Salarpur Khalsa Tomato: पहलवानों का गांव सलारपुर खालसा कैसे बना टमाटरों का उस्ताद? सालाना कमाई ₹50 करोड़
Salarpur Khalsa Tomato Story: देश में टमाटर की बढ़ती कीमतों (Tomato Price Hike India) के बीच जानिए UP के अमरोहा जनपद के जोया विकास की ग्राम पंचायत सलारपुर खालसा के सबसे बड़ा टमाटर उत्पादक गांव बनने की कहानी।
Tomato Village Salarpur Khalsa: समय-90 का दशक। जगह-यूपी का गांव सलारपुर खालसा। पहचान-पठान पहलवानों का गांव। अब साल 2023 में नई पहचान-टमाटरों वाला गांव।
(Wrestlers Tamatar Farming Story) बीते ढाई दशक में गांव सलारपुर खालसा इतना बदला कि पहले यहां जगह-जगह अखाड़े थे। नामी पहलवान थे। कच्चे घर थे। रहन-सहन निम्न दर्जे का था। अब अखाड़ों की जमीन पर टमाटर की फसल लहलहा रही है। दंगल की बजाय टमाटर की खेती हो रही है।

पहलवानी छोड़ बन गए किसान
सलारपुर खालसा गांव में अब पहलवानों से ज्यादा टमाटर नजर आ रहे हैं। पहलवान परिवारों की भी नई पीढ़ी कुश्ती के दांव-पेंच छोड़ टमाटर की अधिक पैदावर पर जोर दे रही है। करोड़ों रुपए कमा रही है। गांव में कच्चे घरों की जगह आलिशान कोठियां बन चुकी हैं। लग्जरी गाड़ियां दस्तक दे चुकी हैं।
टमाटर के किसान का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में सलारपुर खालसा सरपंच रूबी खां के पति व 90 के दशक के नामी पहलवान दिलशाद खां के बेटे सालिम खां ने देश में टमाटर की बढ़ती कीमतों के बीच गांव सलारपुर खालसा के टमाटर उत्पादन में सिरमौर बनने की पूरी कहानी बयां की है।

सलारपुर खालसा, जोया विकास खंड अमरोहा
सालिम खां बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में अमरोहा जिला मुख्यालय से करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित गांव सलारपुर खालसा में 1990 दशक में गन्ना व धान की पैदावार करता था, मगर यहां के लोगों को खेती की बजाय पहलवानी का शौक था। धीरे-धीरे पहलवानी छूट गई और पहलवान किसान बन गए।
कभी 200 पहलवान करते थे कुश्ती
उस समय सलारपुर खालसा में दिलशाद खां का नामी अखाड़ा हुआ करता था, जिसमें सलारपुर ही नहीं बल्कि आस-पास के जाटों के गांवों से भी रोजाना करीब 200 पहलवान कुश्ती-दंगल में दांव-पेंच लगाते थे। दिलशाद के अलावा महफूज, अफसर खां व सादिक आदि नामी पहलवान हुआ करते थे।

90 फीसदी जमीन पर टमाटर की खेती
सलारपुर खालसा मुस्लिम बाहुल्य गांव है। विकास खंड में सलारपुर व हैबतपुर पठान मुस्लिमों के इकलौते गांव हैं। साढ़े 6 से 7 हजार की आबादी वाले सलारपुर खालासा गांव की जमीन का कुल रकबा 4600-4700 बीघा है। इसमें से 90 फीसदी हिस्से पर टमाटर की खेती होती है।
पड़ोसी गांव भी कर रहे टमाटर की खेती
किसान आलम खां कहते हैं कि खास बात तो यह है कि सलारपुर खालसा में टमाटर की खेती से किसानों को छप्परफोड़ कमाई तो आस-पास के 20 किलोमीटर के दायरे वाले 25 गांव भी परंपरागत खेती छोड़ टमाटर में हाथ आजमा रहे हैं। इन गांवों में हैबतपुर, लंडिया, रायपुर, गजरौला आदि गांव शामिल हैं।

