अजमेर: ताऊ के मर्डर बाद जागा वैराग्य भाव, घर छोड़ साध्वी बन गई 23 साल की नेहा लोढ़ा
बिहार के किशनगंज की रहने वाली नेहा लोढ़ा ने तीन अन्य साध्वी के साथ राजस्थान के अजमेर के बिजयनगर में 23 फरवरी 2023 को दीक्षा ली।

राजस्थान के अजमेर जिले के बिजयनगर में जैनाचार्य प्रवर विजयराज महाराज की पावन निशा में जैन भगवती दीक्षा महोत्सव हुआ, जिसमें नेहा लोढ़ा, आंचल धमानी, निशा कोठारी व स्नेहा गोलेच्छा ने दीक्षा ली।
दीक्षा महोत्सव में सभी को नया नाम दिया गया। इस दौरान जैन समाज के लोगों का उत्साह देखते बना। बिजयनगर में पहली बार चार जैन ने एक साथ दीक्षा ली है। इस दौरान करीब साठ संत मुनि व साध्वियां मौजूद रहीं।
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मीडिया से बातचीत में युवा संघ के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री प्रकाश जैन ने बताया कि नामकरण सभा में नव दीक्षित महासतियां जी महाराज के जयकारों से पंडाल गूंजा दिया। दीक्षा लेने वालीं स्नेहा को स्नेहा प्रभाश्री, निशा का नित्य प्रभाश्री, नेहा को निरंतर प्रभाश्री व आंचल का संकल्प प्रभाश्री नाम दिया गया।
बता दें कि अजमेर के बिजनगर में दीक्षा लेने वाली नेहा लोढ़ा की उम्र महज 23 साल है। यह मूलरूप से बिहार के किशनगंज की रहने वाली हैं। सन्यास लेने के पीछे नेहा ने हर किसी को झकझोर देने वाली वजह बताई।
नेहा ने बताया कि जब वह 12 साल की थी तब उसके ताऊजी राजेंद्र लोढ़ा की लुटेरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। ताऊजी की हत्या ने नेहा को झकझोर दिया और इसमें वैराग्य भाव जाग गया। जब भी ताऊजी की हत्या की बात याद आती तो नेहा परेशान हो उठती थी।
इस बीच नेहा का साधु संतों से सम्पर्क हो गया तो उसने साध्वी बनने का फैसला लिया। धर्म मार्ग पर चलने की ठानी तो एक बारगी परिजन उसके फैसले पर हैरान हुए। हालांकि बाद में परिजनों ने सहमति दे दी।












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