Petrol Price Hike: अभी सिर्फ ₹3 दाम बढ़े, आगे इतना ज्यादा महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल, एक्सपर्ट्स ने चेताया
Petrol Diesel Price Hike India: देश में करीब चार साल बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। 15 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले 3 से 4 महीनों में ईंधन और महंगा हो सकता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर मंडरा रहे खतरे के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में भारत जैसी अर्थव्यवस्था, जो अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदती है, उस पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

आखिर अचानक क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम? (Fuel Price Hike Explained)
तेल कंपनियां लंबे समय से बढ़ती लागत का बोझ झेल रही थीं। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा कच्चा तेल खरीदने के बावजूद लंबे समय तक घरेलू कीमतों में बदलाव नहीं किया।
लेकिन अब हालात ऐसे हो गए कि कंपनियों पर वित्तीय दबाव तेजी से बढ़ने लगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल से जून तिमाही में सरकारी तेल कंपनियों को कुल मिलाकर करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये तक का घाटा हो सकता है। यही वजह है कि आखिरकार सरकार और कंपनियों को कीमतें बढ़ानी पड़ीं।
आगे कितने बढ़ सकते हैं दाम? (How Much More Fuel Prices Can Rise)
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा ₹3 की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को सिर्फ थोड़ी राहत मिलेगी। अगर कच्चा तेल 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है।
मास्टर पोर्टफोलियो सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर गुरमीत सिंह चावला के मुताबिक, मौजूदा हालात में नुकसान की भरपाई के लिए कुल मिलाकर करीब ₹10 प्रति लीटर तक की और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कुल बढ़ोतरी ₹13-14 प्रति लीटर तक भी जा सकती है।
अन्य देशों में कितना है पेट्रोल और डीजल का दाम?

तेल कंपनियों पर कितना बड़ा दबाव है? (OMC Losses And Pressure)
युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव शुरू होने से पहले 27 फरवरी को कच्चे तेल की कीमत करीब 67 डॉलर प्रति बैरल थी। अब यह बढ़कर 107 डॉलर के पार पहुंच चुकी है। यानी कुछ ही महीनों में करीब 60 प्रतिशत की तेजी आई है।
इस दौरान भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम लगभग स्थिर रखे गए। इसका सीधा असर सरकारी तेल कंपनियों की कमाई पर पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में इन कंपनियों की नेटवर्थ पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
चॉइस के ऊर्जा विश्लेषक धवल पोपट के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल में प्रति लीटर ₹1 की बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों के सालाना ईबीआईटीडीए में करीब ₹15,000 से ₹16,000 करोड़ तक का सुधार हो सकता है। यानी हालिया ₹3 बढ़ोतरी से कंपनियों को लगभग ₹45,000 करोड़ से ज्यादा की राहत मिल सकती है।
होर्मुज का क्यों बढ़ गया डर? (Strait Of Hormuz Tension)
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन माने जाने वाले होर्मुज को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से तेल सप्लाई करता है। अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और तेजी से उछल सकती हैं। इसी खतरे को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार अस्थिरता बनी हुई है।
आम लोगों पर क्या होगा असर? (Impact On Common People)
अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो इसका असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाने-पीने की चीजों, सब्जियों, ऑनलाइन डिलीवरी, हवाई यात्रा और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बार-बार ईंधन महंगा होने से महंगाई दर बढ़ सकती है और घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर सरकार टैक्स में राहत देती है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नीचे आती हैं, तो आने वाले समय में राहत मिल सकती है।













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