पारस हॉस्पिटल में 'ऑक्सीजन मॉक ड्रिल' के दौरान नहीं हुई थी मरीजों की मौत, प्रशासन ने दी क्लीन चिट
पारस हॉस्पिटल में 'ऑक्सीजन मॉक ड्रिल' के दौरान नहीं हुई थी मरीजों की मौत, प्रशासन ने दी क्लीन चिट
आगरा, जून 19: श्री पारस हॉस्पिटल में 26 व 27 अप्रैल को मॉक ड्रिल के दौरान ऑक्सीजन की कमी होने से 22 मरीजों की मौत हो गई थी। इस मामले में जिला प्रशासन की जांच पूरी हो गई है। जांच रिपोर्ट के बाद पारस हॉस्पिटल को जिला प्रशासन ने क्लीन चिट दे दी है। दरअसल, जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस कथित वायरल वीडियो के आधार पर ऑक्सीजन की कमी से 22 मरीजों की मौत का दावा किया गया था, वह सही नहीं है।
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आगरा डीएम प्रभु एन सिंह ने शुक्रवार को प्रेसनोट जारी किया। जिसमें प्रशासनिक जांच में 16 मरीजों की मौतों का कारण ऑक्सीजन की कमी नहीं, बल्कि मरीजों में संक्रमण की गंभीर स्थिति और अन्य बीमारियां को माना गया है। जांच पैनल ने हॉस्पिटल को ऑक्सिजन की कमी के आधार पर मरीजों को गुमराह करने का दोषी पाया है और ऐक्शन के निर्देश दिए हैं। डेथ ऑडिट कमिटी ने कहा, 'यह बिल्कुल भी सच नहीं है कि मॉक ड्रिल के लिए ऑक्सिजन की आपूर्ति बंद होने से 22 मरीजों की मौत हो गई। ड्रिल के लिए किसी की ऑक्सिजन नहीं काटी गई और न ही इसका कोई सबूत है। यह भ्रामक सूचना है।'
प्रशासन ने अस्पताल को कर दिया था सीज
आपको बता दें कि वीडियो वायरल होने के बाद पारस हॉस्पिटल को जिला प्रशासन ने सीज कर दिया था। अब जांच के बाद अस्पताल को क्लीन चिट देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि मॉक ड्रिल और ऑक्सीजन सप्लाई रोके जाने का कोई भी सबूत नहीं मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच में पाया गया है कि 15 अप्रैल से 25 अप्रैल के बीच में श्रीपारस हॉस्पिटल में 16 लोगों की जान गई थी। इसमें से 14 मरीज गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। अस्पताल के मालिक का यह वीडियो काफी तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए थे।












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