गुजरात: कांग्रेस पार्टी में मचा घमासान, जूनियरों और सीनियरों बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज

Gandhinagar News,(गांधीनगर)। गुजरात में कांग्रेस पार्टी अंदरूनी कलह से जूझ रही है। वरिष्ठ नेताओं ने जूनियर्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वरिष्ठों की अनदेखी और जूनियरों के काम करने के तरीकों के खिलाफ मोर्चा खुला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन मोढवाडिया ने सवाल उठाया है कि कांग्रेस पार्टी का मौजूदा ढांचा अच्छी तरह से चल नहीं रहा है। उन्होंने प्रदेश संगठन में बदलाव की गुहार लगाई है। सूत्रों के अनुसार मोढवाडिया के आवास पर बैठक में 17 वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। ये नेता क्षेत्रीय अध्यक्ष अमित चावड़ा से नाराज हैं। पार्टी में अपनी अज्ञानता के कारण उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की है। लोकसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय कांग्रेस के ढांचे में बदलाव हो ऐसा उनका मानना है। इस बात को लेकर बैठक भी बुलाई गई थी।

वर्चस्व को लेकर मचा घमासान

वर्चस्व को लेकर मचा घमासान

गुजरात विधानसभा चुनाव में हारने वाले अर्जुन मोढवाडिया और सिद्धार्थ पटेल ने बगावत का नेतृत्व संभाला है। पार्टी में इन दिनों नाराजगी उबल रही है। गुजरात कांग्रेस एक बार फिर टूट रही है। पिछले विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस टूट गई थी, जिसमें वरिष्ठ और मजबूत नेता शंकरसिंह वाघेला ने पार्टी छोड़ दी थी। उससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सौराष्ट्र के पटेल लीडर विठ्ठल रादडिया उनके पुत्र जयेश रादडिया और अहमदाबाद के नरहरि अमीन ने पार्टी को छोड़ दिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे। गुजरात कांग्रेस के ओबीसी समूह का नेतृत्व करने वाले युवा विधायक अल्पेश ठाकोर भी बैठक में मौजूद थे। यह कहा जाता है कि वह कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी हैं। इस बैठक में पूर्व सांसद दिनशा पटेल भी मौजूद थे।

जूनियर और सीनियर नेताओं की है लड़ाई

जूनियर और सीनियर नेताओं की है लड़ाई

अर्जुन मोढवाडिया ने बैठक के बारे में कहा कि हम चाहते हैं कि कांग्रेस जब तीन राज्यों में विजयी हुई है तब ऐसे नतीजे गुजरात में भी आने चाहिए। हम गुजरात में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए मिले हैं। हाईकमान से हमारी अपील है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बेहतर बनाने के लिए कुछ बदलाव किया जाना चाहिए। अल्पेश ठाकोर ने कहा कि कांग्रेस में सभी को साथ ले के चलना चाहिए। गुजरात में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की भी जरूरत है। किसी भी व्यक्ति या नेता को क्षमता के अनुसार जिम्मेदारी देनी चाहिए। लोकसभा चुनावों में, कांग्रेस को इस बार 26 सीटों में से 12 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि पार्टी में आंतरिक घर्षण हुआ है। जूनियर्स के खिलाफ सीनियर्स की लड़ाई शुरू हो गई है। कुछ नेता संभावना व्यक्त कर रहे हैं कि यह मामला हाईकमान तक जाएगा। जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जूनियरों का नेतृत्व कर रहे हैं तो वरिष्ठ नेतागण नाराज हैं। राहुल गांधी देश के तमाम राज्यों में एक नया कैडर बनाना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री पद के लिए मचा घमासान

मुख्यमंत्री पद के लिए मचा घमासान

मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस की जीत के बाद, जूनियर और वरिष्ठ नेताओं के बीच मुख्यमंत्री की लड़ाई शुरू हूई थी। इसमें राहुल गांधी ने राजस्थान में फॉर्मूला बनाई और वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री और जूनियर नेता सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री नियुक्त किया था। हालांकि, मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया था और ज्योतिरादित्य सिंधिया को मना लिया था। गुजरात में मजबूरी यह है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विधानसभा के चुनाव जीत सकते नहीं और उनको संगठन में पावर चाहिए। सीनियर्स लोग जूनियर्स को आगे नहीं आने देते हैं। कहा जाता है कि कांग्रेस चुनावों में भाजपा के साथ नहीं खुद के नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा करती है। चुनाव में खड़े हुए पार्टी के प्रत्याशी को हराने की परंपरा गुजरात कांग्रेस में प्रचलित है।

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