खाकी को सलाम! पति ने किया इनकार तो पुलिसवाले ने दिया मृतक महिला को कंधा

Prayagraj News, प्रयागराज। खाकी वर्दी को देख एक और जहां लोग के मन में पुलिस को लेकर डर बसा हैं वहीं, दूसरी और यूपी पुलिस के कुछ सिपाही लगातार अपने काम से आम जनता का दिल जीतने की कोशिश कर रहे है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से सामने आया है। यहां एक महिला की मौत के बाद उसके पति तक ने अपनी पत्नी की अर्थी को कंधा देने से इनकार कर दिया। तब एक पुलिसकर्मी ने न सिर्फ महिला की अर्थी को कंधा दिया, बल्कि पूरी जिम्मेदारी के साथ एक एक बेटे के रूप में महिला का अंतिम संस्कार भी किया।

क्या है मामला

क्या है मामला

मामला प्रयागराज जिले के फाफामऊ इलाके का है। यह इलाका सोरांव थाना क्षेत्र में आता है और यहां पुलिस सुरक्षा के लिये फाफामऊ पुलिस चौकी भी स्थिापित की गयी है। यह रिपोर्टिंग पुलिस चौकी है और रविवार को यहां तैनात कांस्टेबल बिजेन्द्र को सूचना मिली कि एक महिला की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं है। सिर्फ एक बेटी है, जो पैसे के अभाव में असहाय है। कांस्टेबल बिजेंन्द्र ने मामले की सूचना पहले अपने चौकी इंचार्ज शेर सिंह को दी और घटना की पूरी जानकारी एकत्रित की। पता चला कि रामदुलारी नाम की महिला की मौत हुई है और उसका पति मिठाई लाल अभी मौजूद है। लेकिन, उसने अपनी पत्नी के शव को हाथ लगाने से ही मना कर दिया है। घर में सिर्फ एक बेटी राधा है, लेकिन उसके पास ना पैसे हैं और ना ही कोई मदद के लिये सामने आ रहा है।

मदद करने पहुंच गए पुलिसकर्मी

मदद करने पहुंच गए पुलिसकर्मी

घटना कन्फर्म होते ही फाफामऊ पुलिस चौकी की टीम मृतक महिला रामदुलारी के घर पहुंची तो हालात देखकर चौक गयी। महिला की लाश के बगल बैठकर बेटी राधा बिलख रही थी और पडोसी अपने घरों पर बैठे थे कि कहीं वहां जाने पर राधा उनसे पैसे ना मांग ले। इस अमानवीय व्यवहार से पुलिस का सामना कोई पहली बार नहीं हुआ था और हालात भांप कर पुलिस वालों ने खुद ही अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाल ली।

सजाई गयी अर्थी

सजाई गयी अर्थी

कांस्टेबल बिजेन्द्र की अगुवई में अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई और पुलिस वालों ने ही महिला की पहले अर्थी सजाई और फिर चौकी इंचार्ज शेरसिंह, हेड कॉन्स्टेबल अशोक यादव और साथी कॉन्स्टेबल ममता के साथ अर्थी को कंधे पर उठाकर फाफामऊ गंगा घाट की ओर रवाना हुये। कांस्टेबल बिजेंद्र ने महिला के पूरे अंतिम संस्कार का खर्च उठाया और मानवता के साथ अपने फर्ज की मिशाल पेश की। इस घटना की जानकारी जैसे ही मीडिया व सोशल मीडिया तक पहुंची लोग कांस्टेबल बिजेंद्र और पुलिस चौकी के लोगों की खूब सराहना कर रहे हैं।

लंबे समय से बीमार थी महिला

लंबे समय से बीमार थी महिला

पूछताछ में पता चला कि रामदुलारी की उम्र 60 पार कर गयी थी और लंबे समय से बीमार चल रही थी। खाने के लिये दो जून की रोटी का इंतजाम नहीं हो पाता था, ऐसे में राम दुलारी के इलाज का तो सवाल ही नहीं उठता है। फिलहाल यह घटना उदाहरण समाज में गरीबी की मौजूदगी की, जिसके आगे लाचार परिवार इसी तरह अपने जीवन के हर एक क्षण बेहद ही तंगहाली और मुश्किल में गुजार रहे हैं। जिनकी मदद के लिये सरकारें आश्वासन देती है, प्रशासनिक अमला उनके अधिकारों की पूर्ति का दावा करता है। लेकिन यह घटना हर दावे और आश्वासन को झुठला देती है और मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाती है।

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