Women's Day 2025: चार सगी बहनें बनीं UP पुलिस कांस्टेबल, पिता की मौत के बाद मां ने मजदूरी करके पढ़ाया
उत्तर प्रदेश में मथुरा सीमा पर अछनेरा जनपद आगरा में एक छोटा सा गांव है रैपुरा अहीर। यहां के वीरेंद्र सिंह का परिवार विपरित हालात में हिम्मत बनाए रखने। हर हाल में तालीम हासिल करने और मेहनत के दम पर कामयाबी पाने की मिसाल है। अंदाजा इस बात लगा लिजिए कि बचपन में पिता को खो देने के बाद पांच सगे भाई-बहन उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल बन गए।
विश्व महिला दिवस 2025 (Women's Day 2025) के मौके पर चार सगी बहनों की सक्सेस स्टोरी उन लोगों के मिसाल है, जो परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के सामने हार मान लेते हैं। असफलताओं से घबराकर घुटने टेक देते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी गुजरात के पाटन जिले के गांव हाजीपुर की चार सगी बहनों की है, जो एक साथ गुजरात पुलिस कांस्टेबल बनी हैं।

एक बहन कांस्टेबल से टीचर बनी
यह यूपी के उन चूनिंदा परिवारों में से एक है, जिनको बच्चों ने बेइंतहा गरीबी देखी और दिन-रात मेहनत की। फिर एक दूसरे के नक्शे पर चलकर चार बहनों व एक भाई ने यूपी पुलिस ज्वाइन की है। इनमें से एक बहन तो अब पुलिस कांस्टेबल पद से इस्तीफा देकर टीचर बन चुकी है।

यूपी पुलिस कांस्टेबल भाई-बहन
यूपी पुलिस कांस्टेबल भाई-बहनों में से बड़ी बहन सुनीता ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में अपने परिवार के संघर्ष और भाई-बहनों की सफलता की वो पूरी कहानी बयां की जो उन लोगों के लिए प्रेरणादायी है जिनके सिर से पिता का साया छिन जाए और मेहनत करने की बजाय किस्मत को कोसते रहते हैं।

1. सुनीता कांस्टेबल, पुलिस लाइन बरेली
पुलिस कांस्टेबल भाई-बहनों की इस जोड़ी में सबसे पहले सुनीता ने 2016 में यूपी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा पास की। बीबीए तक की शिक्षा प्राप्त करने वाली सुनीता बीते दिनों बरेली जिले के किला पुलिस थाने में पोस्टेड थीं। वर्तमान में बरेली पुलिस लाइन में सेवाएं दे रही हैं।

2. रंजीता : पहले कांस्टेबल अब टीचर
बीएड व बीएससी की डिग्री प्राप्त करने वाली दूसरी रंजीता ने अपनी दो छोटी बहन कुंति व अंजलि के साथ ही यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2019 पास की। रंजीता को यूपी के मलवा पुलिस थाने में पोस्टिंग मिली। पुलिस कांस्टेबल बनने के बाद भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। हाल ही इनका चयन शिक्षक भर्ती में हो गया तो पुलिस कांस्टेबल पद से इस्तीफा दे दिया। फिलहाल टीचर का प्रशिक्षण ले रही हैं।

3. अंजलि व कुंति कांस्टेबल, हुसैनगंज
तीसरी व चौथी बहन अंजलि व कुंती भी अपनी बड़ी बहनों के नक्शे कदम पर चलते हुए यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2019 पास की। अंजलि ने इंटर व कुंती ने बीए प्रथम वर्ष तक की पढ़ाई की है। दोनों बहनें फिलहाल फतेहपुर जिले के हुसैनगंज पुलिस थाने में तैनात हैं। यह इनकी पहली पोस्टिंग है।

4. धीरज, पीएसी में प्रशिक्षण
चार बहनों के अलावा हाल ही इनके भाई धीरज भी सफल हो चुके हैं। इनका पीएसी में कांस्टेबल पद पर चयन हुआ है। फिलहाल ये पीएसी के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। धीरज ने बीए द्वितीय वर्ष में ही सफलता हासिल कर ली।

पिता की 2002 में सड़क हादसे में मौत
सुनीता कहती हैं कि उन्होंने बचपन में ही किसान पिता को खो दिया था। साल 2002 में पिता वीरेंद्र सिंह मथुरा में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उनकी मौत की खबर भी परिजनों को सप्ताह भर बाद मिली थी। हादसे के बाद शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस ने पिता के शव का दाह संस्कार करवा दिया था। फिर अखबार में छपी खबर के आधार पर कपड़ों से परिवार ने उनकी पहचान की थी।

मां मछला देवी बनीं ताकत
पति की मौत के बाद मा मछला देवी ने सात बच्चों को संभाला। उस वक्त सबसे छोटी बेटी अंजलि महज 10 माह की थी। सुनीता आठ वर्ष, रंजीता छह वर्ष, कुंती दो साल, धीरज चार साल, दूसरे भाई सुधीर कुमार 14 साल के थे। सबसे बड़ी बहन शशि की पिता शादी करके गए थे।

पशु व खेती के जरिए बच्चों को पढ़ाया
सुनीता बताती हैं कि उनके थोड़ी जमीन है। साथ ही पिता की मौत के बाद भैंस पालने लगे। पशु व खेती के जरिए मछला देवी ने सभी बच्चों को पढ़ाया और सफल बनाया। सुनीता और उनकी बहनें अपनी मां को सबसे बड़ी ताकत मानती हैं।
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