कौन हैं योगेश शुक्ला जिनको कांग्रेस ने प्रयागराज से मैदान में उतारा?

Prayagraj news, प्रयागराज। इलाहाबाद संसदीय सीट के लिए एकदम आखिरी समय में कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिए और प्रयागराज में भाजपा के दिग्गज नेता योगेश शुक्ला को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। योगेश शुक्ला एक दिन पहले ही गुपचुप रूप से कांग्रेस में शामिल हुए थे और एक दिन बाद ही उन्हें कांग्रेस से इलाहाबाद से टिकट देकर बड़ा गेम खेला है। दो दिन पहले अचानक से कांग्रेस के दिग्गज नेता राजीव शुक्ला प्रयागराज पहुंचे और फिर यहीं से योगेश के लिए मुफीद स्थान की तलाश देखी जाने लगी। राजीव से मुलाकात के बाद उनकी कांग्रेस में जाने की पटकथा लिखी गई और रातोंरात योगेश को कांग्रेस का प्रत्याशी बनाए जाने का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया। सोमवार को जैसे ही दिल्ली में योगेश शुक्ला के कांग्रेस में जाने व इलाहाबाद से प्रत्याशी बनाये जाने की घोषणा हुई, सबसे पहला हड़कंप बीजेपी के बीच ही हुआ। क्योंकि बीजेपी को जहां सीधे नुकसान हुआ है, वहीं अब रीता जोशी के लिए यमुनापार में बढ़त बनाना आसान नहीं होगा और ब्राहम्ण कार्ड चलकर कांग्रेस ने बीजेपी के सामने अब दमदार प्रत्याशी उतारा है।

यमुनापार में है योगेश का वर्चस्व

यमुनापार में है योगेश का वर्चस्व

भाजपा की फायर ब्रांड नेता व केंद्रीय मंत्री उमा भारती के बेहद ही करीबी योगेश शुक्ला प्रयागराज के यमुनापार के जमीनी नेता और उनकी गिनती उन नेताओं में की जाती है जो भाजपा को किसी एक इलाके में अकेले ही खड़ा करने वाली शख्सियत हैं। यमुनापार इलाके में योगेश के पास खुद का बड़ा वोट बैंक है और अपनी जमीनी छवि के कारण उनका मतदाताओं के बीच लोकप्रियता का वर्चस्व है। प्रयागराज के यमुनापार इलाके में भाजपा की जमीन तैयार करने वाले और कार्यकर्ताओं की फौज बनाकर भाजपा को इस इलाके में जिंदा करने वाले योगेश मौर्य इस चुनाव में भाजपा के प्रबल दावेदार थे। उनका नाम भी दावेदारों की लिस्ट में सबसे उपर था। लेकिन यूपी के कद्दावर नेताओं से उनकी नजदीकी ना होना उनके लिये मुसीबत बन गया और हजारों कार्यकर्ताओं के साथ शक्ति प्रदर्शन कर पार्टी को चेतावनी देने के बाद भी उन्हे टिकट नहीं दिया गया। जिससे नाराज योगेश के पार्टी छोडने की संभावना बनी हुई थी।

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भाजपा से लड़ा था 2009 का चुनाव

भाजपा से लड़ा था 2009 का चुनाव

2004 में जब भाजपा के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी इलाहाबाद से हार गए तो वह यहां से नाराज होकर चले गए और फिर उन्होंने इलाहाबाद से कभी भी चुनाव न लड़ने की जिद पकड़ ली। 2009 में हालात यह थे कि इलाहाबाद से भाजपा को जिताउ प्रत्याशी नहीं मिल रहा था तब योगेश शुक्ला को 2009 में भाजपा ने इलाहाबाद संसदीय सीट से टिकट दिया था, लेकिन उस चुनाव में योगेश कुछ खास नहीं कर सके थे और मात्र 4 प्रतिशत वोट यानी 60,997 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे। योगेश की जमीनी छवि के पीछे उनका 25 साल से आम लोगों के उठाए गये मुद्दों पर संघर्ष करना है। योगेश की कलश यात्रा, कॉटन मिल के कर्मचारियों की हक के लिए आंदोलन ने उन्हे यमुनापार में जन जन से जोड़ दिया था। ब्राहम्ण वोटों के अलावा ओबीसी व दलित वोटों को भी अपनी छवि के हासिल करने वाले योगेश फ्रंटल संगठन स्वदेशी जागरण मंच के सबसे जुझारू नेताओं में से एक हैं, जिसकी वजह से उनकी पहचान को खूब धार मिली।

योगेश का राजनैतिक सफर

योगेश का राजनैतिक सफर

2009 में इलाहाबाद से भाजपा के टिकट पर सांसदीय का चुनाव लडने वाले योगेश शुक्ला का राजनैतिक कैरियर अपेक्षाकृत उडान नहीं पकड सका, लेकिन जमीनी नेता के तौर पर यह अपनी पहचान बनाने में सफल रहे हैं। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से छात्र राजनीति में उतरे योगेश ने अखिल भारतीय विद्वार्थी परिषद के साथ अपना कदम राजनीति में बढाया था और भाजपा के साथ ही अपने राजनैतिक कैरियर की शुरूआत की। 1991 में जब सूबे में भाजपा की सरकार बनी थी, तब उच्चशिक्षा मंत्री रहे नरेंद्र सिंह गौर के वह पीए भी रहे। 1996 में जब केंद्र में अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार बनी तब योगेश को राष्ट्रीय युवा आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया । वहीं, उमा भारती जब मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं, तब यह उमा भारतीय के सबसे खास लोगों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे। फिर तो उमा के हर कार्यक्रम में योगेश की सिक्रयता और कार्यक्रम को सफल बनाने का जिम्मा योगेश के ही कंधे पर रहता था। स्वदेशी जागरण मंच के लिए लंबे समय तक काम करने वाले योगेश मौजूदा समय में रेलवे बोर्ड की यात्री सुविधा समिति के सदस्य हैं। इलाहाबाद लोक सभा सीट के कांग्रेस प्रत्याशी योगेश शुक्ला आज यानी मंगलवार को नामांकन दाखिल करेंगे।

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