कुंभ खत्म होते ही सामने आई लापरवाही, सड़कें धंसने पर 670 करोड़ का भुगतान रोका

Prayagraj news, प्रयागराज। कुंभ मेला के दौरान आनन-फानन में बनाई गईं सड़कें अब धसने लगी हैं। सरकार ने बड़े पैमाने पर अर्धकुंभ के लिए करोड़ों पैसा खर्च किया है लेकिन अब इसमें गोलमाल भी नजर आ रहा है। कई जगह सड़क धंसने के बाद पीडब्ल्यूडी की सड़कों की स्टेट लेबल जांच में पांच मार्गों की गुणवत्ता में कमी पाई गई है। सड़कों की गुणवत्ता मानकों के अनुसार नहीं पाई गई जिसके बाद निर्माण कार्य रिजेक्ट कर दिए गए हैं। साथ ही ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करने का आदेश जारी किया गया है। जबकि कुंभ कार्यों में आ रही खामियों को देखते हुये मेला प्रशासन ने कई विभागों की अब तक स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 670 करोड़ रुपये के आहरण पर रोक लगा दी है। अब बिलों में वर्णित कार्यों का सत्यापन करने के बाद ही भुगतान होगा।

पांच सड़कों का कार्य रिजेक्ट

पांच सड़कों का कार्य रिजेक्ट

स्टेट लेबल की जांच के बाद प्रमुख अभियंता वीके सिंह की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार कुंभ के दौरान बनाई गई पीडब्ल्यूडी की सड़कों में भारी खामी देखने को मिली है। जीटी रोड के 187 किमी से 194 किमी के बीच हुआ कार्य, नवीनीकरण कार्य, फाफामऊ-सहसों-हनुमानगंज मार्ग केचौड़ीकरण, सोरांव, फूलपुर-हंडिया मार्ग तक वाया दमगढ़ा संपर्क मार्ग, प्रयागराज-गोरखपुर मार्ग में वीसी एवं डीबीएम की डेंसिटी मानक के विपरीत है। इसके लिऐ अधिकारियों को को कारण बताओ नोटिस जारी कर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने को कहा गया है। इन पांचों सड़कों को अधोमानक के रूप में दर्ज करते हुए रिजेक्ट कर दिया गया है।

बिना सत्यापन नहीं होगा भुगतान

बिना सत्यापन नहीं होगा भुगतान

सरकार ने कुंभ मेला के मद्देनजर प्रयागराज के लिये सरकारी खजाना खोल दिया था और यहां विकास के लिऐ पैसा पानी की तरह बहाया गया है। ऐसे में कुंभ कार्यों में खानापूर्ति व गोलमाल की पहले से ही शिकायतें होती रही, लेकिन सरकार कुंभ निपटाने में जुटी रही। अब जब कार्यों का भुगतान शुरू हुआ उससे पहले सत्यापन के लिऐ टीमों ने जांच शुरू की। इसी बीच कुंभ के दौरान कयी सडके धंस गयी जिससे जांच का क्रम बेहद ही गंभीरता से शुरू हुआ तो ढेरों खामियां सामने आने लगी है। पांच सडकों का कार्य रिजेक्ट होने के बाद मेला प्रशासन ने कई विभागों की अब तक स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 670 करोड़ रुपये के आहरण पर रोक लगा दी है। अब सभी बिलों में वर्णित कार्यों का सत्यापन करने के बाद ही भुगतान किया जायेगा।

मेला प्रशासन फूंक-फूंक कर रखेगा कदम

मेला प्रशासन फूंक-फूंक कर रखेगा कदम

कुंभ मेला प्रशासन ने बजट के लिऐ स्वीकृत धनराशि को लेकर अब फूंक फूंक ही कदम रखने का निर्णय लिया है। जिसके तहत अब उन सभी विभाग को जिनके बिल पर भुगतान होना है उसके लिऐ प्रस्तावित बिलों की सत्यापन आख्या, प्री आडिट, पोस्ट आडिट तथा थर्ड पार्टी निरीक्षण के बाद ही आगे का भुगतान होगा। फिलहाल अब नये वित्तीय वर्ष में वास्तविक आंकलन के अनुरूप ही भुगतान किया जायेगा।

सवा दो सौ करोड़ बचने की उम्मीद
कुंभ मेला बजट के तहत कुल 2686 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। जिसमें अधिकांश भुगतान बीते वित्तीय वर्ष में हो भी चुका है। लेकिन नये वित्तीय वर्ष में अब मुश्किल बढ़ेगी। क्योंकि मेला प्रशासन ने जिस तरह से बिलों के भुगतान के प्रति सख्ती अख्तियार की है उससे यह पूरी संभावना है कि कुंभ के नाम पर करोड़ों रुपये डकारने का प्लान बनाये बड़े नामों को अब झटका लगेगा। बिलों के परीक्षण वा वास्तविक आकलन के बाद सवा दो सौ करोड रूपये तक बचने का अनुमान लगाया जा रहा है। अब बिना व्यापक परीक्षण तथा वांछित निरीक्षण आख्या के भुगतान नही होगा। मंडलायुक्त आशीष गोयल ने बताया कि एक-एक पाई का वास्तविक भुगतान होगा। बची हुई धनराशि शासकीय कोष में वापस होगी।

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