NEET UG Result 2023: ट्रक मैकेनिक की बेटी ने नीट-यूजी में हासिल की 192वीं रैंक, ट्यूशन पढ़ाया और...

NEET UG 2023 Result Toppers Success Story: देशभर में 192 वीं रैंक हासिल करके ट्रक मैकेनिक की 21 वर्षीय बेटी आरती झा ने परिवार का ही नहीं, बल्कि जिले का नाम भी रोशन किया है। नीट-यूजी की तैयारी के बीच आरती झा ने घर में आर्थिक संकट का दौर भी देखा। लेकिन, आरती ने आर्थिक संकट का असर अपनी तैयारी पर नहीं आने दिया।

कड़ी मेहनत और परिवार के साथ के कारण ही आरती झा आज इस मुकमा तक पहुंची है। वहीं, अब आरती को दिल्ली के एम्स में एडमिशन मिलने की उम्मीद है। आरती झा, उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के सेवला की रहने वाली है। आरती के पिता विशंभर झा ट्रक मैकेनिक का काम करते हैं और मां गुड्डी देवी गृहिणी हैं।

aarti jha agra

आरती अपने चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरती झा के घर की आर्थिक स्थिति भी ज्यादा ठीक (मजबूत) नहीं है। आरती बताती है कि घर के हालातों को देखते हुए मैंने ट्यूशन देने शुरू किया, जिससे मेरी पढ़ाई का खर्च निकल सके। साथ ही, परिवार को भी सहयोग मिलता रहे।

मीडिया से बातचीत के दौरान आरती झा ने बताया कि साल 2018 एसएस पब्लिक स्कूल से 12वीं की थी। 12वीं में 86 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे। फिर साल 2020 में नीट की तैयार शुरू की थी। नीट की तैयारी करते हुए बच्चों को ट्यूशन भी दिया करती थी।

नीट की तैयारी के दौरान लगने वाले डर को भी आरती झा ने साझा किया। आरती ने बताया कि नीट-यूजी की तैयारी के दौरान उन्हें एक डर सताता रहता था कि कहीं पढ़ाई के दौरान नींद ना आ जाए और पढ़ाई पीछे न रह जाए। इसलिए वह गर्मियों में पंखा बंद करके पढ़ती थी।

आरती के पिता बिशम्भर झा ने बताया कि पढ़ते समय नींद न आ जाए और वह पढ़ाई में पिछड़ न जाए इस डर से आरती पंखा बंद करके पढ़ाई किया करती थी। इस दौरान उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह परिवार से पहली डॉक्टर होगी। यह परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि है।

आर्थिक समस्याओं के बावजूद उसने नीट-यूजी की परीक्षा पास की है। परिवार को उसपर गर्व है। आरती को अक्सर सिरदर्द रहा करता था, लेकिन उसने इसे पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया। आरती सिरदर्द को लेकर डॉक्टरी सलाह ले रही है। वहीं, आरती ने भी नीट-यूजी पास करने का सारा श्रेय अपने परिवार, खासतौर से अपने पिता को दिया।

आरती बताती है कि उनके पिता को उनपर पूरा भरोसा था कि वह एक दिन डॉक्टर बनेगी। आरती ने बताया कि यह परिवार के साथ के कारण ही संभव हो पाया है। मेरे पिता मेरी प्रेरणा हैं, क्योंकि वह हमेशा हमें प्रोत्साहित करते हैं और जब हम असफल होते हैं तो वह हमें आगे बढ़ने का हौसला देते हैं।

आरती ने बताया कि चूंकि मेरा एआईआर (देश में) रैंक 192 और ओबीसी श्रेणी में 33 है, मैं आशा करती हूं कि मुझे एम्स, दिल्ली में दाखिला मिल जाएगा और एमबीबीएस की डिग्री लेने के बाद मैं न्यूरोलॉजिस्ट बनूंगी।

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