अहमदाबाद में पीडियाट्रिक म्यूकोरमाइकोसिस का पहला मामला, कोरोना मुक्त 15 साल का लड़का पीड़ित
अहमदाबाद। कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझने वाले लोगों को म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) होने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। गुजरात में अहमदाबाद के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में 15 साल के एक लड़के को म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) से पीड़ित पाया गया है। प्राइवेट हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक डॉक्टर अभिषेक बंसल ने बताया कि, अहमदाबाद में पीडियाट्रिक म्यूकोरमाइकोसिस का यह पहला मामला है।
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डॉक्टर ने कहा कि, "15 वर्षीय लड़का कोरोना के संक्रमण से मुक्त हुआ था। डिस्चार्ज किए जाने पर पता चला कि, उसे म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) है। जिसके चलते ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद लड़के की हालत स्थिर है। अब हम उसे 2 या 3 दिनों में छुट्टी देने की उम्मीद करते हैं।

यहां अस्पतालों में 1 हजार से ज्यादा मरीज
गुजरात में ब्लैक फंगस के हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। 18 मई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 5 शहरों के 8 बड़े अस्पतालों में 1,163 म्यूकोरमाइकोसिस रोगी थे। ज्यादातर डॉक्टर्स का कहना था कि, मामले बढ़ने के चलते इस बीमारी से निपटने की दवा सबको नहीं मिल पा रही। मामले बढ़ने से एंटीफंगल दवा की आपूर्ति कम हो रही है। डॉक्टर्स का कहना है कि, इस तरह के फंगल इंफेक्शन के लिए 'एम्फोटेरिसिन-बी' दवा दी जाती है और इसी दवा की कम आपूर्ति अब राज्य भर के अस्पतालों के लिए चिंता का सबब बन गई है।
सरकार के पास एंटीफंगल दवा का स्टॉक पर्याप्त नहीं
डॉक्टरों का कहना है कि, इस तरह के रोग के जहां जल्दी पता लगने से ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है, वहीं कुछ मामलों में इलाज के लिए बहुत कम वक्त बचता है या किसी मामले में कोई मौका भी नहीं मिलता। म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस के मामलों पर दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर गुजरात उच्च न्यायालय ने सुनवाई की थी। तब उच्च न्यायालय ने म्यूकोरमाइकोसिस के मामलों को "एक बहुत ही गंभीर मुद्दा" बताया था। और राज्य सरकार से उसके वकील के माध्यम से विवरण मांगा था। एडवोकेट जनरल (एजी) कमल त्रिवेदी ने बताया था कि, सरकार इस समस्या से निपटने के लिए क्या कर रही है। साथ ही एंटीफंगल दवा का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने की क्या योजना बनाई गई है।












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