200 किसान कर रहे टमाटर की खेती
टमाटरों वाली ग्राम पंचायत सलारपुर खालसा के 100 फीसदी किसान टमाटर की खेती करते हैं। गन्ने व धान की खेती नाममात्र की है। करीब 200 किसान टमाटर की खेती कर रहे हैं। यहां गर्मी ही नहीं बल्कि सर्दियों में भी टमाटर की पैदावार होती है।
रोजाना 100 क्विंटल टमाटर भेज रहा सलारपुर खालसा
सलारपुरा खालसा गांव में टमाटरों की बिक्री की मुख्य सीजन मई से जून तक रहती है। इस दौरान यहां से करीब 100 क्विंटल टमाटर 35-40 से गाड़ियों में भरकर बिकने के लिए दूसरे शहर-कस्बों में भेजा जाता है। यहां से टमाटर दिल्ली, कोलकाता, हरियाणा, हल्द्वानी समेत देशभर में जाते हैं।

सलारपुर खालसा में रोजाना बिक रहे 50 लाख के टमाटर
सालिम खां कहते हैं कि सलारपुर खालसा के किसान एक बीघा में 200 से 250 कैरेट टमाटर की पैदावार ले रहे हैं। एक कैरेट में 25 किलोग्राम टमाटर आता है। मोटा-मोटा अनुमान ये है कि सलारपुर खालसा से रोजाना 50 लाख रुपए का टमाटर बेचा जा रहा है। सालभर में टर्नओवर 50 से 60 करोड़ तक पहुंच जाता है।
सालिम खां की सालाना कमाई 35-40 लाख
खुद सालिम खां गांव सलारपुर खालसा में अपनी 70 बीघा में टमाटर की खेती करते हैं। जमीन ठेके पर भी ले रखी है। टमाटर से इनकी सालाना कमाई 35 से 40 लाख रुपए तक पहुंच जाती है। यहां पर सालिम खान के अलावा रियाज खां, बिंदू खां, गुलाम नबी खां, गामा पहलवान नामी किसान हैं।

सलारपुर खालसा के 40 युवक सरकारी जॉब में
टमाटर से कमाई बढ़ी तो यहां के लोगों का जीवन स्तर सुधरा। घर-घर में सुख-सुविधाएं बढ़ी। बच्चों को अच्छे स्कूलों में दाखिला हुआ। यहां के 40 से ज्यादा युवा सरकारी नौकरी में हैं। दो युवक बैंक मैनेजर बन गए।
एटम बम के नाम से जाने जाते थे दिलशाद खां
दिलशाद खां पूरे मंडल में सबसे तेज पहलवानी करने वालों में से एक थे। इसलिए उन्हें एटम बम भी कहा जाता था। तब ये पहलवानी के साथ-साथ गन्ना, धान व उड़द की दाल की खेती भी किया करते थे। इनकी जान-पहचान अमरोहा के रुहफ से थी, जो नासिक में टमाटरों का काम करते थे।

नासिक से लेकर आए टमाटर के पौधे
साल 1999 में रुहफ नासिक से टमाटरों की पौध लेकर आए थे और दिलाशाद के 12 बीघा खेत में लगा दिए। पहली बार में टमाटर की खेती से करीब एक लाख रुपया मुनाफा हुआ तो दूसरी साल में 25 बीघा में टमाटर की खेती की और छप्परफाड़ कमाई हुई तो गन्ना, धान व उड़द की दाल छोड़ टमाटर की खेती करने लगे। उनके इंतकाल के बाद बेटे टमाटर से कमाई कर रहे हैं।

दिलशाद की कमाई ने बढ़ाई रुचि
टमाटर से दिलशाद पहलवान की कमाई देख पूरे गांव में यह बात फैल गई कि टमाटर से बेहतरीन दूसरी खेती नहीं। फिर सलारपुर खालसा ही बल्कि हैबतपुर समेत आस-पास के कई गांवों के किसानों ने परंपरागत खेती छोड़कर टमाटर के पौधे उगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते पूरे उत्तर प्रदेश सलारपुर खालसा व हैबतपुर टमाटर के सबसे बड़े उत्पादक बन गए।

देश में टमाटर के 100 के पार
इधर, देश में इस समय टमाटर के भाव आमसान छू रहे हैं। एक माह में टमाटर की कीमतें पांच बार बढ़ चुकी हैं। यूपी के प्रयागराज की सब्जी मंडियों में बुधवार को टमाटर 100 से 120 रुपए किलोग्राम में बिके हैं। दिल्ली, पंजाब व राजस्थान समेत कई राज्यों में टमाटर के भाव ने शतक मार दिया।
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