुहारी को निशाना बनाया गया था. उस समय वे विपक्ष में थे. बुहारी इस हमले में बच गए, लेकिन दर्जनों लोग मारे गए थे. डीडब्ल्यू के साथ साक्षात्कार में राजनीतिक विश्लेषक कामिलू सानी फेग ने बताया कि उस दौर में हिंसक घटनाएं चरम पर थीं. बुहारी इस क्रूरता को समाप्त करना चाहते थे.

बोको हराम के बाद का संकट

बुहारी का राष्ट्रपति पद का कार्यकाल समाप्त होने वाला है , लेकिन नाइजीरिया आज भी कई समस्याओं से जूझ रहा है. कडुना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तुकुर अब्दुलकादिर कहते हैं कि अगर राष्ट्रपति के तौर पर बुहारी की उपलब्धियों की समीक्षा करनी है, तो हमें तीन मुख्य समस्याओं की स्थिति की पड़ताल करनी होगी जिनसे निजात दिलाने का उन्होंने वादा किया था. ये समस्याएं हैं असुरक्षा, अर्थव्यवस्था और भ्रष्टाचार.

तुकुर ने डीडब्ल्यू को बताया कि सुरक्षा को लेकर उन्होंने कुछ बेहतर काम किए हैं. वह कहते हैं, "2015 में देश के पूर्वोत्तर हिस्से खासकर अदमावा, योबे और बोर्नो राज्य बोको हराम विद्रोहियों के नियंत्रण में थे. डर और भय की वजह से लाखों लोगों ने उस क्षेत्र से पलायन किया था. आज 2023 में उनमें से दसियों हजार लोग वापस अपने घर लौट आए हैं. बोको हराम उत्तरी नाइजीरिया के अधिकांश हिस्सों से भाग रहा है."

तुकुर आगे बताते हैं कि जब लोग बुहारी की उपलब्धियों का जश्न मना रहे थे, तब देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में पहले से ज्यादा विनाशकारी और डरावनी घटनाएं शुरू हो चुकी थीं. विद्रोहियों ने अब फिर से गांवों पर अपना नियंत्रण कर लिया है. हजारों लोग डर और हिंसा की वजह से अपना घर छोड़कर भाग गए हैं. बुहारी इस मामले से निपटने में पूरी तरह विफल रहे हैं.

वह कहते हैं, "लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि जब बुहारी पूर्वोत्तर हिस्से में बोको हराम से निपट सकते हैं, तो उनकी सरकार और सुरक्षा एजेंसियां उत्तर-पश्चिमी हिस्से में डकैती की समस्या से क्यों नहीं निपट रही हैं."

आर्थिक हालात नहीं बदले

नौकरियां पैदा करना और अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाना 2015 में बुहारी के वादों में से एक था, लेकिन मौजूदा स्थिति यह बयां कर रही है कि पढ़ाई पूरी होने के बाद नाइजीरिया के युवाओं के लिए नौकरी या काम के अवसर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं. इससे स्थिति और खराब हो रही है.

आखिर बुहारी के इस वादे का क्या हुआ? लागोस में रहने वाले वित्तीय सलाहकार शुआइबू इदरिस ने डीडब्ल्यू को बताया कि आंकड़ों से यह साफ तौर पर पता चलता है कि स्थिति और कितनी ज्यादा खराब हुई है. उन्होंने कहा, "जब राष्ट्रपति बुहारी ने सत्ता संभाली थी, तब महंगाई दर 12 से 13 फीसदी थी. आज यह दर 21 से 22 फीसदी है. क्या हम अब भी यह कह सकते हैं कि उन्होंने अच्छा काम किया है? इसका स्पष्ट जवाब है, नहीं."

उन्होंने बताया कि इसी तरह देश की मुद्रा नाइरा की कीमत अपने निम्न स्तर पर पहुंच चुकी है . देश के ऊपर कर्ज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है. बेरोजगारी के आंकड़े भी चिंताजनक हालात बयां कर रहे हैं. आखिर इन समस्याओं से निपटने के लिए बुहारी की सरकार ने क्या किया?

इदरिस ने बताया कि सरकार ने कुछ शर्तों के साथ लोगों को नगद पैसे उनके खाते में ट्रांसफर किए और किसानों को कर्ज देने की नीतियों में बदलाव किया, लेकिन इनसे आर्थिक हालात बेहतर नहीं होते हैं. रोजगार पैदा नहीं होता है.

उन्होंने कहा, "बुहारी ने कई नीतियां लागू कीं, लेकिन बेहतर तरीके से उन्हें क्रियान्वित नहीं किया. इसका हश्र उसी तरह हुआ जैसे आईटी की भाषा में कहा जाता है कि गलत इनपुट देने से गलत नतीजा मिला."

भ्रष्टाचार और नए नोट

बुहारी ने वादा किया था कि वे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कडुना के राजनीतिक विश्लेषक तुकुर ने कहा, "हमने सरकारी अधिकारियों के बीच बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार देखा है. ये ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें या तो राष्ट्रपति बुहारी ने या उनकी सरकार के अहम सदस्यों ने चुना और नियुक्त किया था."

