बाहुबली अतीक अहमद का बड़ा दांव, गठबंधन के टिकट पर फूलपुर सीट लड़ेंगे लोकसभा चुनाव
प्रयागराज। यूपी के बाहुबली नेता व पूर्व सांसद अतीक अहमद एक बार फिर से चुनाव मैदान में उतरने की जद्दोजहद कर रहे हैं। फूलपुर लोकसभा सीट से इस चुनाव में भी वह ताल ठोंकते नजर आयेंगे। अपना दल (कृष्णा गुट)-कांग्रेस, अतीक को बतौर गठबंधन प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारेगी। हालांकि बीते लोकसभा उप चुनाव में बुरी तरह हारने वाले अतीक अहमद ने 50 हजार से अधिक वोट पाकर अपनी उपस्थिति जरूर दर्ज करायी थी और ऐसे में मुस्लिम वोटों के सहारे वह फिर से अपने राजनैतिक कैरियर को बचाने का प्रयास करेंगे।

जेल से लड़ेंगे चुनाव
फिलहाल जेल में बंद अतीक अहमद के कैरियर को पिछले उप चुनाव में ही हार ने ब्रेक लगा दिया है और बची-खुची उम्मीद अब इसी चुनाव के सहारे टिकी हुई है। अतीक का पूरा कुनबा इस चुनाव में अपनी ताकत झोंकेगा इसमे कोई शक नहीं, लेकिन अतीक की ना मौजूदगी उनके चुनाव को पीछे धकेलने में कोई कोर कसर नहीं छोडती है। अगर अतीक कोर्ट से परमीशन पाकर किसी तरह चुनाव प्रचार प्रसार के लिए पैरोल पर बाहर आ सके तो निश्चित तौर पर वह कांग्रेस के लिए तुरूप का इक्का साबित हो सकते हैं। फिलहाल यह चुनाव जितना अतीक की अस्मिता को लेकर है, उससे कम कांग्रेस के लिये भी नहीं है। प्रियंका गांधी लगातार रणनीति बना रही हैं और अतीक को चुनाव लड़ने की रणनीति भी उसी का हिस्सा है।

अपना दल ज्वाइन करेंगे अतीक
पिछले पंचवर्षीय चुनाव के दौरान अतीक अहमद को सपा से टिकट न दिये जाने व पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने के बाद अतीक को अपना दल ने ही सहारा दिया था। अब एक बार फिर से अतीक को अपना दल ज्वाइन कराने की तैयारी है। अतीक अहमद को अपना दल ज्वाइन कराने के बाद कांग्रेस से गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर उन्हें फूलपुर से चुनावी मैदान में उतारा जायेगा। फिलहाल अतीक इससे पहले भी अपना दल के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। प्रतापगढ से चुनाव लड़ने के दौरान वह उतना प्रभाव नहीं छोड सके और जल्द ही उन्होंने अपना दल के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सपा में फिर से उन्होंने वापसी की, लेकिन विधान सभा चुनाव के दौरान उनका टिकट अखिलेश यादव ने काट दिया। इसके बाद सपा से उनकी दूरी बढ़ती गयी और जल्द ही उन पर कानूनी शिंकजा कसा और वह अब जेल में बंद है। फिलहाल अतीक के एक बार फिर से जेल के अंदर से चुनाव लड़ने की तैयारी ने तूल पकड़ लिया है।

जातिगत समीकरण
फिलहाल पार्टी के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार इस चुनाव में अतीक अपना दल-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी होंगे और इसके लिये अपना दल समेत कांग्रेस से गठबंधन करने वाले अन्य छोटे दलों की मीटिंग भी दिल्ली में विशेष तौर पर की गयी है। जिसमें कृष्णा पटेल, प्रियंका गांधी व अन्य नेताओं ने इस पर अपनी सहमति जताई है। फिलहाल अतीक के चुनाव में आने की संभावनाओं के साथ् ही फूलपुर का राजनैतिक समीकरण फिर से बदलने लगा है। सर्वाधिक संख्या में कुर्मी बिरादरी के वोट फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में हैं और बैकवर्ड राजनीति के सहारे ही पिछले कुछ चुनाव में हार जीत तय हो रही है। ऐसे में कुर्मी बाहुल्य फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में अपनी पैठ भीतर तक रखने वाले अपना दल के सहारे कांग्रेस यहां भी वापसी करना चाह रही है। पिछले चुनाव में अतीक अहमद के मुस्लिम वोटों को जुटाने में मिली सफलता को अगर कांग्रेस व अपना दल के वोटो से जोडा जाये तो निश्चित तौर पर लडाई कांटे की होगी।

अतीक रहे हैं सांसद
फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में करीब 19 लाख मतदाता हैं। उनमें सर्वाधिक संख्या कुर्मी बिरादरी की है और तीसरे नंबर पर मुस्लिम वोटों की संख्या है। पिछली बार सपा के टिकट पर जब अतीक ने यहां से चुनाव लडे थे तो यादव, मुस्लिम और बैकवर्ड के सहारे ही जीत हासिल की थी। अतीक का फूलपुर इलाके में वर्चस्व रहा है और हर तरह अतीक की तूती ही बोला करती थी। लेकिन जेल के अंदर से उनका चुनाव प्रभावित होता है, ऐसे में अतीक के चुनाव को मुस्लिम वोटों के साथ अगर बैकवर्ड सपोर्ट मिला तो कांग्रेस के मूल वोटरों के सहारे यहां अतीक को लडाई में लाया जाया सकेगा।












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