Ajmer Dargah News: क्या अजमेर दरगाह की खिड़कियों पर बने हैं स्वास्तिक? ढाई दिन के झोपड़े ने खोली सबकी पोल
Ajmer Dargah Fact check: राजस्थान के अजमेर में सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह नीचे संकट मोचन महादेव मंदिर होने के दावे की सुर्खियों के बीच अब यह भी कहा जा रहा है कि अजमेर दरगाह की खिड़कियों पर स्वास्तिक बने हुए हैं। सोशल मीडिया पर स्वास्तिक की तस्वीर खूब वायरल हो रही हैं।
उत्तर प्रदेश के संभल की शाही जामा मस्जिद के बाद अब अजमेर दरगाह शरीफ के चर्चा में आने की वजह यह है कि अजमेर के सिविल कोर्ट में हिंदू सेना चीफ विष्णु गुप्ता ने दरगाह शरीफ में शिव मंदिर होने के दावे की याचिका दायर की है, जिसे 27 नवंबर को मंजूर कर लिया और पक्षकारों को नोटिस भेजे हैं। अब अगली सुनवाई 20 दिसंबर को है।
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अजमेर दरगाह-शिव मंदिर विवाद के बीच आईए जानते हैं स्वास्तिक के दावों की सच्चाई?
चार-पांच शिव मंदिर होने का दावा
सोशल मीडिया प्लेटफॉम एक्स पर महादेव शरणम् @Kuldeep84162406 की आईडी से शेयर की गई पोस्ट में लिखा है कि '4-6 नहीं अजमेर शरीफ दरगाह शिव मन्दिर है, इस बात के सैकड़ों सबूत हैं जो कि मुगलों द्वारा मिटाये गये थे॥ हर हर महादेव।
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TheRitamApp | द ऋतम् एप @TheRitamApp ने लिखा कि 'ज्ञानवापी के बाद अजमेर दरगाह का भी होगा सर्वे ? महाराणा प्रताप सेना का दावा- शिवमंदिर को बना दिया गया ख्वाजा की दरगाह, ASI से कराया जाए सर्वे। तस्वीर जारी कर कहा- दरगाह में स्वास्तिक क्यों? दीवारों व खिड़कियों पर हिंदू धर्म के प्रतीक चिन्ह।
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महाराणा प्रताप सेना के पत्र में दावा
दो साल पहले महाराणा प्रताप सेना ने भी ऐसा दावा किया था। सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार की ओर से 25 मई 2022 को तत्कालीन राजस्थान सीएम अशोक गहलोत को पत्र भेजा गया, जिसमें लिखा था कि 'अजमेर स्थित हजरत ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह हमारा प्राचीन' हिंदू मंदिर है। वहां की दीवारों और खिड़कियों में स्वास्तिक के चिन्ह मिले हैं एवं अन्य हिंदू धर्म से संबंधित चिन्ह पाए गए हैं। अत: महाराणा प्रताप सेना आपसे अनुराधे करती है कि वहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा सर्वे कराया जाए, जिससे आपको पुख्ता सबूत प्राप्त होंगे कि वह एक हिंदू मंदिर है।

अजमेर दरगाह स्वास्तिक दावों की पड़ताल
वनइंडिया हिंदी टीम ने अजमेर दरगाह की दीवारों व खिड़कियों पर स्वास्तिक वाले दावे की पड़ताल की तो सच्चाई कुछ और ही निकली। 'अजमेर दरगाह स्वास्तिक' कीवर्ड को गूगल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सर्च किया तो पता चला कि स्वास्तिक वाली जिस तस्वीर को अजमेर दरगाह की बताया जा रहा है ढाई दिन के झोपड़े की है। ऐतिहासिक इमारत ढाई दिन का झोपड़ा अजमेर दरगाह से करीब एक किलोमीटर दूर है।

ढाई दिन का झोपड़ा में स्वास्तिक
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर Prashant Umrao की ओर से 24 नवंबर 2020 को ढाई दिन के झोपड़े की दीवारों और खिड़कियों की चार तस्वीरें शेयर की है, जिनमें स्वास्तिक वाली तस्वीरें भी हैं। ये लिखते हैं कि 'स्वास्तिक और मूर्ति होने के बाद भी लोग इसे मस्जिद कहते हैं। अढ़ाई दिन का झोपड़ा-कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे मात्र ढाई दिन में बनाया था। ऐसा हमने सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई गई पुस्तक में पढ़ा। सच है कि कुतुबुद्दीन ऐबक नें इसे ढाई दिन में बनाया नही बल्कि तोड़ा था। अब सुधार आवश्यक है।'
क्या है ढाई दिन का झोपड़ा?
दरअसल, अजमेर में ढाई दिन का झोपड़े का निर्माण ख़्वाजा साहब के साथ आए मुहम्मद गौरी के सेनापति और गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाया था। करीब 800 साल पुराना ढाई दिन का झोपड़ा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से संरक्षित है। इस ढांचे के भीतर मस्जिद में नमाज अदा की जाती है। कुछ इतिहासकार यह भी दावा कर चुके हैं कि महाराजा विग्रहराज चौहान की ओर से देवालय और संस्कृत शिक्षण केंद्र की स्थापना करवाई गई थी, जिसे मोहममद गोरी के कहने पर कुतुबुददीन ऐबक ने तोड़कर महज ढाई दिन यह इमारत बनवा दी।












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