बुहारी के कार्यकाल में केंद्रीय बैंक ने नोटबंदी लागू करने का फैसला किया. नाइरा के पुराने नोट हटाकर नया नोट प्रचलन में लाया गया, लेकिन इससे भी स्थिति बेहतर नहीं हुई है. वित्तीय विशेषज्ञ शुआइबू इदरिस कहते हैं, "नए नोट प्रचलन में लाने का उद्देश्य भ्रष्टाचार को समाप्त करना है, ताकि जिन लोगों ने गलत तरीके से पैसे जमा किए हैं वे बेकार हो जाएं. इसका मतलब है कि सरकार खुद यह मान रही है कि वह भ्रष्टाचार से निपटने में विफल हो गई है."

बुहारी के कार्यकाल में केंद्रीय बैंक ने नोटबंदी लागू करने का फैसला किया

इदरिस कहते हैं कि कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने और भ्रष्टाचार खत्म करने के उद्देश्य से लिए गए इस फैसले से पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया है. यह माहौल सिर्फ इस नीति को लागू करने की वजह से नहीं बना है, बल्कि चुनाव के समय जिस तरीके से इसे लागू किया गया है वह भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है.

बुनियादी ढांचे के अभाव में लोगों को अपने पैसे निकालने के लिए एटीएम के सामने घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है. मोबाइल बैंकिंग सेवाएं ठप हो गई हैं. खाते में पैसे रहते हुए भी लोग भूखे सोने को विवश हैं. नाइजीरियाई अखबार 'पंच' के मुताबिक, बीते बुधवार को नई नीति का विरोध करते हुए कुल 13 लोगों की मौत हुई है.

देश में अफरा-तफरी के माहौल को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि फिलहाल सभी पुराने नोटों को प्रचलन में रखा जाए, लेकिन बुहारी ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि सिर्फ 200 मूल्य वाले पुराने नाइरा नोट अगले 60 दिनों तक प्रचलन में रहेंगे, जबकि 500 और 1,000 मूल्य वाले पुराने नाइरा नोट लीगल टेंडर से बाहर रहेंगे. उन्हें केंद्रीय बैंक और चुनिंदा केंद्रों पर जमा किया जा सकता है.

दरअसल, पुराने नोट के इस्तेमाल की अवधि 10 फरवरी तक तय की गई थी, लेकिन लोगों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने 200 मूल्य वाले पुराने नोट के इस्तेमाल की अवधि बढ़ा दी है.

शुआइबू इदरिस ने बताया कि राष्ट्रपतियों के लिए अपने फैसले पर पुनर्विचार करना एक अच्छी बात रही है और यह हर जगह हुआ है. बुहारी अपने फैसले पर पुनर्विचार क्यों नहीं कर रहे हैं? इसके जवाब में इदरिस कहते हैं, "अब उनके पास राष्ट्रपति के तौर पर बस कुछ ही महीने बचे हैं. क्या वे चाहेंगे कि नाइजीरिया के लोग उन्हें अपना फैसला वापस लेने वाले के तौर पर याद करें?"

खुद को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं बुहारी

राजनीतिक विश्लेषक तुकुर अब्दुलकादिर यह स्वीकार करते हैं कि तमाम तरह की अराजकता के बावजूद बुहारी ने कुछ अच्छी चीजें भी की हैं. उन्होंने कहा, "बुनियादी ढांचे के मामले में उन्होंने पिछले 16 वर्षों से सत्ता पर काबिज सरकार की तुलना में बेहतर काम किया है. सड़क, रेल, विमानन क्षेत्र में उन्होंने काफी अच्छा काम किया है. कई परियोजनाएं दशकों से लंबित या अधूरी थीं. अब वे या तो पूरी हो चुकी हैं या पूरी होने वाली हैं, जैसे कि उत्तरी नाइजीरिया को दक्षिणी और पूर्वी नाइजीरिया से जोड़ने वाला पुल."

बुहारी की उपलब्धि जो भी रही हो, उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि देश के लोग उनके बारे में क्या कहते हैं. राजधानी अबूजा में डॉयचे वेले के संवाददाता उवाइसु इदरिस ने कहा, "उन्हें लगता है कि उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है और उन्होंने इसे कई जगहों पर कई बार कहा है. वह बोको हराम के बारे में बात करेंगे, लेकिन पश्चिमी क्षेत्र में होने वाली डकैती के बारे में नहीं. वह अब भी इस बात पर जोर देंगे कि उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है."

नाइजीरिया में 25 फरवरी को देश का अगला राष्ट्रपति चुनने के लिए मतदान होगा. कुल 18 उम्मीदवार मैदान में हैं. देश का नेतृत्व कोई भी करे, इस बात की पूरी उम्मीद है कि उसकी कार्यशैली बुहारी सरकार से अलग होगी.

रिपोर्ट: फिलिप सैंडर

Source: DW

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