कश्मीर में शहीद हुआ 'आगरा का लाल', पंचतत्व में विलीन होते ही फफक कर रो पड़े हजारों लोग
Army jawan martyred In Kashmir : आगरा के 30 वर्षीय शिवकुमार कश्मीर में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए। नका पार्थिव शरीर आगरा पहुंचा तो हजारों की संख्या में लोग उनको श्रद्धांजलि देने पहुंचे। इस दौरान हर एक आँख नम थी।

आज हिंदुस्तान के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों में एक और नाम जुड़ गया। आगरा के 30 वर्षीय शिवकुमार कश्मीर में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए। शुक्रवार को जब उनका पार्थिव शरीर आगरा पहुंचा तो हजारों की संख्या में लोग उनको श्रद्धांजलि देने पहुंचे। इस दौरान हर एक आँख नम थी लेकिन साथ ही था आक्रोश, गुस्सा और बदला लेने की भावना थी।

गश्त के दौरान हुआ आतंकी हमला
बता दें कि आगरा के खंदौली के रहने वाले रिटायर फौजी रामरतन के 30 वर्षीय बेटे शिवकुमार जम्मू कश्मीर के हिंदवाडा में तैनात थे। जानकारी अनुसार गुरुवार दोपहर करीब दो बजे आठ सैनिकों की टुकड़ी गश्त पर थी। गश्त कर रही सैनिकों की टुकड़ी ऊंचाई पर थी, नीचे आतंकी घात लगाकर बैठे थे। सेना के जवानों को देखते ही आतंकियों ने फायरिंग कर दी। इस दौरान एक गोली शिवकुमार को लग गई। इसके बाद काफी देर जवानो की आतंकियों के साथ मुठभेड़ चली। वहीं उनके साथी उन्हें अस्पताल ले गए लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और शिवकुमार का निधन हो गया।
इसके बाद शुक्रवार देर रात शहीद शिवकुमार का पार्थिव शरीर जब खंदौली पहुंचा तो "जब तक सूरज चांद रहेगा, शिवकुमार तेरा नाम रहेगा, शिवकुमार अमर रहे" के नारे गूंजने लगे। सर्दी में भी हजारों की संख्या में लोग शहीद के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।

Recommended Video
मात्र 3 महीना का है एक बेटा
आपको बता दें कि शिवकुमार ने न सिर्फ अपना बलिदान दिया है बल्कि वो अपने पीछे एक हस्ते खेलते परिवार को रोता छोड़ गए हैं। शिवकुमार का विवाह छह वर्ष पूर्व अंजलि से हुआ था। उनकी दो बेटी भी हैं, जिनमे एक बेटी अनुष्का मात्र चार वर्ष की है और दूसरी तीन वर्ष की यासू है। उनका एक बेटा 'कृष्णा' तो अभी मात्र तीन माह का हैं। रिटायर्ड फौजी रामरतन सिंह के तीन बेटों में शिवकुमार मझले थे। उनसे बड़े विनोद और छोटे बेटे धीरज उर्फ भोले किसान हैं। चार बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है।
शिवकुमार 2016 में पठानकोट से फर्स्ट गार्ड बटालियन में भर्ती हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग पटियाला में रही। 21वीं बटालियन आरआर में दो वर्ष पूर्व ही उनका तबादला जम्मू कश्मीर से 350 किलोमीटर दूर हिंदवाड़ा में हुआ था।












Click it and Unblock the Notifications