राहुल गांधी के दो जगह से चुनाव लड़ने पर क्या है अमेठी की जनता की राय?
Amethi news, अमेठी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश के अमेठी और केरल के वायनाड से चुनाव लड़ने की बात बीजेपी के लिए चुनावी मुद्दा बन गया है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राहुल पर हमला बोलते हुए कहा है कि राहुल डर के मारे वायनाड भागे हैं, अब वहां तुष्टीकरण की राजनीति करेंगे। हालांकि, अमेठी के अधिकतर लोग अपने सांसद के डर के भागने की बात को नकार रहे हैं। यहां के लोगों का कहना है की केरल से उनका बुलावा आया है, इसलिए वहां जा रहे हैं। वैसे भी जो प्रधानमंत्री बनता है वो दो जगह से जीतता है तो प्रधानमंत्री बनता है।

जानें क्या कहती है अमेठी की जनता
अमेठी के युवा सुभाष चंद्र की मानें तो स्मृति ईरानी के डर से दो जगह से चुनाव नहीं लड़ रहे। इनका कहना है कि केरल से उनका बुलावा आया है, इसलिए वहां जा रहे हैं। वैसे भी जो भी प्रधानमंत्री बनते हैं दो जगह से जीतते हैं तो प्रधानमंत्री बनते हैं। वहीं, आचार्य त्रिपाठी ने कहा कि इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए। इससे पहले सोनिया गांधी अमेठी और बेल्लारी से चुनाव लड़ चुकी हैं। लोकतंत्र में दो जगह से चुनाव लड़ा जा सकता है, ऐसी कोई असुविधा नहीं है। हां ये जरूर है कि अपने क्षेत्र अमेठी को उन्होंने ध्यान नहीं दिया, जिस तरीके से अमेठी का विकास करना चाहिए था, वह नहीं किया जो कष्टदाई है।

दो जगह से चुनाव लड़ना कोई मुद्दा नहीं: एडवोकेट
बार्बर का काम करने वाले मोहम्मद नाजिम को भी राजनीति में रुचि है। नाजिम का कहना है कि राहुल गांधी स्मृति ईरानी से डरे नहीं हैं। राहुल गांधी इसलिए दक्षिण गए हैं, क्योंकि वहां की सीट मजबूत हो जाए और वहां से ज्यादा सीटें आएं। अमेठी से तो राहुल गांधी जीतेंगे ही। 2014 में राहुल गांधी जीते हैं तो 2019 में राहुल गांधी ही जीतेंगे। एडवोकेट राजेश मिश्रा काफी आक्रमक मूड में दिखे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी दो जगह से चुनाव लड़ें, ये कोई मुद्दा नहीं। इस बात पर केवल नूराकुश्ती हो रही है। उन्होंने स्मृति ईरानी पर साढ़े तीन लाख वोट पाने के बाद एक काम भी नहीं करने का आरोप लगाया है। उन्होंने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री के बाद अगर सबसे ज्यादा किसी ने झूठ बोला है तो वो स्मृति ईरानी हैं। इनके झूठ से जनता ऊब गई है।

राहुल ने अमेठी को नहीं दिया समय: बुजुर्ग
55 साल के सदा सुख पांडेय का कहना है कि राहुल गांधी इतने दिन सांसद रहे, अपना पूरा समय बाहर देते रहे, लेकिन अमेठी को समय नहीं दिया। अमेठी के विकास कार्य में रुचि नहीं ली। कोई विकास नहीं किया गया। सबका उन्होंने आंकलन किया और स्मृति ईरानी के कार्य का आंकलन किया कि मुझसे कई ज़्यादा गुना विकास पराजित हुए प्रत्याशी ने किया है, अमेठी की जनता जागरुक हो चुकी है, इसलिए उनको शंका है कि मैं अमेठी से चुनाव नहीं जीतूंगा, इसलिए उन्होंने केरल जाने के लिए स्थान तलाशा। वहीं, फूड कम्पनी संचालक मोहम्मद गुड्डू का कहना है कि अभी तक तो कभी राहुल गांधी दो जगह से चुनाव नहीं लड़े थे और अभी हो सकता है कि बदल जाएं, क्योंकि अमेठी उनका मुख्य क्षेत्र है, स्मृति ईरानी राहुल गांधी के मुकाबले में खुद चुनाव हार जाएंगी।

राहुल को सता रहा डर: युवा
अमेठी के युवा अजय पांडेय का कहना है कि कहीं न कहीं राहुल को डर सता रहा है। उनका अमेठी की जनता से विश्वास उठ गया है, जबकि अमेठी उनका परिवार माना जाता रहा और परिवार के नाते लोग वोटिंग भी करते रहे। फिलहाल, अमेठी में विकास आजतक कुछ किया नहीं। वो जब से आए हैं, अमेठी जैसी थी वैसी ही है,अगर फिर सांसद बने तो वैसी ही रहेगी। दुकानदार मोईद उल्ला फारुकी का मत है कि लोकतंत्र में जनता की मांग को विशेष तरजीह और वरीयता देना चाहिए। अगर लोगों की चाहत है कि राहुल गांधी मेरे यहां से भी चुनाव लड़ें तो अमेठी उनकी कर्मस्थली है। यहां से अमेठी की जनता का प्रेम उनके साथ लगा हुआ है और यहां के करण-करण में राजीव गांधी बसे हुए हैं। वो सदा बुलंद होती रहती है और अमेठी की जनता उन्हें सदा भारी वोट से जीताएगी।












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